👉 *इन ग्रन्थों में मंत्रों में छिपे पड़े हैं अति गोपनीय प्रयोग (भाग 30)* *जहाँ तक दुर्गासप्तशती की बात है, तो इस रहस्यमय ग्रन्थ में वेदों में वर्णित सभी तांत्रिक प्रक्रियाएँ कूटभाषा में वर्णित हैं*। इसके अलग- अलग पाठक्रम अपने अलग- अलग प्रभावों को प्रकट करते हैं। यूं तो इसके पाठक्रम अनेक हैं। पर प्रायः इसके ग्यारह पाठक्रमों की चर्चा मिलती है। ये ग्यारह पाठक्रम कुछ इस प्रकार हैं- *१. महाविद्या क्रम, २. महातंत्री क्रम, ३. चण्डी क्रम, ४. महाचण्डी क्रम, ५. सप्तशती क्रम, ६. मृत संजीवनी क्रम, ७. रूपदीपिका क्रम, ८. निकुंभला क्रम, ९. योगिनी क्रम, १०. संहार क्रम, ११. अक्षरशः विलोम क्रम।* पाठक्रम की ये सभी विधियाँ महत्त्वपूर्ण हैं। और प्रयोग के पूर्ण होते ही अपने प्रभाव को प्रकट किए बिना नहीं रहतीं। इन पाठ क्रमों के अतिरिक्त श्री दुर्गासप्तशती के सहस्रों प्रयोग हैं। *इनमें से कुछ साधारण हैं तो कुछ अतिविशिष्ट। इन सब की चर्चा यहाँ सम्भव नहीं जान पड़ रही। क्योंकि यह विषय अति गोपनीय एवं गम्भीर है, जिसे गुरुमुख से सुनना- जानना व करना ही श्रेयस्कर है।* संक्षेप में हम यहाँ इतना ही कहेंगे कि पृथ्वी पर ही ...
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