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जुलाई 28, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

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Re: किसने शुरू किया पहला विश्व युद्ध

Sent from Samsung Mobile deshpriya07@rediffmail.com wrote: किसने शुरू किया पहला विश्व युद्ध भले ही पहले विश्व युद्ध को 100 साल पूरे हो रहे हैं लेकिन बुनियादी सवाल अभी भी उलझा हुआ है. आखिर प्रथम विश्व युद्ध किसने शुरू किया. जानकार और इतिहासकार इस मामले में नए तथ्यों को सामने ला रहे हैं. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की कनाडाई प्रोफेसर मार्गरेट मैकमिलन का कहना है, "यह ऐसा दुर्दांत युद्धथा, हमारा सहज मानव स्वभाव है कि इसके लिए किसी पर इलजाम लगाया जाए." उन्होंने किताब लिखी है, 'पहला विश्व युद्ध, जिसने शांति खत्म कर दी'. युद्ध खत्म होने के बाद 1919 में वरसाई की संधि में जर्मनी को युद्ध का जिम्मेदार बताया गया और इसके लिए बर्लिन पर बंदिशें लगाई गईं. लेकिन 1920 से ही माना जाने लगा कि इस युद्ध के लिए "सभी जिम्मेदार थे, या कोई नहीं". जर्मनी के इतिहासकार फ्रित्ज फिशर ने 1961 में एक किताब लिखी और जर्मनी के लोगों की खूब नाराजगी झेली. उन्होंने किताब में लिखा कि निश्चित तौर पर जर्मनी को ही इसका दोषी समझना चाहिए. उन्होंने लिखा कि 1914 में जर्मन प्रशासन युद्ध शुरू करना चाहता था. उन...

पैरों में दुर्गन्ध : कैसे मुक्ति पायें ?

पैरों की दुर्गन्ध क्या है पैरों में तथा शरीर के अन्य भागों में दुर्गन्ध की समस्या जिसे मेडिकल भाषा में Bromhidrosis कहते हैं; ये जिसे हो जाती है तो उसके साथ साथ उसके आस पास रहने वालों को भी बदबू से परेशानी उठानी पड़ती है. ये एक ऐसी समस्या है जिससे व्यक्ति को सामाजिक रूप से हँसी का भी पात्र बनना पड़ता है. हमारे शरीर की २०-३० लाख पसीने की ग्रंथियों में से लगभग ५ लाख ग्रंथियां सिर्फ पैरों में ही होती हैं. पैरों में दुर्गंध का कारण १.दरअसल आपके पैरों का पसीना दुर्गन्ध का कारण नहीं होता है बल्कि इसके नम वातावरण में उपस्थित हानिकारक Bacteria और पैरों की मृत कोशिकाएं यह दुर्गन्ध पैदा करते हैं. २.जब पैरों में पसीना बनता है और किसी कारण से यह वाष्पीकृत नहीं हो पाता (जैसे- मोज़े पहनना) तो यह कोशिकाओं को मार देता है और ये पैरों की त्वचा पर संख्या में बढने लगती हैं. कुछ समय बाद पैरों की मृत कोशिकाओं से दुर्गन्ध आने लगती है; यही मृत कोशिकाएं जब संख्या में बहुत अधिक हो जाती हैं तो इनसे इतनी दुर्गन्ध आने लगती है कि आसपास बैठे हुए लोगों को भी परेशानी होने लगती है और व्यक्ति के पास बैठने...

बाल झड़ने और गंजेपन के कारण -

बालों का गिरना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है और यह अलग–अलग लोगों में अलग अलग तरह से होती है। पुरूषों और महिलाओं में बालों का झड़ना आजकल एक आम बात हो गयी है। ऐसा कहते हैं यदि दिन में लगभग 100 बाल झड़ते हैं तो चिंता नहीं करनी चाहिए, लेकिन अगर आपके बाल इससे ज्यादा झड़ते हैं तो आपको ज़रूर कुछ करना चाहिए। पुरुषों में लगभग 40 -45 वर्ष की आयु में बाल झड़ने शुरू हो जाते है। लेकिन, बहुत लोगों में यह कम आयु में भी शुरू हो जाती है. हमारे पास ऐसे अनेक रोगी आते हैं जो काफी वर्षों से इन्हीं समस्याओं से परेशान हैं. मेरा अनुभव है कि अधिकाँश केसेस में शुरूआती अवस्था में सामान्य उपाय करने से ही सफलता मिल जाती है, आइये देखें कि वो क्या कारण है जिनसे बाल झड़ते हैं और कैसे लोग इससे मुक्ति पाते हैं- बाल झड़ने और गंजेपन के कारण - पुरुषों में अक्सर आनुवांशिक, जबकि महिलाओं में मुख्यतः मानसिक तनाव अन्य कारण- शरीर में पोषक तत्वों की कमी हारमोनल असंतुलन दवाओं के साइड इफेक्ट धूल-मिट्टी, तथा प्रदूषण बढ़ती उम्र फैशन के लिए बालों को अलग अलग डिजाईन से सेट करने के आधुनिक तरीके बाल झड़ने से रोकने के लिए...

गूगल का नया चैलेंज, पूरा कीजिए और बदले में पाइए 10 लाख डॉलर

नई दिल्ली: सर्च इंजिन गूगल रिन्यूएबल एनर्जी को घरेलू इस्तेमाल वाले बिजली स्रोत में बदलने वाले समाधान के विकास के लिए 10 लाख डालर (लगभग 6 करोड़ रुपये) के पुरस्कार की पेशकश कर रही है.   गूगल ने इंस्टीट्यूट आफ इलेक्ट्रिक्ल एंड इलेक्ट्रोनिक इंजीनियर्स (आईईईई) के साथ मिलकर 'लिटिल बाक्स चैलेंज' शुरू किया है. इसके तहत एक केडब्ल्यू क्षमता वाले बिजली इनवर्टर बनाया जाना है. यह उपकरण सौर तथा पवन उर्जा जैसी रिन्यूएबल एनर्जी को बिजली में बदलेगा जिसका घरों व वाहनों में इस्तेमाल किया जा सकेगा. इसमें चुनौती यह भी है कि नया उपकरण छोटे लैपटॉप के आकार का होना चाहिए. यानी मौजूदा आकार का लगभग दसवां हिस्सा. गूगल ने एक ब्लाग में यह जानकारी दी है. कंपनी का मानना है कि अगर इस तरह का उपकरण बना तो उससे भविष्य की बिजली की अवधारणा बदलने में मदद मिलेगी.

शिव की पूजा करते हैं हम ??

शिव की पूजा करते हैं हम ?? क्या डर के कारण ,क्योंकि शिव ही महाकाल हैं और मौत का डर ही शिवपूजा का कारण है ?? नहीं हम शिव को उनके कल्याणकारी होने के कारण ही पूजते हैं । यदि विचार किया जाए तो मृत्यु ही नवजीवन का आधार है । यदि मृत्यु पर विजय पा ले इन्सान तो जीवन क्या सुखी होगा ? जब मरने का डर न होगा तो अगले जन्म मे पापो का दंड भुगतने का डर भी न होगा ।फिर तो शक्तिशाली के आत्याचारो से कौन बचयगा ? चलो मान लिया कि मृत्यु पर लिजय पा ली गई पर बुढापा और रोग तो सतायगे ही ,फिर इलाज करने कौन आएगा क्यों कि डाक्टर व वैध भी तो पापी पेट के लिये ही धन्धा करते हैं जब मौत का डर न होगा तो भूख से भी मरा न जाएगा । चलो एक और स्थिति विचार करते हैं जब मृत्यु न होगी न कोई भी जीव न मरेगा । एक एक बिल में करोड़ों चिटियाँ तो अभी रहती हैं तब कितनी होगीं ? और अन्य प्राणी ? मनुष्य के लिये तो स्थान भी न होगा । चलिये यह मान लेते हैं कि केवल मनुष्य ही नही मरेगा तब भी तो कुछ काल बाद यही स्थति होगी । फिर इससे बचने के लिये नवजीवन ( शिशु उतपन्न ) को रोका जाएगा । कुछ काल बाद न तो किसी का जन्म होगा न जन्मदिन ...

अनानास के कुछ औषधीय गुणों से अवगत कराएंगे -

अनानास (Pineapple) - अनानास ब्राज़ील का आदिवासी पौधा है | क्रिस्टोफर कोलंबस ने 1493 AD में कैरेबियन द्वीप समूह के ग्वाडेलोप नाम के द्वीप में इसे खोजा था और इसे 'पाइना दी इंडीज' नाम दिया | कोलंबस ने यूरोप में अनानास की खेती की शुरुआत की थी | भारत में अनानास की खेती की शुरुआत पुर्तगालियों ने 1548 AD में गोवा से की थी | अनानास की डालियाँ काटकर बोने से उग आती हैं | अनानास का फल बहुत स्वादिष्ट होता है | इसके कच्चे फल का स्वाद खट्टा तथा पके फल का स्वाद मीठा होता है । इसके फल में थाइमिन,राइबोफ्लेविन,सुक्रोस,ग्लूकोस,कैफीक अम्ल,सिट्रिक अम्ल,कार्बोहाईड्रेट तथा प्रोटीन पाया जाता है | आज हम आपको अनानास के कुछ औषधीय गुणों से अवगत कराएंगे - १- अनानास फल के रस में मुलेठी, बहेड़ा और मिश्री मिलाकर सेवन करने से दमे और खाँसी में लाभ होता है| २- यदि शरीर में खून की कमी हो तो अनानास खाने व रस पीने से बहुत लाभ होता है | इसके सेवन से रक्तवृद्धि होती है और पाचनक्रिया तेज़ होती है | ३- अनानास के पके फल के बारीक टुकड़ों में सेंधानमक और कालीमिर्च मिलाकर खाने से अजीर्ण दूर होता है | ४- अनानास ...

tcs becomes worlds second largest it servies company:

टाटा समूह की कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) पूंजी के लिहाज से दुनिया की दूसरी सबसे सबसे बड़ी IT सर्विसेज कंपनी बन गई है. उसने 5 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करके यह शानदार कीर्तिमान अपने नाम कर लिया है. अब वह अमेरिका की आईबीएम के बाद दूसरे नंबर की कंपनी है. अभी उसने आयरलैंड की ऐक्सेंचर को पीछे छोड़ा है. एक अंग्रेजी पत्र ने यह खबर दी है. 10 साल पहले टीसीएस ने पूंजी बाजार में कदम रखा था और अब उसका बाजार वैल्यूशन बढ़कर 5,03,148 करोड़ रुपये (लगभग 84 अरब डॉलर) हो गया है. इस तरह से वह देश की अन्य चार आईटी कंपनियों इंफोसिस (31.7 अरब डॉलर), विप्रो (23.3 अरब डॉलर), एचसीएल टेक्नोलॉजीज (17.9 अरब डॉलर) और टेक महिंद्रा ( 8.5 अरब डॉलर) से भी आगे है. रिलायंस इंडस्ट्रीज भी टीसीएस के पीछे हो गई है और तीसरे नंबर पर चली गई है. सरकारी कंपनी ओएनजीसी दूसरे नंबर पर है जबकि आईटीसी चौथे नंबर पर है. शेयर बाजार में कंपनी के शेयर लगातार छलांग लगाते जा रहे हैं. कंपनी ने 2014-15 वित्त वर्ष की पहली तिमाही के परिणाम जब घोषित किए तब से उसके शेयरों में 9 प्रतिशत की बढो़तरी हुई. कंपनी ने उस तिमाही मे...

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माया अकादमी ऑफ एडवांसड सिनेमैटिक्स,अहमदाबाद इंस्टीट्यूट का नाम:माया अकादमी ऑफ एडवांस्‍ड सिनेमैटिक्स, सी.जी.रोड, अहमदाबाद इंस्टीट्यूट का विवरण:माया अकादमी ऑफ एडवांस्‍ड सिनेमैटिक्स, अहमदाबाद प्रमुख संस्थान मैक की ब्रांच है. इसकी स्थापना 2001 में हुई थी. यह कॉलेज ग्राफिक्स और वेब डिजाइन का सर्टिफिकेट कोर्स देता है, जिसमें फोटोशॉप, कोरल ड्रॉ और वेब डिजाइन जैसे सब्‍जेक्‍ट पढ़ाए जाते हैं. संपर्क:माया अकादमी ऑफ एडवांस्‍ड सिनेमैटिक्स, 2nd फ्लोर, कलापुरनाम कांप्लेक्स, जैन मंदिर के सामने, सिटी बैंक के पास, सी. जी. रोड, अहमदाबाद- 380009, गुजरात फोन: 07940047838, 9824222888 ईमेल: ahmedabad@maacmail.com वेबसाइट: www.maacmaya.com कोर्स का नाम: सर्टिफिकेट कोर्स इन ग्राफिक्स और वेब डिजाइन कोर्स की अवधि:1 साल योग्‍यता: कंप्यूटर की बेसिक नॉलेज होनी चाहिए. एडमिशन प्रक्रिया:इस इंस्‍टीट्यूट में एडमिशन के लिए कॉलेज में संपर्क करना होगा. क्‍या ये स्‍टोरी आपके लिए उपयोगी है?

Ek saach.....

पैर की मोच और छोटी सोच, हमें आगे बढ़ने नहीं देती । टुटी कलम और औरो से जलन, खुद का भाग्य लिखने नहीं देती । काम का आलस और पैसो का लालच, हमें महान बनने नहीं देता । अपना मजहब उंचा और गैरो का ओछा, ये सोच हमें इन्सान बनने नहीं देती । दुनिया में सब चीज मिल जाती है,.... केवल अपनी गलती नहीं मिलती Sent from Samsung Mobile