सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

जुलाई 31, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

भारत और इंडिया में अंतर.....

भारत और इंडिया में अंतर..... भारत में गॉंव है, गली है, चौबारा है. इंडिया में सिटी है, मॉल है, पंचतारा है. भारत में घर है, चबूतरा है, दालान है. इंडिया में फ्लैट और मकान है. भारत में काका है, बाबा है, दादा है, दादी है. इंडिया में अंकल आंटी की आबादी है. भारत में खजूर है, जामुन है, आम है. इंडिया में मैगी, पिज्जा, माजा का नकली आम है. भारत में मटके है, दोने है, पत्तल है. इंडिया में पोलिथीन, वाटर व वाईन की बोटल है. भारत में गाय है, गोबर है, कंडे है. इंडिया में सेहतनाशी चिकन बिरयानी अंडे है. भारत में दूध है, दही है, लस्सी है. इंडिया में खतरनाक विस्की, कोक, पेप्सी है. भारत में रसोई है, आँगन है, तुलसी है. इंडिया में रूम है, कमोड की कुर्सी है. भारत में कथडी है, खटिया है, खर्राटे हैं. इंडिया में बेड है, डनलप है और करवटें है. भारत में मंदिर है, मंडप है, पंडाल है. इंडिया में पब है, डिस्को है, हॉल है. भारत में गीत है, संगीत है, रिदम है. इंडिया में डान्स है, पॉप है, आईटम है. भारत में बुआ है, मौसी है, बहन है. इंडिया में सब के सब कजन है. भारत में प...

Knowledge

पिप्पली (Indian long pepper) - वैदेही,कृष्णा,मागधी,चपला आदि पवित्र नामों से अलंकृत,सुगन्धित पिप्पली भारतवर्ष के उष्ण प्रदेशों में उत्पन्न होती है | वैसे इसकी चार प्रजातियों का वर्णन आता है परन्तु व्यवहार में छोटी और बड़ी दो प्रकार की पिप्पली ही आती है | बड़ी पिप्पली मलेशिया,इंडोनेशिया और सिंगापुर से आयात की जाती है,परन्तु छोटी पिप्पली भारतवर्ष में प्रचुर मात्रा में उत्पन्न होती है | इसका वर्ष ऋतू में पुष्पागम होता है तथा शरद ऋतू में इसकी बेल फलों से लद जाती है | बाजारों में इसकी जड़ पीपला मूल के नाम से मिलती है | यह सुगन्धित,आरोही अथवा भूमि पर फैलने वाली,काष्ठीय मूलयुक्त,बहुवर्षायु,आरोही लता है | इसके फल २.-३ सेमी लम्बे,२. मिमी चौड़े,कच्चे शहतूत जैसे,किन्तु छोटे व बारीक,पकने पर लाल रंग के व सूखने पर धूसर कृष्ण वर्ण के होते हैं | इसके फलों को ही पिप्पली कहते हैं | पिप्पली के विभिन्न औषधीय गुण - १- पिप्पली को पानी में पीसकर माथे पर लेप करने से सिर दर्द ठीक होता है | २- पिप्पली और वच चूर्ण को बराबर मात्रा में लेकर ३ ग्राम की मात्रा में नियमित रूप से दो बार दूध या गर्म पानी के साथ से...

Knowledge

नमस्कार। *महाराष्ट्र के पुणे जिले में भूस्खलन प्रभावित मालिन गांव में भारी वर्षा के बावजूद राहत और बचाव कार्य जारी, अब तक 26 लोगों के शव मिले। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने घटनास्थल का दौरा किया। *भारत यात्रा पर आए अमरीकी विदेश मंत्री जान कैरी ने वित्त और रक्षा मंत्री अरूण जेटली से मुलाकात की, आपसी हित और वैश्विक स्तर के महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। *दिल्ली उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को तुरंत प्रभाव से ई-रिक्शा पर रोक लगाने का निर्देश दिया। *उच्चतम न्यायालय ने 2006 में मेरठ अग्निकांड की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग गठित किया। *लेफ्टीनेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने नए सेना प्रमुख का पदभार ग्रहण किया। *इंग्लैंड के साथ साउथेम्पटन क्रिकेट टेस्ट के पांचवें और अंतिम दिन भारत 445 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुये आज चार विकेट पर 112 रन से आगे खेलेगा। *ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल में ओलंपियन योगेश्वर दत्त सहित तीन भारतीय पहलवान आज अपने मुकाबले खेलेंगे। बैडमिंटन खिलाड़ी पी वी सिंधू और पी कश्यप क्वार्टर फाइनल के लिए खेलेंगे।

KNOWLEDGE

ईसबगोल (Spogel seeds) - ईसबगोल का मूल उत्त्पत्ति स्थान ईरान है और यहीं से इसका भारत में आयात किया जाता है | इसका उल्लेख प्राचीन वैद्यक शास्त्रों व निघण्टुओं में अल्प मात्रा में पाया जाता है| 10वीं शताब्दी पूर्व के अरबी और ईरान के अलहवीं और इब्नसीना नामक हकीमों ने अपने ग्रंथों में औषधि द्रव्य के रूप में ईसबगोल का निर्देश किया था | तत्पश्चात कई यूनानी निघण्टुकारों ने इसका खूब विस्तृत विवेचन किया | फारस में मुगलों के शासनकाल में इसका प्रारम्भिक प्रचार यूनानी हकीमों ने इसे ईरान से यहां मंगाकर किया | तब से जीर्ण प्रवाहिका और आंत के मरोड़ों पर सुविख्यात औषधोपचार रूप में इसका अत्यधिक प्रयोग किया जाने लगा और आज भी यह आंत्र विकारों की कई उत्तमोत्तम औषधियों में अपना खास दर्जा रखती है |इनके बीजों का कुछ आकार प्रकार घोड़े के कान जैसा होने से इसे इस्पगोल या इसबगोल कहा जाने लगा | आजकल भारत में भी इसकी खेती गुजरात,उत्तर प्रदेश,पंजाब और हरियाणा में की जाती है| औषधि रूप में इसके बीज और बीजों की भूसी प्रयुक्त की जाती है | बीजों के ऊपर सफ़ेद भूसी होती है | भूसी पानी के संपर्क में आते ही चिकना लुआव बना लेत...

STORY

वृन्दावन गया था। बाँके बिहारी के दर्शन करने के पश्चात् मन में आया कि यमुना के पवित्र जल में भी डुबकी लगाता चलूँ। पवित्र नदियों में स्नान करने का अवसर रोज-रोज थोड़े ही मिलता है। यमुना के घाट सुनसान से थे। हाँ, बन्दरों की सेना अवश्य अपनी इच्छानुसार वहाँ विचरण कर रही थी। सीढ़ियाँ और बारादरियाँ टूटी-फूटी पड़ी थी। लगा कि वहाँ महीनों से सफाई नहीं हुई है। परन्तु मुझे तो स्नान करना ही था। जल में प्रवेश करने से पूर्व मैंने दोर्नो हाथ जोड़कर ऊँची आवाज में कहा-"यमुना मैया, तुम्हारी जय!'' ''मुझे मैया नहीं, अपनी दासी कहो बेटा। और दासियों की जय कभी नहीं बोली जाती।'' अचानक एक उदास-सा स्वर मेरे कानों में पड़ा, जैसे कि कोई दुखिया बूढ़ी औरत बोल रही हो। मैंने चौंक कर इधर-उधर देखा। घाट पर मेरे अतिरिक्त अन्य कोई था ही नहीं। सोचा कि मेरे मन का वहम रहा होगा। कोई बूढ़ी औरत वहाँ होती तो दिखाई ज़रूर देती। मैंने झुककर हाथ से जल का स्पर्श किया, उसे माथे से छुआते हुए कहा-"माँ, मुझे अपने पवित्र जल में स्नान करने की आज्ञा दें।" इतना कहकर मैंने अप...