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अगस्त 11, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सिर पर स्थित एक्यूप्रेशर प्वाइंट

तेज दिमाग चाहिए तो करें इन पांच अंगों की मसाज acupressure points for sharp memory2 सिर के बीचोबीच स्थित प्वाइंट और कनपट्टी से माथे के बीच में स्थित प्वाइंट पर एक मिनट तक तेज दबाव बनाएं और फिर छोड़ दें। नियमित तौर पर इस हिस्से पर मसाज से दिमाग तेज होता है।

side effects of bitter gourd

हाइपोग्लाइकेमिया कोमा करेले का सेवन शुगर कम करता है लेकिन आवश्यकता से अधिक रक्त में शुगर का स्तर इतना कम कर देता है कि यह हाइपोग्लाइकोम‌िया कोमा नामक मानसिक समस्या का कारण हो सकता है।

पैरों पर स्थित एक्यूप्रेशर प्वाइंट

तेज दिमाग चाहिए तो करें इन पांच अंगों की मसाज acupressure points for sharp memory6 घुटनों के ठीक नीचे और पंजों के केंद्र में प्वाइंट्स पर दबाव बनाकर मसाज करें। एक मिनट तक दबाव बनाएं और फिर छोड़ दें। इसके नियमित अभ्यास से दिमाग तेज चलेगा।

माथे पर स्थित एक्यूप्रेशर प्वाइंट

acupressure points for sharp memory3 दोनों भौंहों के बीच में माथे पर स्थित वह जगह जहां आमतौर पर महिलाएं बिंदी लगाती हैं एक्यूप्रेशर प्वाइंट है। इस बिंदु पर एक मिनट तक उंगली से तेज दबाव बनाएं और फिर छोड़ दें।

पैरों पर स्थित एक्यूप्रेशर प्वाइंट

तेज दिमाग चाहिए तो करें इन पांच अंगों की मसाज acupressure points for sharp memory6 घुटनों के ठीक नीचे और पंजों के केंद्र में प्वाइंट्स पर दबाव बनाकर मसाज करें। एक मिनट तक दबाव बनाएं और फिर छोड़ दें। इसके नियमित अभ्यास से दिमाग तेज चलेगा।

गर्दन पर स्थित एक्यूप्रेशर प्वाइंट

तेज दिमाग चाहिए तो करें इन पांच अंगों की मसाज acupressure points for sharp memory5 गर्दन पर सिर के ठीक नीचे दो उंगलियों से प्वाइंट्स तलाशें। केंद्र में स्थित नि बिंदुओं पर एक मिनट तक गहरा दबाव दें और फिर छोड़ दें।

चेहरे पर स्थित एक्यूप्रेशर प्वाइंट

तेज दिमाग चाहिए तो करें इन पांच अंगों की मसाज acupressure points for sharp memory4 नाक और होठ के बीच में केंद्रित एक्यूप्रेशर प्वाइंट पर एक मिनट तक तेज दबाव बनाएं और फिर छोड़ दें। इसके नियमित अभ्यास से याददाश्त अच्छी होती है और फोकस बढ़ता है।

पंचायत का निर्णय

एक बार एक हंस और हंसिनी हरिद्वार के सुरम्य वातावरण से भटकते हुए उजड़े, वीरान और रेगिस्तान के इलाके में आ गये ! हंसिनी ने हंस को कहा कि ये किस उजड़े इलाके में आ गये हैं ? यहाँ न तो जल है, न जंगल और न ही ठंडी हवाएं हैं ! यहाँ तो हमारा जीना मुश्किल हो जायेगा ! भटकते २ शाम हो गयी तो हंस ने हंसिनी से कहा कि किसी तरह आज कि रात बितालो, सुबह हम लोग हरिद्वार लौट चलेंगे ! रात हुई तो जि स पेड़ के नीचे हंस और हंसिनी रुके थे उस पर एक उल्लू बैठा था। वह जोर २ से चिल्लाने लगा। हंसिनी ने हंस से कहा, अरे यहाँ तो रात में सो भी नहीं सकते। ये उल्लू चिल्ला रहा है। हंस ने फिर हंसिनी को समझाया कि किसी तरह रात काट लो, मुझे अब समझ में आ गया है कि ये इलाका वीरान क्यूँ है ? ऐसे उल्लू जिस इलाके में रहेंगे वो तो वीरान और उजड़ा रहेगा ही। पेड़ पर बैठा उल्लू दोनों कि बात सुन रहा था। सुबह हुई, उल्लू नीचे आया और उसने कहा कि हंस भाई मेरी वजह से आपको रात में तकलीफ हुई, मुझे माफ़ करदो। हंस ने कहा, कोई बात नही भैया, आपका धन्यवाद ! यह कहकर जैसे ही हंस अप...

पके हुए कटहल के सेवन से गैस और बदहज़मी में लाभ होता है |

कटहल (Jackfruit )- कटहल का प्रयोग बहुत से कामों में किया जाता है | कच्चे कटहल की सब्जी बहुत स्वादिष्ट बनती है तथा पक जाने पर अंदर का गूदा खाया जाता है | कटहल के बीजों की सब्जी भी बनाई जाती है | आमतौर पर यह सब्जी की तरह ही प्रयोग में आता है परन्तु कटहल में कई औषधीय गुण भी पाये जाते हैं| कटहल में कई महत्वपूर्ण प्रोटीन्स,कार्बोहाइड्रेट्स के अलावा विटामिन्स भी पाये जाते हैं | कटहल के औषधीय गुण - १- पके हुए कटहल के सेवन से गैस और बदहज़मी में लाभ होता है | २- कटहल की पत्तियों को छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें | यह चूर्ण एक छोटी चम्मच की मात्रा में प्रतिदिन सेवन करने से पेट के अलसर में आराम मिलता है | ३- कटहल की छाल घिसकर लेप बना लें | यह लेप मुहँ के छालों पर लगाने से छाले दूर होते हैं | ४- कटहल के पत्तों को गर्म करके पीस लें और इसे दाद पर लेप करें | इससे दाद ठीक होता है | ५- कटहल के पत्तों पर घी लगाकर एक्ज़िमा पर बाँधने से आराम मिलता है ६- कटहल के ८-१० बीजों के चूर्ण का क्वाथ बनाकर पीने से नकसीर में लाभ होता है |

बेल का मुरब्बा खाने से पित्त व अतिसार में लाभ होता है

बेल - बेल का वृक्ष बहुत प्राचीन है |यह लगभग २०-३० फुट ऊंचा होता है | इसके पत्ते जुड़े हुए त्रिफाक और गंधयुक्त होते हैं | इसका फल ३-४ इंच व्यास का गोलाकार और पीले रंग का होता है | बीज कड़े और छोटे होते हैं | बेल के फल का गूदा और बीज एक उत्तम विरेचक (पेट साफ़ करने वाले ) माने जाते हैं | बेल शर्करा को कम करने वाला,कफ व वात को शांत करने वाला,अतिसार, मधुमेह,रक्तार्श,श्वेत प्रदर व अति रज : स्राव को नष्ट करने वाला होता है | आइए जानते हैं बेल के औषधीय गुण - १- पके हुए बेल का शर्बत पुराने आंव की महाऔषधि है | इसके सेवन से संग्रहणी रोग बहुत जल्दी ही दूर हो जाता है | २- बेल का मुरब्बा खाने से पित्त व अतिसार में लाभ होता है | पेट के सभी रोगों में बेल का मुरब्बा खाने से लाभ मिलता है | ३- दस ग्राम बेल के पत्तों को ४-५ कालीमिर्च के साथ पीसकर उसमे १० ग्राम मिश्री मिलकर शरबत बना लें | इसका दिन में तीन बार सेवन करने से पेट दर्द ठीक हो जाता है | ४- बेल के गूदे को गुड़ मिलाकर सेवन करने से रक्तातिसार (खूनी दस्त ) के रोगी का रोग दूर हो जाता है | ५- मिश्री मिले हुए दूध के साथ बेल की गिरी के चूर्ण ...

बीयर की बोतल के बदले तिरंगा नही बेचूंगा ?'

चौराहे पर खड़ा बच्चा 2-2 रूपये में तिरंगा बेच रहा था । आने - जाने वाले लोग गाड़ी का शीशा निचा कर तिरंगा खरीद कर शान से अपनी गाड़ी के डेशबोर्ड पर लगा रहे थे । तभी तेज रफ़्तार से आई एक लग्जरी गाड़ी रुकी और शाइनिंग इंडिया के युवा ने शीशा निचे कर तिरंगा देने को कहा, बच्चे बोला - 2 रूपये में एक तिरंगा । युवक के पास खुल्ले पैसे नही थे, उसने 5 रूपये की बीयर की खाली बोतल देते हुए 2 तिरंगे देने को कहा । बच्चा बोला - '' तिरंगा देश की आन-बान- शान का प्रतीक है, एक भी तिरंगा नही बिका तो रात को भूखा सो लूँगा, लेकिन बीयर की बोतल के बदले तिरंगा नही बेचूंगा ?'

ज़िन्दगी में ना ज़ाने कौनसी बात "आख़री" होगी,

बहुत देखा जीवन में समजझदार बनकर पर ख़ुशी हमेशा पागल बनने पर ही मिली है..... मैंने अपनी मौत की अफवाह उड़ाई थी... दुश्मन भी कह उठे आदमी अच्छा था....!! कोई रो कर दिल बहलाता है और कोई हँस कर दर्द छुपाता है. क्या करामात है कुदरत की, ज़िंदा इंसान पानी में डूब जाता है और मुर्दा तैर के दिखाता है... मौत को देखा तो नहीं, पर शायद वो बहुत खूबसूरत होगी, कम्बख़त जो भी उस से मिलता है, जीना छोड़ देता है.. ग़ज़ब की एकता देखी लोगों की ज़माने में ....... ज़िन्दों को गिराने में और मुर्दों को उठाने में .. ज़िन्दगी में ना ज़ाने कौनसी बात "आख़री" होगी, ना ज़ाने कौनसी रात "आख़री" होगी । मिलते, जुलते, बातें करते रहो यार एक दूसरेसे, ना जाने कौनसी "मुलाक़ात" आख़री होगी

एक नन्हीं सी परी ने पूछा, माँ की कोख से,

माँ, ये दुनिया वाले ऐसे क्यों है? जिसने अभी इस दुनिया में, कुछ भी ना किया, उसके ही खून की प्यासे क्यों है? नन्हीं सी कली के खिलने से पहले, दुनिया के लोगों को मिलने से पहले। लगता है, नाखुश हैं, ये सब परिवार वाले? क्यों लटके हैं, मुहँ इनके? ये कैसे रिश्ते वाले? क्या मेरी दादी, और, क्या मेरी बुआ? लग रहीं हैं जैसे, कोई हार गईं जुआ। अरे! भूल जाओ अब, जो हुआ सो हुआ, मैं ही चलाऊँगी वंश, तुम दो तो दुआ। क्यों तुम दुखी हो? और किस बात का है गम? आज की बेटी नहीं है, किसी बेटे से कम। कंधे से कन्धा मिलाके चलूंगी, जमाने में, पीछे ना हटूंगी कभी, मेहनत से कमाने में, माँ, ओ माँ, तू तो सुन रही है ना, माँ, जमाने के बहकावे में ना आ जाना माँ। ये लोग नहीं जानते ये क्या कह रहे हैं, अपने आप ही खुद भगवान बन रहे हैं। सृष्टि के नियम से, खिलवाड़ कर रहे हैं, प्रकृति के संतुलन को, बर्बाद कर रहे हैं। ये कौन सा वंश चलाना चाहते हैं? और कैसे ? बिना माँ के बेटे लायेंगे कहाँ से, और कैसे, माँ कैसे ? कहते हैं इंसान, खुद को, इन्हें शर्म क्यों नहीं आती? बेटी के जन्म से पहले, क्य...

- रक्षाबंधन स्पेशल -

भाई - बहन का प्यार क्या है..?? जब 8 साल का लड़का अपनी चॉकलेट एक जगह पर रोज छुपा कर रखता है... और उसकी छोटी बहन रोज वहाँ पर से चॉकलेट उठा कर खा लेती है.... फिर भी वह भाई रोज उस ही जगह पर चॉकलेट रखता है यह जानते हुऐ भी कि उसकी बहन वहाँ से चॉकलेट उठाकर खा लेगी।यह भाई बहन का प्यार है। :-:-:-:-:-:-:-:-:-:-:-:-:-:-:-:-:-:-:-:-: सभी दोस्तों को हमारी ओर से 'रक्षाबंधन' की शुभकामनाएँ।

बच्चों के स्ट्रोक को संजीदगी से na le...

ें बच्चे अपनी तकलीफ जाहिर नहीं कर पाते. ऐसे में जरूरी है कि माता पिता और डॉक्टर उनकी परेशानी को संजीदगी से लें. बहुत से लोग यह बात जानते ही नहीं हैं कि बच्चों को भी लकवा मार सकता है. Symbolbild Mutter mit Baby Buch lesen vorlesen Natur लिन महज एक साल की थी जब वह पहली बार लकवे का शिकार हुई. मुड़े हुए हाथ के साथ माता पिता उसे अस्पताल ले गए. डॉक्टर ने समझा कि उसकी कलाई में कुछ परेशानी है, लगाने के लिए मरहम दिया और उन्हें घर वापस भेज दिया. माता पिता बच्ची की हालत देख कर परेशान रहे. दस दिन बाद जा कर डॉक्टरों को समझ आया कि मामला क्या है. लेकिन इस बीच लिन को दो स्ट्रोक और पड़ चुके थे. दिमाग के दाएं हिस्से पर काफी बुरा असर पड़ा था और शरीर के बाएं हिस्से को लकवा मार चुका है. आज लिन सात साल की है. पिछले छह साल से उसका इलाज चल रहा है. वह पहले से बेहतर है लेकिन पूरी तरह ठीक होने की उम्मीद बहुत कम है. मां पिया बताती हैं, "साढ़े चार साल की उम्र तक लिन ने चलना या बोलना शुरू नहीं किया था. वह बैठ भी नहीं पाती थी." पिया बताती हैं कि लिन की आंखें भी कमजोर हैं और उसकी बाईं टांग का ठीक से ...

“बाबा अभी नहीं ,हम लोग जरुरी काम से बाहर जा रहे ह

मित्र को फिल्मे देखने का बहुत शौक था l एक सर्द शाम को दोनों ने फिल्म देखने का मन बनाया l दोनों तैयार होकर जैसे ही निकलने वाले थे l दरवाजे पर किसी ने दस्तक दिया l "इसवक्त कौन हो सकता हैं ?" राजन ने संदेह व्यक्त किया l "कोई भी हो चलो फिल्म का टाइम हो रहा हैं l " कहते हुए शेखर ने दरवाजा खोला तो सामने एक अधनंगा ,कमजोर भिखारी खडा था l दोनों को देखते ही बड़ी आशा के साथ उसने थरथराती आवाज में कहा – "बेटा बहुत ठण्ड लग रही हैं ,मुझ गरीब को कुछ कपडे दे दो l " "बाबा अभी नहीं ,हम लोग जरुरी काम से बाहर जा रहे हैं l बाद में आना, हम कपडे, खाना सबकुछ दे देंगे l " शेखर ने कहा और बेपरवाह होते हुए आगे बढ़ गया l न चाहते हुए भी राजन को शेखर के साथ जाना पड़ा l फिल्म अच्छी थी l दोनों मित्र फिल्म देखकर घर लौट आया l शाम की वाक्यात को दोनों बिलकुल भूल चुका था l मष्तिष्क पर फिल्म छाया हुआ था l दोनों खा पीकर सपनो के राज्य में विचरण करने लगे l सुबह लोगों की कोलाहल से शेखर की आँखे खुली l वह झट से उठा और खिड़की से बाहर झांककर देखा l यह क्या? बाहर इतनी भीड़ !!! क्या बात ...

STORY

बहुत तेज बारिश हो रही थी। एक बुढिया दिल्ली से चण्डीगढ जाने वाली बस में चढी। ड्राईवर से कहा कि पानीपत आ जाए तो बता देना। बस चलती रही, पानीपत निकल गया पर ड्राईवर बुढिया को बताना भूल गया और बस अम्बाला पहुँच गयी। बुढिया ने पूछा ये कौन सी जगह है तो ड्राईवर बोला, ताई पानीपत तो बहुत पीछे रह गया। बुढिया रोने लगी और कहने लगी कि मुझे पानीपत ले चलो। काफी ना नुकर के बाद और बुढिया की हालत देखते हुए जब सभी यात्रियों ने भी कंडक्टर को वापस पानीपत चलने को कहा तो ड्राईवर वापस चल दिया। पानीपत पहुँचने पर जब बस रुकी तो कंडक्टर बोला, ताई पानीपत आ गया, उतर। बुढिया बोली, उतरना किसको है? कंडक्टर बोला तो बस वापस क्यों कराई? मुझे तो डाक्टर ने बोला था कि पानीपत पहुँचकर दवाई खा लेना।

ब्रह्मचर्य का महत्व

जो भोजन पचता है , उसका पहले रस बनता है। (भोजन से रस बनने में ५ दिन लगते हैं) पाँच दिन तक उसका पाचन होकर रक्त बनता है। पाँच दिन बाद रक्त से मांस , उसमें से ५ - ५ दिन के अंतर से मेद , मेद से हड्डी , हड्डी से मज्जा और मज्जा से अंत में वीर्य बनता है। स्त्री में जो यह धातु बनती है उसे ' रज ' कहते हैं। इस प्रकार वीर्य बनने में करीब ३०दिन व ४ घण्टे लग जाते हैं। वैज्ञानिक बताते हैं कि ३२ किलो भोजन से ८०० ग्राम रक्त बनता है. और ८०० ग्राम रक्त से लगभग २० ग्राम वीर्य बनता है। वीर्य के संयम से शरीर में अदभुत आकर्षक शक्ति उत्पन्न होती है , जिसे प्राचीन वैद्य धन्वंतरि ने ' ओज' कहा है। यही ओज मनुष्य को परम लाभ-आत्मदर्शन कराने में सहायक बनता है। आप जहाँ-जहाँ भी किसी के जीवन में कुछ विशेषता, चेहरे पर तेज, वाणी में बल , कार्य में उत्साह पायेंगे , वहाँ समझो वीर्यरक्षण का ही चमत्कार है। परमात्मा द्वारा अपनी सारी शक्ति बीज रुप में मनुष्य को दी गई है। वह शक्ति कुण्डलिनी कहलाती है। आधुनिक परमाणु विज्ञान की भाषा में कुण्डलिनी (अटॉमिक रिएक्टर) है ...

कैसे फैलता है इबोला

इबोला वायरस एक बार शरीर पर हमला कर दे, तो बचने की उम्मीद बहुत कम होती है. अफ्रीका में इलाज के दौरान संक्रमित हुए एक डॉक्टर की जर्मनी के अस्पताल में मौत गयी. जानिए कैसे फैलता है यह जानलेवा वायरस. Ebola Virus Hamburg 90 फीसदी मामलों में इबोला के शिकार लोगों की मौत हो जाती है. इसके लिए अभी तक कोई दवा नहीं बन पाई है और न ही टीका. 1976 में पहली बार इबोला के मामले सामने आए. तब से अफ्रीका के कई देशों में इसका कहर फैल चुका है. इस साल 800 से ज्यादा लोग इबोला के हाथ अपनी जान गंवा चुके हैं. माइक्रोस्कोप के नीचे देखने पर यह वायरस धागे जैसा नजर आता है. इसकी कई किस्में होती हैं और कुछ ही हैं जो इंसानों पर हमला करती हैं और यह हमला जानलेवा साबित होती हैं. पसीने से संक्रमण इबोला एक संक्रामक रोग है, इसीलिए इबोला के मरीज को सबसे अलग रखा जाता है. लेकिन यह सांस के जरिए नहीं फैल सकता, इसका संक्रमण तभी होता है यदि कोई व्यक्ति मरीज से सीधे संपर्क में आए. मिसाल के तौर पर मरीज के पसीने से यह वायरस फैल सकता है. मरीज की मौत के बाद भी वायरस सक्रिय रहता है. अस्पतालों में इसके फैलने की सबसे बड़ी वजह यह ह...

थकावट दूर करने के लिए

थकावट ******** थकान शब्द से सभी परिचित हैं प्रायः थकावट से सभी का आमना - सामना होता है | सभी सोचते हैं थकावट कैसे दूर की जाए , आइये आज इस पर थोड़ा विचार किया जाए | १- अधिक थकान होने पर, सोते समय गर्म दूध का सेवन करें , दूध हमेशा घूँट -घूँट करके पियें , चाहें तो दूध में एक चम्मच पिसी हुई हल्दी मिला सकते हैं | दूध को भली - भांति फेंट कर [ झाग बनाकर ] ही पियें यह अधिक लाभप्रद होता है | २- अधिक दौड़ने - भागने , चढ़ाई चढ़ने - उतरने या अधिक पैदल चलने के कारण हुई थकान दूर करने के लिए आधा बाल्टी गर्म - पानी लें , उसमें दो चम्मच नमक डालें और बाल्टी में पैर डालकर बैठ जाएँ | थोड़ी देर में जब पानी कुछ ठंडा हो जाए तो और गर्म पानी डाल लें | आधे घंटे में फर्क महसूस करें | ३- थकावट दूर करने के लिए घर में किसी शांत स्थान पर , ढीले वस्त्र पहन कर शवासन में विश्राम करें , अर्थात कसे हुए वस्त्र बदलकर आरामदायक वस्त्र पहने और लेटकर शरीर के सभी अंगों को ढीला छोड़ दें और विश्राम करें

आपके मोबाईल के नम्बर से आप की उम्र पता करेंगे ।

आज आप को आपके मोबाईल के नम्बर से आप की उम्र पता करेंगे । क्या विस्वास नही हो रहा है । ये मजाक नही है । चलो कर के देखते हैं । 1-सबसे पहले आपने मोबाईल का आखरी अंक सोचिये । 2-अब इसमें 2 का गुणा करो । 3-अब इस में 5 जोड़ो । 4-अब इस में 50 का गुणा करो । 5-अब इस में 1764 जोड़ो । 6-अब इस में अपने जन्म वर्ष घटादें । 7-आप को 3 अंक प्राप्त होंगे । इसमें पहला अंक आपके मोबाइल का आखरी अंक है और बचे 2 अंक आप की उम्र है । क्यों आश्चर्य हुवा ना जल्दी जल्दी सेंड करो बाजार में नया है