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फ़रवरी 28, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

स्वामी जी का उपदेश :

स्वामी जी का उपदेश : एक बार समर्थ स्वामी रामदासजी भिक्षा माँगते हुए एक घर के सामने खड़े हुए और उन्होंने आवाज लगायी - "जय जय रघुवीर समर्थ !" घर से महिला बाहर आयी। उसने उनकी झोलीमे भिक्षा डाली और कहा, "महात्माजी, कोई उपदेश दीजिए !" स्वामीजी बोले, "आज नहीं, कल दूँगा।" दूसरे दिन स्वामीजी ने पुन: उस घर के सामने आवाज दी – "जय जय रघुवीर समर्थ !"उस घर की स्त्रीने उस दिन खीर बनायीं थी, जिसमे बादाम-पिस्ते भी डाले थे।वह खीर का कटोरा लेकर बाहर आयी। स्वामीजीने अपना कमंडल आगे कर दिया। वह स्त्री जब खीर डालने लगी, तो उसने देखा कि कमंडल में गोबर और कूड़ा भरा पड़ा है। उसके हाथ ठिठक गए। वह बोली, "महाराज ! यह कमंडल तो गन्दा है।" स्वामीजी बोले, "हाँ, गन्दा तो है, किन्तु खीर इसमें डाल दो।" स्त्री बोली, "नहीं महाराज, तब तो खीर ख़राब हो जायेगी। दीजिये यह कमंडल, में इसे शुद्ध कर लाती हूँ।" स्वामीजी बोले, मतलब जब यह कमंडल साफ़ हो जायेगा, तभी खीर डालोगी न ?" स्त्री ने कहा : "जी महाराज !" स्वामीजी बोले, "मेरा भी यही उपदेश है...
सबसे बड़ा हथियार:~ बादशाह अकबर और बीरबल के बीच कभी-कभी ऐसी बातें भी हुआ करती थीं जिनकी परख करने में जान का खतरा रहता था। एक बार बादशाह अकबर ने बीरबल से पूछा- 'बीरबल, संसार में सबसे बड़ा हथियार कौन-सा है?' 'बादशाह सलामत! संसार में सबसे बड़ा हथियार है आत्मविश्वास।' बीरबल ने जवाब दिया। बादशाह अकबर ने बीरबल की इस बात को सुनकर अपने दिल में रख लिया और किसी समय इसकी परख करने का निश्चय किया। दैवयोग से एक दिन एक हाथी पागल हो गया। ऐसे में हाथी को जंजीरों में जकड़ कर रखा जाता था। बादशाह अकबर ने बीरबल के आत्मविश्वास की परख करने के लिए उधर तो बीरबल को बुलवा भेजा और इधर हाथी के महावत को हुक्म दिया कि जैसे ही बीरबल को आता देखे, वैसे ही हाथी की जंजीर खोल दे। बीरबल को इस बात का पता नहीं था। जब वे बादशाह अकबर से मिलने उनके दरबार की ओर जा रहे थे, तो पागल हाथी को छोड़ा जा चुका था। बीरबल अपनी ही मस्ती में चले जा रहे थे कि उनकी नजर पागल हाथी पर पड़ी, जो चिंघाड़ता हुआ उनकी तरफ आ रहा था। बीरबल हाजिर जवाब, बेहद बुद्धिमान, चतुर और आत्मविश्वासी थे। वे समझ गए कि बादशाह अकबर ने आत्मविश्वास और बुद्ध...

अनमोल रत्न

  यूनान के महात्मा अफलातून ने मरते समय अपने बच्चों को बुलाया और कहा - मैं तुम्हें चार-चार रत्न देकर मरना चाहता हूं। आशा है, तुम इन्हें संभालकर रखोगे एवं इन रत्नों से अपना जीवन सुखी बनाओगे। पहला रत्न मैं 'क्षमा' का देता हूं - तुम्हारे प्रति कोई कुछ भी कहे, तुम उसे विस्मृत करते रहो व कभी उसके प्रतिकार का विचार अपने मन में न लाओ। निरहंकार का दूसरा रत्न देते हुए समझाया कि अपने द्वारा किए गए उपकार को भूल जाना चाहिए। तीसरा रत्न है- विश्वास, यह बात अपने हृदयपटल पर अंकित किए रखना कि मनुष्य के बूते कभी कुछ भला-बुरा नहीं होता, जो कुछ होता है वह सृष्टि के नियंता के विधान से होता है। चौथा रत्न है, वैराग्य- यह सदैव ध्यान में रखना कि एक दिन सबको मरना है। सांसारिक संपत्ति पाकर तो लोग न जाने क्या-क्या करते हैं, लेकिन इन चार रत्नों का अनुसरण कर वे बच्चे तो मानो निहाल ही हो गए।

INTRADAY TRADING SPECIAL

INTRADAY TRADING SPECIAL Dear Trader To become successful in day trading it is important to apply practical as well as mental rules which you will come to once you proceed ahead. The following are few very important techniques to be used to get success in day trading. 1. Understand the truth of day trading 2. How to generate profits in day trading 3. How to Avoid or at least reduce the losses. . How to safeguard/protect your capital 1. Understand the truth of day trading a) According to our experience day trading is not possible for everyone because not only practical approach but also some emotional factor plays very vital role in providing profits in day trading. So we generally we advice to do paper trading practise and if you get success then traders can proceed to do day trading with actual money. b) Day trading is not overnight quick rich scheme and most of the people come to stock market and especially to day trading to become rich in one night or to generate big profits in sing...