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जुलाई 26, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तकिये के नीचे रखा था सैमसंग का फोन, लग गई आग

तकिये के नीचे रखा था सैमसंग का फोन, लग गई आग 27 July, 2014 अगर आप अपना स्मार्टफोन तकिए के नीचे रखकर सोते हैं तो सावधान हो जाइए. अमेरिका के उत्तरी टेक्सास में एक 13 साल की बच्ची के सैमसंग गैलेक्सी एस-4 फोन में आग लग गई. एरियल टोलफ्री नाम की यह बच्ची रात में अपने फोन को तकिये के नीचे रखकर सो गई. थोड़ी देर बाद उसे कुछ जलने की गंध महसूस हुई, पर इसकी अनदेखी कर वह सोती रही. लेकिन अगली बार जब उसकी आंख खुली तो फोन आग पकड़ चुका था. एरियल के पिता को शक है कि ओवरहीटिंग की वजह से फोन की बैटरी फूल गई होगी और उसने आग पकड़ ली होगी. फिलहाल फोन की यह हालत है कि वह पहचान में नहीं आ रहा है. फोन का प्लास्टिक और ग्लास पिघल चुका है. घटना के बाद एरियल के परिवार ने सैमसंग और मीडिया से संपर्क किया. सैमसंग के प्रवक्ता ने कहा है कि उनके प्रोडक्ट पूरी तरह सुरक्षित हैं और एरियल के फोन में सैमसंग की नहीं, लोकल बैटरी लगी थी, जिसकी वजह से यह हादसा हुआ. फोन के साथ तकिया-बिस्तर भी नया देगी कंपनी हालांकि कंपनी इस पर सहमत है कि फोन को चार्ज करने और रखरखाव के स्तर पर लोगों को अभी और जागरुक करने की जरूरत है. इसीलिए कंपनी य...

जेनेटिक मैपिंग से इलाज

जेनेटिक मैपिंग से इलाज वैज्ञानिकों ने इंसानी डीएनए में ऐसे 100 जगह ढूंढ निकाले हैं जिनके कारण व्यक्ति में शिजोफ्रेनिया जैसी बीमारी पैदा हो सकती है. इससे बीमारी के कारणों से पर्दा उठा. इस तरह की जेनेटिक मैपिंग से नए इलाज की संभावनाएं पैदा होती हैं. हालांकि उनमें भी अभी कई साल लग जाएंगे. लेकिन नए नतीजों से ठोस आनुवंशिक सबूत मिले हैं जो इस थ्योरी को पक्का करते हैं कि प्रतिरोधक प्रणाली और इस बीमारी के बीच कैसा जुड़ाव है. शिजोफ्रेनिककी जेनेटिक मैपिंग में दुनिया भर से 100 वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया. इस सबसे बड़े शोध से पहले वैज्ञानिकों को सिर्फ कुछ हिस्से पता थे, जो जेनेटिक कारणों की ओर इशारा करते थे. जेनेटिक मैपिंग से मदद की उम्मीद शोध में डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों के आनुवंशिक कोड देखे गए और इनमें से 37,000 को ये बीमारी होने की आशंका थी. शोधकर्ताओं ने डीएनए में 180 मार्कर ढूंढ निकाले, जिनमें से 83 ताजा शोध में पता लगे हैं. वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि और मार्कर पता चल सकते हैं. शोध के सह लेखक स्टीव मैककैरल हार्वर्ड और एमआईटी में जेनेटिक संस्थान के निदेशक हैं, "यह आनुवंशिक...

डीएनए करवाता है दोस्ती

डीएनए करवाता है दोस्ती अपने पूरे जीवन में हम सैकड़ों, हजारों लोगों से मिलते हैं. लेकिन इनमें से कुछ खास ही होते हैं जो हमारे दोस्त बन पाते हैं. आखिर ऐसा क्या है, जो लोगों को एक दूसरे के करीब लाता है? दोस्तों में अक्सर एक जैसी ही आदतें होती हैं. आपस का तालमेल कुछ ऐसा बन जाता है कि इशारों इशारों में ही बातें हो जाती हैं. भीड़ में बैठे दो दोस्तों को एक दूसरे से बात करने के लिए शब्दों की जरूरत नहीं पड़ती. उनकी आंखें ही एक दूसरे से सब कह देती हैं. लेकिन इसके पीछे क्या विज्ञान छिपा हो सकता है? वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि दोस्तों की केवल आदतें या सोचने का तरीका ही एक जैसा नहीं होता, उनका डीएनए भी समान होता है. यह काफी हैरान कर देने वाला है. क्योंकि अब तक यही समझा जाता था कि परिवार के सदस्यों का डीएनए ही मेल खाता है. लेकिन अमेरिका में हुई एक रिसर्च बताती है कि दोस्तों का डीएनए भी लगभग उतना समान होता है जितना दूर के रिश्तेदारों का. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया और येल यूनिवर्सिटी के इस शोध में 1,932 लोगों के डीएनए की जांच की गयी. इन लोगों के दोस्तों और रिश्तेदारों की जानकारी भी जमा की...

दमा के इलाज से विकास प्रभावित

दमा के इलाज से विकास प्रभावित विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया के करीब 24 करोड़ लोग अस्थमा यानि दमा से जूझ रहे हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं. रिसर्चरों का दावा है कि बच्चों को इनहेलर से दी जा रही अस्थमा की दवा विकास पर बुरा असर डालती है. 'द कॉक्रेन लाइब्रेरी' पत्रिका में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इनहेलर के जरिए दी जाने वाली दवा कॉर्टिकोस्टेरॉयड होती है. इस बारे में वैज्ञानिकों द्वारा किए गए दो शोध यही बताते हैं कि इसके इस्तेमाल से बच्चों का विकास इलाज के पहले साल में 0.5 सेंटीमीटर कम हो सकता है. हालांकि समय गुजरने के साथ विकास पर दवा का असर भी कम होने लगता है. दमा के इलाज में बच्चों और वयस्कों दोनों को ही स्टेरॉयड इनहेलर दिए जाने को प्राथमिकती दी जाती है. ये दमा के मरीजों को राहत देने में कामयाब भी रहे हैं. स्टेरॉयड इनहेलर की मदद से दमे के कारण होने वाली मौतों को भी कम किया जा सका है. इनकी मदद से न सिर्फ गंभीर रूप से पीड़ित मरीजों को दमा के अटैक में कमी आती है, बल्कि उनकी भीषणता कम होने में भी मदद मिलती है.

एचआईवी मरीजों की बढ़ती उम्र

एचआईवी मरीजों की बढ़ती उम्र अब तक एड्स को ऐसी लाइलाज बीमारी माना जाता रहा है जिससे कुछ सालों में जीवन का अंत हो जाता है. लेकिन रिसर्चरों की मानें तो आधुनिक दवाओं की मदद से एचआईवी संक्रमित मरीज भी लगभग सामान्य लोगों जितना लंबा जीवन जी रहे हैं. एचआईवी के खिलाफ एंटी रेट्रोवायरल ट्रीटमेंट एआरटी की मदद से मृत्यु दर में काफी कमी आई है. जहां 1999 से 2001 के बीच प्रति 1000 एचआईवी मरीजों में से 18 की मौत हो गई, वहीं 2009 से 2011 के बीच 1000 में से करीब 9 मरीजों की ही मौत हुई. ये आंकड़े यूरोप, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से जमा किए गए. एआरटी ने दिया जीवन साइंस की 'द लैंसेंट' पत्रिका में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ये नतीजे एआरटी के भारी फायदों का समर्थन करते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, "इस इलाज की मदद से एचआईवी संक्रमित लोगों की जीने की संभावना आम लोगों के जैसी होती जा रही है." एआरटी का विकास नब्बे के दशक में हुआ. यह इलाज मरीज में ह्यूमन इम्यूनो डेफीशिएंसी वायरस यानि एचआईवी को मारता नहीं है, बल्कि वायरस के पनपने को धीमा कर एड्स के फैलाव को रोकता है. एआरटी के इलाज से पहले मरीज...

जंग का एलान करने वाला खत

जंग का एलान करने वाला खत ठीक 100 साल पहले 28 जुलाई, 1914 को विएना से बेलग्रेड से एक चिट्ठी भेजी गई कि युद्ध होने वाला है. चिट्ठी पहले ही लीक हो गई और पहले विश्व युद्ध के शुरू होने से पहले ही इसकी भनक फैल गई. फिर इतिहास का सबसे भीषण युद्ध हुआ. महीने भर पहले ही सर्बियाई युवक गावरिलो प्रिंसिप ने आर्चड्यूक फर्डिनांड की बोस्नियाई राजधानी सारायेवो में हत्या की थी. और अब ऑस्ट्रिया ने सर्बिया के खिलाफ युद्ध का एलान कर दिया. इस खत पर फर्डिनांड के पिता ऑस्ट्रिया के सम्राट फ्रांस योजेफ के दस्तखत थे. इस खत को सुबह 11:30 बजे सर्बियाई सरकार के हाथ में थमा दिया गया. तब तक सर्बिया की सेना 230 किलोमीटर दक्षिण नीस तक पहुंच चुकी थी. उसे इस बात का अंदेशा हो चुका था कि ऑस्ट्रिया हमला कर सकता है. तमाम एहतियात के बावजूद इस खत का मजमून लीक हो गया था और पोलिटिका अखबार ने इसे देखते हुए एक इमरजेंसी एडिशन छाप दिया, जिसमें कह दिया गया कि अब युद्ध को रोका नहीं जा सकता है. खबर जंगल की आग की तरह फैली और लोगों ने बाजार में जो कुछ भी मौजूद था, खरीदना शुरू कर दिया. शहर के कुओं पर भी भीड़ लग गई क्योंकि अफवाह फैल चुकी थी ...

कीड़े मकोड़ों की कमी से हिंसा

कीड़े मकोड़ों की कमी से हिंसा धरती पर मनुष्यों की संख्या पिछले 40 सालों में दुगुनी हुई है, लेकिन कीड़े, केंचुए और झींगों जैसे कड़ी खाल के जानवर कम हो गए हैं. ऐसा होने से क्या पर्यावरण पर फर्क पड़ेगा. साइंस पत्रिका ने गायब होने वाले जानवरों पर एक खास शोध किया. इसमें वैज्ञानिक दावा करते हैं कि पृथ्वी पर बड़े और छोटे जानवरों और कीड़े मकोड़ों के गायब होने से दुनिया में हिंसा और अशांति फैली है. ऐसा कैसे? शोधकर्ता कहते हैं कि अकशेरुकी यानि बिना रीढ़ की हड्डी वाले जानवर पर्यावरण में एक अहम भूमिका निभाते हैं. यह फसलों के परागण में मदद करते हैं, हानिकारक कीड़ों को खाते हैं और मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं. ताजा आंकड़ों के मुताबिक रीढ़ की हड्डी वाले जानवरों में से 322 नस्लें विलुप्त हो चुकी हैं और बाकी नस्लों में 25 प्रतिशत कमी हुई है. रिपोर्ट के लेखक बेन कोलेन ने कहा, "हमें हैरानी हुई जब हमने देखा कि बिना रीढ़ की हड्डी के जानवरों में भी उतना ही घाटा हुआ है जितना बड़े जानवरों में. हम पहले सोचते थे कि अकशेरुकी जानवर ज्यादा तगड़े होते हैं." रिसर्चर कहते हैं कि इनकी संख्या कम होने की दो वजहें...

चीनी नहीं, मशरूम से चॉकलेट |

चीनी नहीं, मशरूम से चॉकलेट मीठा खाने वाले अमेरिका ने एक ऐसी तरीका खोज लिया है जिससे कोकोआ का कड़वापन कम हो जाए और चॉकलेट को मीठा करने के लिए चीनी भी नहीं लगे. अमेरिकी फूड टेक्नोलॉजी कंपनी मायको टेकनोलॉजी ने खमीर पैदा करने की किण्वन की एक खास प्रक्रिया विकसित की है. इसके तहत कोकोआ का कड़वापन कम करने के लिए मशरूम का इस्तेमाल किया जाएगा. यानि मशरूम को फर्मेंट किया जाएगा. कंपनी का दावा है कि इससे चॉकलेट को मीठा करने के लिए चीनी का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा. एक साल पहले कंपनी ने किण्वन की ये प्रक्रिया लॉन्च की थी. अब माइको टेक्नोलॉजी कंपनी मंगलवार को अपनी प्रक्रिया भी लॉन्च करेगी. कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है, "हम अच्छे मशरूम की सफाई की प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हैं. हम ऐसा कर पाए कि वह चॉकलेट का कड़वापन सोख लें. मशरूम अपने भोजन के साथ प्रतिक्रिया करके उसे ऐसे पौष्टिक तत्व देते हैं, जो सामान्य तौर पर चॉकलेट में नहीं पाए जाते. इनमें सबसे अहम पदार्थ है बीटा ग्लूकन्स जो हमारी प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं." कॉफी और कोकोआ के बाद मायको टेकनोलॉजी धान और दूसरे अनाज पर भी काम करना च...

एचआईवी: 10 जरूरी बातें |

एचआईवी: 10 जरूरी बातें एचआईवी के खिलाफ 20 साल पहले जितने उपाय मौजूद थे आज उससे कहीं ज्यादा हैं. लेकिन अभी भी हर साल इससे 10 लाख लोग प्रभावित हो रहे हैं. एचआईवी से जुड़ी 10 बातें जो जानना जरूरी हैं. 1. दुनिया भर में 3.5 करोड़ से ज्यादा लोग एचआईवी संक्रमित हैं. इनमें से दो तिहाई सबसहारा अफ्रीकी देशों में हैं. दक्षिण अफ्रीका एचआईवी से सबसे ज्यादा प्रभावित है जहां हर छठा व्यक्ति संक्रमित है. 2. विषमलैंगिक संबंधों में एचआईवी पुरुषों से महिलाओं में ज्यादा आसानी से पहुंचता है, महिलाओं से पुरुषों में पहुंचने की संभावना थोड़ी कम होती है. अगर पुरुष का खतना हुआ है तो महिला को 60 फीसदी तक कम खतरा होता है. 3. एचआईवी और एड्स लाइलाज हैं, लेकिन पता चल जाने पर नियंत्रण संभव है. एंटीरेट्रो वायरल इलाज से वायरस को फैलने से रोका जा सकता है. यह दवा मरीज को जीवन भर लेनी होती है. इस इलाज की मदद से एचआईवी के कारण होने वाली मौतें 80 फीसदी तक कम की जा सकी हैं. 4. 1990 के दशक में एचआईवी फैलने से कई देशों में मृत्यु दर बहुत बढ़ गई, खासकर अफ्रीका में. एंटीरेट्रो वायरल इलाज ने दोबारा जीवन की उम्मीद बंधाई. जहां 2005 ...

घर से बाहर जाने से पूर्व मांगलिक वस्तुओं का स्पर्श करें

इनका स्पर्श करें- घर से बाहर जाने से पूर्व मांगलिक वस्तुओं का स्पर्श करें। दूर्वा, दही, घृत, जलपूर्ण कलश, बछड़े सहित गाय, बैल, स्वर्ण, मिट्टी, गोबर, पीपल वृक्ष, स्वस्तिक चिह्न, अक्षत तथा मधु का स्पर्श करें।

जानिए, कौनसी हैं वे 9 परम गोपनीय बातें जो गृहस्थों को कभी प्रकट नहीं करना चाहिए-

हर व्यक्ति के जीवन में कुछ रहस्य होते हैं जिन्हें वे हमेशा छुपाकर रखते हैं। हमारे शास्त्रों में भी कहा गया है कि 9 प्रकार की ऐसी बातें हैं जिन्हें जब तक अनिवार्य न हो कभी किसी को नहीं बताना चाहिए। जानिए, कौनसी हैं वे 9 परम गोपनीय बातें जो गृहस्थों को कभी प्रकट नहीं करना चाहिए- 1. आयु, 2. धन, 3. घर का कोई भेद, 4. मंत्र, 5. मैथुन, 6. औषधि, 7. तप, 8. दान तथा 9. अपमान।

भगवान शिव ही स्वयं जल है

भगवान शिव ही स्वयं जल हैं पुराणों में पानी के महत्व और उसके संरक्षण के बारे में स्पष्ट व्याख्या की गई है। शिव पर जल चढ़ाने का महत्व भी समुद्र मंथन की कथा से जु़ड़ा है। अग्नि के समान विष पीने के बाद शिव का कंठ एकदम नीला पड़ गया था विष की ऊष्णता को शांत करके शिव को शीतलता प्रदान करने के लिए समस्त देवी-देवताओं ने उन्हें जल अर्पित किया। इसलिए शिव पूजा में जल का विशेष महत्व है। शिव पुराण में कहा गया है कि भगवान शिव ही स्वयं जल हैं-

विश्व के पहले टेस्ट ट्यूब बेबी

आज के अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी वाले युग में टेस्ट ट्यूब बेबी की प्रक्रिया उन औरतों के लिए वरदान है जो कभी मां नहीं बन सकती। इस प्रक्रिया ने कई औरतों की सूनी गोद को भरा है। आज पूरे विश्व भर के लोग इस प्रक्रिया को अपना रहे हैं। हालांकि, यह प्रक्रिया मंहगी है और इससे गुजरने वाली महिलाओं को काफी सावधानियों का पालन करना पड़ता है। 36 वर्ष पूर्व 25 जुलाई 1978 को मेनचेस्टर ओल्डहेम शहर के डिस्ट्रिक जनरल हॉस्पिटल में विश्व के पहले टेस्ट ट्यूब बेबी लुइसी जॉय ब्राउन का जन्म हुआ था। जन्म लेने के बाद सभी अखबारों की सुर्खियां बनी लुइसी का वजन 2.608 किलो था। विश्व के पहले टेस्ट ट्यूब बेबी बनने से वह एक सेलिब्रिटी बन गई। लुइसी के पैदा होने के 7 साल बाद उसकी बहन नैटली का जन्म भी टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया से हुआ। लुइसी के पैरेंट्स लेसली और पीटर ब्राउन थे। टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया का हुआ था विरोध विश्व के पहले टेस्ट ट्यूब बेबी लुइसी के जन्म के बाद से ही टेस्ट ट्यूब प्रक्रिया का काफी विरोध हुआ था जो अभी तक चलता आ रहा है। कई लोग इसे प्रकृति के नियम के विरुद्ध मानते हैं, जबकि कई लोगों का क...

लाइफस्टाइल डेस्क: Two‘bananas’ a day keep a doctor away,

8.मॉर्निंग सिकनेस: अगर आपको खाने के बाद भी भूख लगती है, तो केला खाएं। इससे आपका ब्लड शुगर लेवल नॉर्मल रहेगा और आप रिलैकस्ड फील करेंगे। 9.मस्कीटो बाइट्स: मच्छर के काटने पर आप लोशन या क्रीम की जगह, केले के अंदर का भाग भी लगा सकते हैं। इससे सूजन और जलन कम हो जाएगी। 10.नर्व्ज़: केले में विटामिन B होता हैं, जो आपके नर्वस सिस्टम को सही रखता है। ऑस्ट्रेलिया के एक साइकोलॉजी इंस्टिट्यूट ने रिसर्च में पाया कि वर्कप्लेस में भूख लगने पर इम्पलॉई फास्ट फूड और स्नैक्स से अपना पेट भरते हैं। इस वजह से टेंशन और मोटापा बढ़ता है। इसलिए ज़रूरी है कि हर दो घंटे बाद आप कार्बोहाइड्रेट वाला फूड खाएं, जैसे केला।                                           11.अल्सर्ज़: अगर आपको आए दिन छाले होते हैं, तो केला आपके लिए लाभदायक हो सकता है। 12.टेम्परेचर कंट्रोल: केला खाने से प्रेग्नेंट वुमन का टेम्परेचर भी सही रहता है। अगर आप केले की तुलना सेब से करेंगे, तो पाएंगे कि केले में सेब से चार गुना ज्य़ादा प्रोटीन, दो गुना ज़्यादा कार्बोहाइड्रेट, तीन गुना ज़्यादा फॉस्फोरस, पांच गुना ज़्यादा व...

लाइफस्टाइल डेस्क: Two‘bananas’ a day keep a doctor away,

3.ब्लड प्रेशर: इसमें पोटैशियम बहुत ज़्यादा होता है और नमक की मात्रा कम होती है, जिसके चलते आपका ब्लड प्रेशर नॉर्मल रहता है। FDA, यानी US FOOD AND DRUG ADMINISTRATION ने भी हाल ही में BANANA INDUSTRY को यह बात आधिकारिक रूप से बताने को कहा है कि केला खाने से ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक होने का रिस्क कम हो जाता है। 4.ब्रेन पावर: इंग्लैंड के एक स्कूल में 200 स्टूडेंट्स को हर रोज़ इम्तिहान से पहले नाश्ते में केला ज़रूर खिलाया गया, ताकि उनका दिमाग तेज़ हो। दरअसल, रिसर्च कहता है कि पोटैशियम होने के चलते, केला खाने से याद करने की क्षमता बढ़ती है। 5.कॉन्सटीपेशन: अगर आपको कब्ज़ रहती है, तो केला आपके काफी काम की चीज़ है। दिन में दो केले खाइए और फिर देखिए फाइबर होने के चलते केला खाने से कैसे आपकी यह परेशानी दूर होती है। 6.हैंगओवर्ज़ : बहुत ज़्यादा अल्कोहल पीने के बाद, अगर आपका सिर दर्द हो, तो एक गिलास BANANA SHAKE पिएं। इसमें थोड़ी शहद भी डालिए। कुछ देर में आपका ब्लड शुगर लेवल ठीक हो जाएगा और हैंगओवर भी दूर हो जाएगा। सिर्फ यही नहीं, इससे आपकी बॉडी भी हाइड्रेटिड हो जाएगी। ...

लाइफस्टाइल डेस्क: Two‘bananas’ a day keep a doctor away,

MYTH: केला खाने से कब्ज़ होती है और आप मोटे होते हैं लाइफस्टाइल डेस्क: Two'bananas' a day keep a doctor away, जी हां, सिर्फ apple ही नहीं, बल्कि दिन में दो केले भी आपको डॉक्टर से दूर रख सकते हैं। इससे पहले की हम आपको एक दिन में दो केले खाने के फायदे बताना शुरू करें, पहले यह जान लीजिए कि केला खाने से कोई मोटा नहीं होता। यह सिर्फ एक मिथ है। इससे आपको तुरंत एनर्जी मिलती है। इसमें फाइबर और तीन तरह की शुगर होती है- सुक्रोज़, फ्रुक्टोज़ और ग्लूकोज़। एक रिसर्च के मुताबिक, 90 मिनट के वर्कआउट के लिए दो केले आपको खूब एनर्जी दे सकते हैं। इसलिए एथलीट्स केला ज़रूर खाते हैं। एनर्जी लेवल बढ़ाने के अलावा, केले से विटामिन्स भी मिलते हैं। दिन में दो केले खाने से आपके शरीर से जुड़ी 12 परेशानियां दूर हो सकती हैं। 1.डिप्रेशन: एक रिसर्च की मानें तो डिप्रेशन के मरीज़ जब भी केला खाते हैं, उन्हें आराम मिलता है। दरअसल, केले में एक ऐसा प्रोटीन होता है, जो आपको रिलैक्स फील करवाता है और आपका मूड अच्छा करता है। केले में विटामिन B6 भी होता है, जिससे आपका ब्लड ग्लूकोज़ लेवल ठीक रहता है। ...

- जानिए, क्यों लाइलाज है एड्स -

जानिए, क्यों लाइलाज है एड्स एक नए शोध से पता चला है कि एचआईवी शरीर में बहुत तेज़ी से अपनी जगह बना लेता है। यह नई खोज इस उम्मीद को झटका देने वाली है कि शुरुआती चरण में एचआईवी का इलाज़ शुरू कर देने पर एड्स के ख़तरे को टाला जा सकता है। पढ़ें - एचआईवी संक्रमण रोकने की द‌िशा में बड़ी उपलब्धि 'नेचर' जर्नल में प्रकाशित इस शोध का कहना है कि खून में एचआईवी आने से पहले भी शरीर में वायरस अन्य स्थानों पर इकट्ठा रहते हैं। पढ़ें - सामान्य कंडोम की तुलना में कहीं बेहतर होगा यह कंडोम वायरस आँत और मस्तिष्क की कोशिकाओं में जमा रहते हैं। एचआईवी के इलाज़ में छुपे हुए ये वायरस सबसे बड़े बाधक हैं। वापस आ गए वायरस विशेषज्ञों ने इसे "एहतियाती" और "असधारण" खोज बताया है। एंटी रेट्रो वायरल दवाइयां एचआईवी को खून में आने से रोकती है जिससे मरीज एक सामान्य जीवन जी पाता है। लेकिन जैसे ही मरीज दवाइयां लेना बंद करता है वायरस अपने जमा ठिकानों से बाहर आना शुरू कर देते हैं। अमरीका के मिसीसिपी राज्य में एक बच्ची के बारे में लगा था कि जन्म के कुछ घंटे बाद ही इलाज़ करने की वज...

kargil war story - कारगिल की कहानी: जांबाज की जुबानी -

कारगिल की कहानी: जांबाज की जुबानी आज शौर्य दिवस यानी कारगिल युद्ध के जीत की 15वीं वर्षगांठ है। संपूर्ण देश में युद्ध में शहीद सैनिकों की शहादत को बड़ी शिद्दत से याद किया जाएगा। युद्ध के समय सीमा क्षेत्र में अपने प्राणों की बाजी लगाने और घायल होने वाले जांबाजों की बेहतरी के लिए घोषणाएं तो तमाम की जाती हैं, लेकिन यह देखने की जहमत कोई नहीं उठाता है कि उन घोषणाओं को अमलीजामा पहनाया गया या नहीं। चंपावत जिला मुख्यालय में कास्मेटिक की दुकान चलाने वाले दान सिंह मेहता भी इसी सरकारी बेरुखी का शिकार हैं। केंद्र सरकार की ओर से उन्हें पेट्रोल पंप, गैस एजेंसी और ग्रीन कार्ड देने का वायदा किया गया था, लेकिन 15 साल बाद भी इन वायदों की कोई खबर किसी स्तर से नहीं ली गई है। उन्होंने 2003 में घर आकर कास्मेटिक की दुकान खोली। तीन दुश्मनों को किया था ढेर 25 जुलाई 1999 का दिन याद कर 46 वर्षीय दान सिंह मेहता की भुजाएं आज भी फड़कने लगती हैं। युद्ध में सीने और दांए पांव में गोली लगने के बावजूद दान सिंह ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने द्रास सेक्टर के तुरतुक में मोर्टार गन से दुश्मन के तीन सैनिकों क...

Sachi bat....

आज फिर देश के गद्दारो को शहीदो की याद आई है सब ने मिलकर कमीनेपन की हर रीत निभाई है खुद मनाते है दीवाली हर रोज क्या इतने दिनों में किसी ने शहीदो के घर की रौशनी जलाई है सान्या मिर्ज़ा का रोना सब को दीखता है क्या इस नपुंसक मीडिया ने कभी शहीद के घर की हालत दिखाई है अरे लानत है ऐसे अवसर वादी नेताओ पर और दोगले मीडिया पर ये वही नीच लोग है जिन्होंने वक़्त आने पर अपनी माँ बहिन दाव पर लगाई है आज फिर देश के गद्दारो को शहीदो की याद आई है जो मर मिटा हमारे भविष्य के लिए उसके बच्चों के जीवन में सिर्फ अँधेरे और काई है कुर्बान किये जिस माँ ने अपने सपूत इस देश पे इन गद्दारो ने उसी माँ की कुटिया जलाई है आज फिर देश के गद्दारो को शहीदो की याद आई है आज ये सब जायेंगे और कुछ फूल चढ़ा के आएंगे २ मिनट के नाटक के लिए शहीदो की प्रतिमाये सजाई है दिल में कहने को बहुत कुछ है आज फिर शहीदो के घरवालो के हालत पे आँख मेरी भर आई है आज फिर देश के गद्दारो को शहीदो की याद आई है सब ने मिलकर कमीनेपन की हर रीत निभाई है

सरकार ने माई -जी ओ वी नाम से आधिकारिक पोर्टल शुरू किया

सरकार ने माई -जी ओ वी नाम से आधिकारिक पोर्टल शुरू किया है जिससे नागरिकों को सुराज्य में योगदान का अधिकार मिलेगा। इस पोर्टल का पता mygov.nic.in है। पोर्टल शुरू करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि लोगों की भागीदारी के बिना लोकतंत्र की सफलता असंभव है। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि जनता इस पहल का स्वागत करेगी। उन्होंने इस पोर्टल को सशक्त बनाने और इसे सुधारने के लिए प्रयास और सुझाव आमंत्रित किए हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस पोर्टल के माध्यम से सभी देश को आगे ले जाने तथा गरीब से गरीब नागरिक की अपेक्षाएं पूरी करने की दिशा में मिलकर काम करेंगे। श्री मोदी ने कहा कि उन्हें लोगों के सुझाव और विचारों की प्रतिक्षा रहेगी।

मुख्य समाचार :-

मुख्य समाचार :- * प्रधानमंत्री ने सुराज्य में योगदान के लिए लोगों के विचार और सुझाव आमंत्रित किए। नागरिकों के सशक्तिकरण के लिए आधिकारिक पोर्टल माई जी ओ वी की शुरूआत। * कश्मीर घाटी में दो आतंकवादी हमलों में पुलिस के 2 जवान शहीद। चार घायल। पाकिस्तान ने संघर्ष विराम का फिर उल्लंघन किया। जम्मू में नियंत्रण रेखा के पास अग्रिम भारतीय चैकियों को निशाना बनाया। * करगिल विजय की आज 15वीं वर्षगांठ। * इस्राइल और हमास ने गज़ा में राहत अभियान के लिए 12 घंटे का युद्धविराम शुरू किया। * काठमांडू में भारत-नेपाल संयुक्त आयोग की तीसरी बैठक जारी। * ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय निशानेबाज़ भारोत्तोलक और जूडो खिलाड़ी पदक के लिए दावेदारी पेश करेंगे।