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मार्च 3, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अगर आप अपने होंठों का पूरा ध्‍यान नहीं रखें, तो वे फट सकते हैं जिससे आपको काफी तकलीफ हो सकती है। इस लेख में जानें फटे हुए होंठो का घरेलू उपचार। 

 होंठ आपकी मुस्‍कान ही नहीं, बल्कि आपके व्‍यक्तित्‍व को भी निखारते हैं। अगर आप अपने होंठों का पूरा ध्‍यान नहीं रखें, तो वे फट सकते हैं जिससे आपको काफी तकलीफ हो सकती है। इस लेख में जानें फटे हुए होंठो का घरेलू उपचार।    होंठो की त्वचा शरीर के अन्य हिस्सों की त्वचा से अलग होती है। कुदरती तौर पर इन्‍हें नरम रखने का कोई उपाय नहीं होता। इससे यह शुष्क हो जाते हैं। और इन पर ठंडी हवाओं का असर भी ज्‍यादा होता है। जिसकी वजह से इनके सूखे पड़ने और फटने की आशंका बहुत अधिक होती है। होंठों पर सर्दी और गर्मी दोनों मौसम का असर पड़ता है। इसके साथ उन्‍हें बार-बार चाटने से भी उनमें दरार पड़ जाती है। कई बार हालात काफी खराब हो जाते हैं कि फटे होंठों से खून भी निकल सकता है। जिसकी वजह से आपको बहुत दर्द और असुविधा का सामना करना पड सकता है । आप ऐसी गंभीर घटना से बचने के लिए कई घरेलू उपाय कर सकते हैं जैसे   शहद और वेसलीन से उपचार शहद के पोषक तत्व इसे बहुत अच्छा रोगहर और जीवाणु विरोधी तत्व बना देते हैं ।और वेसलीन एक बहुत ही अच्छा त्वचा रक्षक माना जाता है ।इन दोनों के मिलने से सूखे होंठो के लिए ए...

सिरदर्द से बचने के घरेलू उपचार

सिर दर्द एक आम समस्या है। लोग अक्सर सिर दर्द को ठीक करने के लिए दवाओं का सहारा लेते हैं, जिनके कुछ साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। लेकिन इन पेनकिलर दवाओं के बजाय घर के बने कुछ नुस्खे इस्तेमाल कर आपको आराम ‌भी मिलेगा और इनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होगा। आइए इस लेख के माध्यम से हम आपको सिरदर्द से बचने के घरेलू उपाय के बारे में बताते हैं।   कई बार सिर में ऐसा दर्द होता है जो नाकाबिले बर्दाश्त हो जाता है। सिरदर्द कई कारणों से होता है, जिनमें तनाव और थकान प्रमुख हैं। हालांकि, कई बार गैस के कारण भी सिर में दर्द होता है। जब पेट की गैस ऊपर चढती है और पास नहीं हो पाती है तो यह दिल और दिमाग पर असर करती है, जिसके कारण सिरदर्द होता है।   सिरदर्द से बचने के घरेलू उपचार  सिरदर्द होने पर बिस्तर पर लेटकर दर्द वाले हिस्से को बेड के नीचे लटका दीजिए। सिर के जिस हिस्से में दर्द हो रहा हो उस तरफ वाले नाक में सरसों के तेल की कुछ बूंदें डाल दीजिए, उसके बाद जोर से सांसों को ऊपर की तरफ खींचिए इससे सिरदर्द से राहत मिलेगी। सिरदर्द होने पर दालचीनी को पानी के साथ महीन पीसकर माथे पर पतला लेप कर लगा लीजिए...

अर्थराइटिस का दर्द बेहद तकलीफदेह हो सकता है।

इस दौरान आपसे हिलना-ढुलना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में आपकी रोजमर्रा की जिंदगी भी बुरी तरह प्रभावित होती है। जरूरत है कि आप समय से इस रोग का निदान करें।    कोई भी लक्षण नजर आते ही अपने डॉक्‍टर से मिलिये। कई लोग दर्द के लिए जड़ी बूटियों और दवाओं का प्रयोग करते हैं। लेकिन, दर्द लंबे समय तक रहे तो आपको डॉक्‍टर से मिलकर अपने रोग की पुष्टि करवा लेनी चाहिए। याद रखिए केवल डॉक्‍टर सिर्फ डॉक्‍टर ही बता सकता है कि यह अर्थराइटिस है या उससे जुड़ी कोई और समस्या है अथवा कुछ और। किसी भी बीमारी को गंभीर होने का मौका नहीं देना चाहिए। अगर आपको जरा सा भी संशय है तो डॉक्‍टर से मिलकर इसका निवारण किया जाना जरूरी है।   अपने डॉक्‍टर को अपनी तकलीफ के बारे में बताइए। यह बताइए कि आखिर आपको कहां दर्द हो रहा है। और किस प्रकार का दर्द हो रहा है। डॉक्‍टर आपकी जांच करेगा और जरूरत महसूस हुयी तो एक्‍सरे भी करेगा। यह भी संभव है कि डॉक्‍टर आपका रक्‍त जांच करके यह पता लगाए कि आखिर आपको किस प्रकार का अर्थराइटिस है।   अर्थराइटिस के प्रकार का पता लगने के बाद डाक्टर आपसे उसके इलाज के बारे में बात करेगा । डाक्...

रात के अंधेरे में भटकती रूहों की दर्दनाक कहानी

भूत-प्रेत, पिशाच, आत्माएं इंसानी दुनिया से अलग-थलग संसार बसाकर ऐसी ही कुछ पारलौकिक ताकतें बिना किसी परेशानी के विचरण करती हैं. जिस तरह जीवित लोगों की दुनिया में इनका प्रवेश वर्जित माना जाता है उसी प्रकार अगर आप और हम किसी भी तरह से उनकी अंधेरों से घिरी दुनिया में कदम रखने की कोशिश करते हैं तो उन्हें यह बात बिल्कुल सहन नहीं होती और वह हमारे इस दुस्साहस का बदला लेने के लिए अपनी सीमाएं तोड़कर इंसानी दुनिया में दखल देने लगते हजारों वर्षों पहले लगे एक तांत्रिक के श्राप से आज भी भानगढ़ का किला जूझ रहा है. पुरातत्व वैज्ञानिकों और राज्य सरकार द्वारा वहां लिखित तौर पर यह चेतावनी दी गई है कि सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद कोई भी व्यक्ति वहां ना तो ठहरेगा और ना ही जाएगा. वहां कुछ तो जरूर होगा. अब हम आपको भारत के ऐसे दूसरे स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं जहां ऐसी ही कुछ भटकती रूहों ने अपना आशियाना बना लिया है. गुजरात की चर्चित दुमास बीच ऐसी ही एक जगह है जहां हर समय मरे हुए लोग विचरण करते हैं. हिंदू धर्म में मरने के बाद मृत शरीर का दाह संस्कार किए जाने के बाद ही उसे मुक्ति या मोक्ष...

एलियन के होने का एक और सबूत

क्या वाकई एलियन होते हैं? यूएफओ क्या सच में दिखाई देती हैं? धरती से परे क्या किसी अन्य ग्रह में भी जीवन संभव हैं? अगर एलियन सच में होते हैं तो वो दिखते कैसे होंगे? क्या वो इंसानों के लिए खतरा है? जब भी एलियन की बात उठती है यह कुछ सवाल अचानक हमारे मस्तिष्क में कौंधने लगते हैं. कभी कोई एलियन को देखे जाने की बात कहता है तो कभी कोई यूएफओ देखने का दावा करता वैसे तो एलियन का अस्तित्व वैज्ञानिक अध्ययनों का सबसे रोचक और प्रमुख हिस्सा है लेकिन हैरानी की बात है कि पिछले कई सालों की रिसर्च के बाद भी वैज्ञानिक पुख्ता तौर पर कुछ भी कह नहीं सकते हैं. ना वो इस बात को स्वीकारते हैं कि एलियन होते हैं और ना ही पूरी तरह उनके अस्तित्व को नकारते ं अब हाल ही में ब्रिटेन के एक शीर्ष वैज्ञानिक ने यह दावा किया है उन्होंने धरती से परे जीवन के होने के पुख्ता सबूत मिले हैं. प्रोफेसर चंद्र विक्रमसिंह नाम के ब्रितानी वैज्ञानिक का कहना है दिसंबर में श्री लंका में एक उल्का पिंड का टुकड़ा गिरा था जिसमें एल्गी (शैवाल) के छोटे-छोटे जीवाश्म चिपके हुए थे. यह दिखने में बिल्कुल समुद्री शैवाल (सीवीड) के तरह थे. प्रोफेस...

Horror Stories ....

खेलने को मजबूर कर देती हैं वो आत्माएं खेतों, बाग-बगीचों में छिपी आत्माओं और उनसे जुड़े किस्से तो आप सभी ने सुने होंगे. ऐसी आत्माएं जो जंगल में आने और उस रास्ते को पार करने वाले लोगों के लिए घातक सिद्ध होती हैं. लेकिन यहां आत्माओं और प्रेतों से जुड़ी जिस सच्ची घटना का जिक्र मैं करने जा रही हूं वह डरावनी तो नहीं लेकिन दिलचस्प जरूर है. क्योंकि इस खेत का भूत डराता नहीं बल्कि अपने साथ खेलने के लिए मजबूर कर देता है और अगर उसके साथ खेल में शामिल ना हुआ जाए तो फिर निश्चित ही वह क्रोधित होकर नाक में दम कर देता है. आम और महुआ के पेड़ों से भरा हुआ यह बगीचा अपनी सुंदरता के लिए आसपास के कई गांवों में मशहूर था. लेकिन एक वजह और थी जिसके कारण यह बाग अन्य बागीचों की अपेक्षा ज्यादा चर्चित था. वह वजह थी यहां आत्माओं का वास होना. लोग कहते थे कि इस बाग को दिन हो या रात कभी भी पार नहीं करना चाहिए. लेकिन जैसा की मैंने पहले आपको बताया कि यहां गांव वालों के आम के पेड़ लगे हुए हैं इसीलिए आना जाना लगा ही रहता था. लोग आते तो थे लेकिन जल्दी से जल्दी, शाम होने से पहले ही निकल जाते थे क्योंकि वह जानते थे कि अगर ...

Horror Stories .... उसके ऊपर आत्मा का पहरा था

यह कहानी है राजस्थान के भिलवाड़ा के पास एक गांव में रहने वाली लता की है. जिसके बारे में कहा जाता है कि उसके ऊपर किसी प्रेत आत्मा का साया है. अभी वह 18 की हुई है लेकिन उसकी गोद में तीन बच्चे हैं. ग्रामीण इलाकों में विवाह जल्दी हो जाता है सो लता को भी 10 साल की उम्र में ही ससुराल भेज दिया ससुराल में उसे कितना प्यार मिला यह तो हम नहीं बता सकते लेकिन गांव वाले उसे दूर रहते हैं. वह कहते हैं लता जो भी कहती है वह सच हो जाता है. किसी काली शक्ति ने उसे अपनी चपेट में लिया हुआ है. लता के पड़ोस में रहने वाले लोग उससे डरते हैं. उससे बात तक नहीं करते, नाजाने लता के मुंह से क्या निकल जाए जो उनके लिए खतरनाक सिद्ध ं लता के मायके के पड़ोस में रहने वाली राजो का कहना है कि जब लता छोटी थी तो एक बार वो और लता बाहर खेल रहे थे. खेलते-खेलते लता को एक कुत्ते ने काट लिया अचानक लता के मुंह से उस कुत्ते के लिए बददुआ निकली. उसने कहा इस कुत्ते को मौत आ जाए और जब सुबह उठकर जब देखा तो गली के बाहर लोग इकट्ठा थे क्योंकि वह कुत्ता मरा पड़ा था और गांवभर में बदबू फैली हुई थी. इतना ही नहीं एक बार लता का हाथ जल गया त...

इस ‘संख्या’ का राज क्या है ?

इस 'संख्या' का राज क्या है ? देखिए जरा ! चीन ने फिर कमाल कर दिखाया और चीन ही क्यों अमेरिका, इंग्लैंड ना जाने कितने ऐसे देश हैं जिनका गुणगान उनके देश के लोग भले ही ना करें पर भारतीय उनका गुणगान करने में पीछे नहीं रहते हैं. क्या आप भी उन लोगों में एक हैं जिन्हें 'आई एम इंडियन' कहना अच्छा नहीं लगता है तो यकीनन इसे पढ़ने के बाद आप गर्व से कहेंगे 'आई एम इंडियन'. 'प्लास्टिक सर्जरी' इस शब्द को सुनते ही आपके दिमाग में विदेशी डॉक्टरों के चेहरे घूमने लगते होंगे पर जरा ठहरिए ! एक बार इस सच को भी जान लीजिए. 2000 ईसा पूर्व पहले भारत में प्लास्टिक सर्जरी की शुरुआत हुई और बाद में जाकर भारत अन्य देशों के लिए प्लास्टिक सर्जरी के मामले में मार्गदर्शक बन गया. कुदरत का करिश्मा कहें या फिर पिछले जन्म का….. शायद ही कोई ऐसा हो जिसे हीरे के आभूषण पसंद ना आते हों. क्या आप जानते हैं कि 5000 साल पहले भारत में हीरे को खोजा गया था. अधिकाश लोग यह जानते होंगे कि मारकोनी ने रेडियो तरंगों का इस्तेमाल संदेश भेजने के लिए किया. मारकोनी को बिना तार के संदेश भेजने की खोज के लिए नोबेल पुरस्का...

अदृश्य शक्तियों ने इस वैज्ञानिक को दिए कई झटके!!

अदृश्य शक्तियों ने इस वैज्ञानिक को दिए कई झटके!! संसार में ऐसी कई रहस्यमयी बातें है जिनके आगे विज्ञान भी घुटने टेक देती है. एक ऐसी अदृश्य शक्ति जो इंसान और विज्ञान की कल्पना से भी बहुत आगे की बात हो. संसार में पल-पल कई ऐसी रहस्यमयी घटना घट रही है जिसके पीछे की कहानी पर यकीन करना भी मुश्किल होता है. नित्य नई विज्ञान का विकास भी इस रहस्यमयी दुनिया को समझ नहीं पाया है. आइए जानते हैं संसार में होने वाली एक ऐसी ही रहस्यमयी घटना को जिसके आगे विज्ञान भी घुटने टेक चुकी है... अदृश्य शक्तियों की कहानी आपने बहुत सुनी होगी पर आज की एक सच्ची कहानी पहली बार आप जानेंगे. यह बात आज से कई साल पुरानी है जब मिस्र में राजा महाराजाओं का राज चलता था. कहा जाता है कि उस समय में पिरामिडों के भीतर मिस्र की बड़ी-बड़ी हस्तियों के शवों को ममी के रूप में दफ़नाया गया था. मिस्र के अधिकतर पिरामिड एक ही तरीके से बनाए गए हैं लेकिन इन सबके बीच ग्रेट पिरामिड की संरचना थोड़ी अलग और अपने भीतर कई रहस्य समेटे हुए है. मिस्र का यह ग्रेट पिरामिड मिस्र के राजा खुफ़ू की कब्र है जिसका निर्माण आज से करीब 4500 वर्ष पूर्व किया गया था. 1874...

बिना इंटरनेट ऐसे करें जीमेल इस्तेमाल

बिना इंटरनेट ऐसे करें जीमेल इस्तेमाल इंटरनेट के बिना यह दुनिया कितनी अधूरी है. आज के युवाओं के लिए इंटरनेट के बिना एक दिन बिताना जैसे पानी के बिना मछली का जीना हो जाता है. लेकिन सोचिए कभी इंटरनेट उपलब्ध ना हो और आपको जीमेल पर अपनी महत्वपूर्ण मेल चेक करनी हो तो आप क्या करेंगे? इस समस्या का एक ही हल है और वह है बिना इंटरनेट के चलने वाला How to Use Gmail without Internet हम जीमेल का इस्तेमाल कई कारणों से करते हैं. कुछ जीमेल का इस्तेमाल ईमेल के लिए करते हैं तो कुछ के लिए इसका फायदा सिर्फ चैटिंग के लिए हो पाता है. पर कुछ भी हो आज लोगों के लिए जीमेल बहुत महत्वपूर्ण हो चुका है और इस जीमेल से एक दिन भी दूर रह पाना मुश्किल भरा काम होता है. ऐसे में आपके और जीमेल के बीच इंटरनेट ना आए इसलिए गूगल क्रोम लेकर आया है ऑफलाइन गूगल मेल सेवा. Offline Google Mail Service ऑफलाइन गूगल मेल सेवा आपको बिना इंटरनेट के जीमेल एक्सेस करने की आजादी प्रदान करता है. हालांकि बिना इंटरनेट के जीमेल इस्तेमाल करने के लिए आपके कम्प्यूटर में क्रोम वेब ब्राउजर होना चाहिए. इस ब्राउजर के बिना आप इस सेवा का लाभ नहीं उठा सक...

बिना इंटरनेट ऐसे करें फेसबुक इस्तेमाल

बिना इंटरनेट ऐसे करें फेसबुक इस्तेमाल How to use Facebook without Internet एक समय था जब युवा वर्ग में ऑरकुट एक बीमारी की तरह फैला था. युवा इसके प्रति ऐसे दिवाने थे कि कहीं भी हों दिन में अपना ऑरकुट अकाउंट खोलना नहीं भूलते थे. लेकिन अब ऑरकुट की जगह ले ली है फेसबुक ने. आज के युवा चाहे बुक से कितना भी दूर भागें लेकिन फेसबुक की दुनिया में उनका मन हमेशा लगता है. फेसबुक के दीवाने तो इसे एक रोग मानते हैं. सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक हर समय फेसबुक पर अपडेट करना जाहिर करता है कि वह फेसबुक के नशे के आदी हो चुके हैं. कुछ "फेसबुक नशेड़ियों" को जब उनका इंटरनेट बंद हो जाता है तो बड़ी तकलीफ होती है. अब बिना इंटरनेट उन्हें फेसबुक की खुराक नहीं मिलती तो परेशानी तो होगी ही. लेकिन अब इसका भी एक उपाय है. Facebook on mobile without internet मोबाइल द्वारा बिना इंटरनेट के भी आप चाहे तो फेसबुक का मजा ले सकते हैं. मोबाइल पर बिना इंटरनेट के फेसबुक चलाना बेहद आसान है. इस ट्रिक के जरिए आप चाहे तो नोकिया 1100 जैसे मोबाइल पर भी फेसबुक का मजा ले सकते हैं. इस विधि के द्वारा आप अपना स्टेटस अपडेट कर सकेंग...

क्या था वो श्राप जिसकी वजह से सीता की अनुमति के ,बिना उनका स्पर्श नहीं कर पाया रावण?

क्या था वो श्राप जिसकी वजह से सीता की अनुमति के  ,बिना उनका स्पर्श नहीं कर पाया रावण? विभिन्न धर्मों और मान्यताओं के देश भारत में अलग-अलग देवी-देवताओं को मानने वाले लोग रहते हैं. जिनमें से एक हैं भगवान श्रीराम. भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवनकाल मर्यादा के बंधन से बंधा है जिसकी वजह से उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम कहा जाता है. पुत्र और पति दोनों ही रूपों में श्रीराम ने मर्यादा का पालन करने वाले श्रीराम की पत्नी माता सीता ने भी अपने पतिवृता धर्म को बखूबी निभाया. असुर सम्राट रावण की कैद में एक लंबा समय गुजारने के दौरान उन्होंने कभी रावण को अपने समीप तक नहीं आने दिया. वैसे कभी आपने सोचा है कि लंका का राजा रावण अगर चाहता तो सीता को किसी बेहे समय अपनी पत्नी बना सकता था लेकिन फिर भी उसने सीता की स्वीकृति का इंतजार क्यों किया? क्या वह सीता के क्रोध से डरता था या फिर श्रीराम के? वह किसी वचन में बंधा था या फिर वह श्रापित था? आलीशान महल को छोड़कर उसने क्यों सीता को एक वाटिका के अंदर क्यों रखा? इन सब सवालों के जवाब भी पुराणों में ही छिपे हैं:  रावण की सोने की लंका का निर्माण कुबेर ने किया...

स्त्रियों से दूर रहने वाले हनुमान को इस मंदिर में स्त्री रूप में पूजा जाता है, जानिए कहां है यह मंदिर और क्या है इसका रहस्य

 स्त्रियों से दूर रहने वाले हनुमान को इस मंदिर में स्त्री रूप में पूजा जाता है, जानिए कहां है यह मंदिर और क्या है इसका रहस्य पवन पुत्र व राम भक्त हनुमान को युगों से लोग पूजते आ रहे हैं. उन्हें बाल ब्रह्मचारी भी कहा जाता है जिस कारण स्त्रियों को उनकी किसी भी मूर्ति को छूने से मना किया गया है. वे देवता रूप में विभिन्न मंदिरों में पूजे जाते हैं लेकिन एक ऐसा मंदिर भी है जहां पर हनुमान को पुरुष नहीं बल्कि स्त्री के रूप में पूजा जाता है. अद्भुत है यह मंदिर जहां हनुमान को स्त्री स्वरूप में देखा जाता है. छत्तीसगड़ के बिलासपुर में प्रसिद्ध यह मंदिर एक प्रचीन मंदिर है जहां पर हनुमान के स्त्री के रूप के पीछे छिपी दस हजार साल पुरानी एक कथा प्रचलित है.  कहां है ये मंदिर यह मंदिर छत्तीसगड़ के बिलासपुर जिले से 25 कि. मी. दूर रतनपुर में है. कहा जाता है कि यह एक महत्वपूर्ण जगह है जो काफी महान है. इतना ही नहीं, इस नगरी को महामाया नगरी भी कहा जाता है क्योंकि यहां पर मां महामाया देवी मंदिर और गिरजाबंध में स्थित हनुमानजी का मंदिर है.  इस छोटी सी नगरी में स्थित हनुमान जी का यह विश्व में इकलौता ऐसा मंदिर है...

क्या है इस रंग बदलते शिवलिंग का राज जो भक्तों की हर मनोकामना पूरी करता है?

चमत्कारों से भरी इस दुनिया में कब क्या हो जाए कुछ पता नहीं. हालांकि आज विज्ञान ऐसे बहुत से चमत्कारों का जवाब दे चुका है लेकिन कई सवाल ऐसे भी हैं जिनका जवाब विज्ञान की कसौटी पर भी खरा नहीं उतर पा रहा है. ऐसा ही एक सवाल है धौलपुर का शिवलिंग. राजस्थान के धौलपुर जिले में स्थित यह शिवलिंग दिन में तीन बार अपना रंग बदलता है लेकिन ऐसा क्यों होता है इसका जवाब ना तो किसी वैज्ञानिक के पास है और ना ही ही कोई अन्य अभी तक इस रहस्य से पर्दा उठा पाया है. धौलपुर का ये इलाका चंबल के बीहड़ों के लिए तो प्रसिद्ध है ही सही लेकिन साथ में रंग बदलने वाले इस शिवलिंग, जिसका रंग दिन में लाल, दोपहर को केसरिया और रात को सांवला हो जाता है, के विषय में व्याप्त कहानियां बहुत से लोगों को यहां आने के लिए प्रेरित करती हैं. भगवान अचलेश्वर महादेव के इस मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है. यहां आने का रास्ता बेहद पथरीला और टेढ़ा है लेकिन इस मंदिर की मान्यता भक्तों को यहां खींचकर ले जाती है. इस शिवलिंग के विषय में ऐसा माना जाता है कि जो भी कुंवारा युवक या कुंवारी युवति यहां शादी की मन्नत मांगने आते हैं तो बहुत ही जल्दी उन...

होली के अवसर पर चुनावी रंग तो चढ़ना ही था-हिन्दी चिंत्तन लेख

            अगर अंतर्मन सूखा हो तो बाहर पानी में कितने भी प्रकार के रंग डालकर उन्हें उड़ाओ क्षणिक प्रसन्नता के बाद फिर वही उष्णता घिर आती है।  बाह्य द्रव्यमय रंगों का रूप है दिखता है उसमें गंध है जो सांसों में आती है , एक दूसरे पर रंग डालते हुए शोर होता है उसका स्वर है, दूसरे की देह का स्पर्श है। पांचों इंद्रियों की सक्रियता तभी तक अच्छी लगती है जब तक वह थक नहीं जाती।  थकने के बाद विश्राम की चाहत! एक पर्व मनाने का प्रयास अंततः थकावट में बदल जाता है।       आदमी बोलने पर थकता है, देखने में थकता है, सुनने में थकता है, चलते हुए एक समय तेज सांसें लेते हुए थकता है, किसी एक चीज का स्पर्श लंबे समय तक करते हुए थकता है। आनंद अंततः विश्राम की तरफ ले जाता है।  यह विश्राम इंद्रियों की  सक्रियता पर विराम लगाता है। यह विराम देह की बेबसी से उपजा है। देह की बेबसी मन में होती है और तब दुनियां का कोई नया विषय मस्तिष्क में स्थित नहीं हो सकता।  व्यथित इंद्रियां विश्राम करने  के समय स्वयं को सहमी लगती हैं।       योग साधकों की होली अंतर्मन में रंगों के दर्शन करते हुए बीतती है।  एकांत में आत्मचिंत्तन क...

पतंजलि योग साहित्य-इन्द्रियों की क्रियाएँ ही दृश्य हैं

                                          हमारी इंद्रियां हमेशा बाहर ही सक्रिय रहने को लालायित रहती है।  विशेष रूप से हमारी आंखें हमेशा ही दृश्य देखने को उत्साहित रहती है।  हम जिन दृश्यों को देखते हैं वह दरअसल प्रकृति में विचर रहे विभिन्न जीवों की लीला है।  जिनकी उत्पति भोग तथा मुक्ति के लिये होती है। कुंछ लोग अपने भोग करने के साथ ही उसके लिये साधन प्राप्त करने का उपक्रम करते हैं तो उनकी यह सक्रियता दूसरे मनुष्य के लिये दृश्य उपस्थिति करती है।  कुछ लोग मुक्ति के लिये योग साधन आदि करते हैं तो भी वह दृश्य दिखता है।  मुख्य विषय यह है कि हम किस प्रकार के दृश्य देखते हैं और उनका हमारे मानस पटल पर  क्या प्रभाव पड़ता है इस पर विचार करना चाहिये।                         हम कहीं खिलते हुए फूल देखते हैं तो हमारा मन खिल उठता है। कहीं हम सड़क पर रक्त फैला देख लें तो एक प्रकार से तनाव पैदा होता है। यह दोनों ही स्थितियां भले ही विभिन्न भाव उत्पन्न करती हैं पर योग साधक के लिये समान ही होती है।  वह जानता है कि ऐसे दृश्य प्रकृति का ही भाग हैं।                         हम देख रहे हैं कि मनोरंजन व्यव...

दूसरे की निंदा कर अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने का प्रयास अनुचित-संत तुलसीदास दर्शन पर आधारित चिंत्तन लेख

           सामान्य मनुष्य की इंद्रियां अपने समक्ष घटित दृश्य, उपस्थित वस्तु तथा व्यक्ति के साथ ही स्वयं से जुड़े विषय पर ही केंद्रित रहती है। ज्ञान के अभाव में मनुष्य सहजता से बहिर्मुखी रहता है जिस कारण उसे जल्दी ही मानसिक तनाव घेर लेता है। अगर कोई व्यक्ति साधक बनकर योगाभ्यास तथा ज्ञानार्जन का प्रयास करे तो ंअंततः उसकी अंतर्चेतना जाग्रत हो सकती है।  बाहरी विषयों से तब उसका संपर्क सीमित रह जाता है।  बहिर्मुखी  भाव कभी थकावट तो कभी बोरियत का शिकार बनाता है।  यही कारण है कि जिन लोगों के पास धनाभाव है वह अधिक धनी को देखकर उसके प्रति ईर्ष्या पालकर कुंठित होते हुए स्वयं को रोगग्रस्त बना लेते हैं। उसी तरह धनी भी आसपास गरीबी देखकर इस भय से ग्रसित रहता है कि कहीं उसकी संपत्ति पर किसी की वक्रदृष्टि न पड़े। वह अपने वैभव की रक्षा की चिंता में अपनी देह गलाता है। आर्थिक विशेषज्ञ  कहते हैं कि हमारे देश में धनिकों की संख्या बढ़ी है तो स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात की जानकारी भी सार्वजनिक रूप से करते हैं कि देश में राजरोगों का प्रकोप बढ़ा है। हमारे समाज में चर्चायें अब अध्यात्म विषय पर कम संसार के भोगों पर...