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मार्च 6, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

इसे नर्क का दरवाजा कहा जाता है, जानिए धरती पर नर्क का दरवाजा खुलने की एक खौफनाक हकीक

तुर्कमेनिस्तान के देरवेजे विलेज में 230 फीट गहरी खाई को यहां के लोगों ने 'जहन्नुम का रास्ता (डोर टू हेल)' नाम दिया है. 40 सालों (1971) से ही लगातार जलती इस खाई में ऊपर उठ रही आग की लपटें और उबलते हुए कीचड़ साफ देखे जा

सालों से ये रूहें अपनी मौत की वजह तलाश रही हैं....पढ़िए सैंकड़ों लोगों की मौत की दर्दनाक कहानी

घुप्प अंधेरा, रौशनी का कोई नामो निशान नहीं, ऐसे रास्तों पर एक-दो दिन तो दूर की बात है शायद आप 1-2 घंटे भी न चल पाएं. उनकी कैसी मजबूरी थी कि अपनी मर्जी से वे 3 महीने तक मीलों एक ऐसे ही रास्ते पर चलते रहे जहां रौशनी का एक कतरा भी नहीं था. कोई कैंडल, कोई दीया नहीं, 24 घंटे उनके लिए किसी अमावस्या की रात की तरह होते थे लेकिन चलना उनकी मजबूरी थी क्योंकि जो जिंदगी उन्हें मिली थी उसमें जीना इससे भी कहीं ज्यादा भयानक था. ये अंधेरे रास्ते ही दुनिया में एकमात्र रास्ता थे जो उन्हें इंसानों का जीवन दे सकता थे. वे कैसे चले यह तो सिर्फ वही बता सकते हैं लेकिन जहां-जहां लोगों ने उनकी मदद के लिए उन्हें रुकवाया, कहते हैं उनकी आत्माएं आज भी वहां रहती हैं. पकड़े जाने पर सजा के डर से कई गुलाम नहीं भी भागे लेकिन हर 5 में एक गुलाम ने आजादी पाने के लिए भागने का रास्ता अपनाया. इस तरह 5 लाख गुलाम सम्मिलित रूप से कनाडा या मैक्सिको भाग आए. यह 'अमेरिकन सिविल वार' से पहले की बात है जब यूएस में गुलामी प्रथा को मान्यता प्राप्त थी. वहां की सरकार राज्य विस्तार के लिए गुलामों को लड़ने या अन्य इस्तेमाल के लिए...