, पढ़ने वाले इस कहानी को भी मनगढ़ंत मानकर नजरअंदाज कर देंगे लेकिन किसी के मानने या ना मानने से सच तो नहीं बदल सकता और सच यही है कि उस रात एक छोटी सी शर्त लगाकर शायद मैंने अपने जीवन के सबसे भयानक और खौफनाक पल को आमंत्रित किया था. बात आज से 5 साल पहले की है. मैंने अपनी जॉब चेंज की और जिस कंपनी को जॉइन किया उसका हेड क्वार्टर बंगलुरू में था. एक सेमिनार के लिए मुझे अपने ऑफिस की तरफ से बंगलुरू जाना पड़ा जहां अन्य शहरों में स्थित ब्रांचों से भी लोग आए थे. उन्हीं सब लोगों में से तीन अजय, नवीन और अमित से मेरी अच्छी दोस्ती हो गई. हम चारो कंपनी के गेस्ट हाउस में रुके हुए थे. 2 दिन तक चलने वाले इस सेमिनार का टाइम सुबह 9 से 5:30 तक का था इसीलिए हम तीनों के पास काफी समय बच जाता था. अजय, नवीन और अमित के स्वभाव एक-दूसरे से पूरी तरह अलग थे. अजय बहुत बातूनी और मजाकिया था वहीं नवीन बहुत कम बोलता था. नवीन की ही तरह अमित भी थोड़ा रिजर्व था लेकिन उसका सेंस ऑफ ह्यूमर बहुत मजेदार था. एक बार हम सभी साथ बैठे हुए थे तभी अजय ने कहा मैंने देखा है होटल के पीछे एक कब्रिस्तान है, अगर टाइम मिला तो वहां जरूर जाएंगे. अ...
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