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जुलाई 13, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

व्रत रखना

व्रत रखना : वैसे कर्तव्य तो 10 हैं, लेकिन हिन्दू धर्म के 5 प्रमुख कर्तव्यों में शामिल है व्रत। व्रत को उपवास भी कह सकते हैं। सप्ताह में एक बार व्रत जरूर रखें। उस दिन किसी भी प्रकार का अन्न न खाएं। भूखे नहीं रह सकते हैं तो सिर्फ फलाहार ही लें और सुबह नींबू और धनिये का रस पीएं। व्रत का महीना 'श्रावण' माह क्यों, जानिए जानिए, कौन से व्रत और उपवास का क्या है लाभ... वर्ष में एक बार श्रावण माह में कठिन व्रतों का पालन करना चाहिए। श्रावण माह चतुर्मास का पहला माह होता है। इसमें के प्रत्येक दिन व्रत रखना जरूरी है। इससे जहां आपकी सेहत में सुधार होगा वहीं ईश्वर कृपा भी बनी रहेगी। जिस तरह मुसलमानों में रमजान माह में रोजा रहता है उसी तरह श्रावण माह में व्रत रहता है। व्रत का अर्थ सिर्फ भोजन पर प्रतिबंध ही नहीं : अतिभोजन, मांस एवं नशीली पदार्थों का सेवन नहीं करना ही व्रत नहीं होता बल्कि अवैध यौन संबंध, जुए आदि बुरे कार्यों से बचकर रहना, विवाह संस्कार का पालन करना, धार्मिक परंपरा के प्रति निष्ठा भी व्रत में शामिल है। इनका गंभीरता से पालन करना चाहिए अन्यथा एक दिन सारी आध्यात्मिक या सांसारिक ...

घर में रखें ये वस्तुएं और जीवन को सुखमय बनाएं

कपूर जलाना : प्रतिदिन सुबह और शाम घर में संध्यावंदन के समय कपूर जरूर जलाएं। हिन्दू धर्म में संध्यावंदन, आरती या प्रार्थना के बाद कर्पूर जलाकर उसकी आरती लेने की परंपरा है। पूजन, आरती आदि धार्मिक कार्यों में कर्पूर का विशेष महत्व बताया गया है। रात्रि में सोने से पूर्व कर्पूर जलाकर सोना तो और भी लाभदायक है। हिन्दू धर्म में 'कर्पूर' जलाना क्यों जरूरी? कर्पूरगौरम करुणावतारम संसारसारं भुजगेंद्रहारम। सदावसंतम हृदयारविन्दे भवम भवानी सहितं नमामि।। अर्थात : कर्पूर के समान चमकीले गौर वर्ण वाले, करुणा के साक्षात अवतार, इस असार संसार के एकमात्र सार, गले में भुजंग की माला डाले, भगवान शंकर जो माता भवानी के साथ भक्तों के हृदय कमलों में सदा सर्वदा बसे रहते हैं... हम उन देवाधिदेव की वंदना करते हैं।

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ये सामग्री रखें घर में : निम्नलितिख वस्तुओं में कुछ पूजन सामग्री है तो कुछ खाने योग्य वस्तुएं हैं जो सेहत को सही रखती है। इसके और भी फायदे हैं। हालांकि इन सभी वस्तुओं के महत्व और उपयोग को विस्तार से जानना चाहिए। यहां सिर्फ नाम भर लिखे जा रहे हैं। यज्ञोपवीत, अक्षत, मौली, अष्टगंध, दीपक, मधु, रुई, कपूर, धूपबत्ती, नारियल, लाल चंदन, केशर, कुश का आसन, मोटे कपड़े की दरी, इत्र की शीशी, कुंकू, मेहंदी, गंगाजल, खड़ी, हाथ का पंखा, सत्तू, पंचामृत, चरणामृत, स्वस्तिक, ॐ, हल्दी, हनुमान तस्वीर, गुढ़, लच्छा, बताशे, गन्ना, खोपरा, स्वच्छ दर्पण, तांबे का लोटा, बाल हरण, बड़ी इलाइची, ईसबगोल, शहद, मीठा सोडा, कलमी सोडा, चिरायता, नाव (औ‍षधी), नीम तेल, तिल्ली का तेल, एलोविरा, अश्वगंधा, आंवला, गिलोई, अखरोट, बादाम, काजू, किशमिश, चारोली, अंजीर, मक्का, खुबानी, पिस्ता, खारिक, मूंगफली, मुलहठी, बेल का रस, नीबू, अदरक, बादाम तेल, काजू का तेल, खसखस, चारोली का तेल, आदि। Sent from my Samsung Galaxy smartphone.

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शंख का महत्व : शंख समुद्र मंथन के समय प्राप्त 14 अनमोल रत्नों में से एक है। लक्ष्मी के साथ उत्पन्न होने के कारण इसे 'लक्ष्मी भ्राता' भी कहा जाता है। यही कारण है कि जिस घर में शंख होता है, वहां लक्ष्मी का वास होता है। घर में शंख जरूर रखें। शंख के कई उपयोग और महत्व है। शंख बजाने से जहां सेहत में लाभ मिलता है और घर का वातावरण शुद्ध होता है वहीं इसके घर में रखे रहने से आयुष्य प्राप्ति, लक्ष्मी प्राप्ति, पुत्र प्राप्ति, पितृ-दोष शांति, विवाह आदि की रुकावट भी दूर होती है। इसके अलावा शंख कई चमत्कारिक लाभ के लिए भी जाना जाता है। उच्च श्रेणी के श्रेष्ठ शंख कैलाश मानसरोवर, मालद्वीप, लक्षद्वीप, कोरामंडल द्वीप समूह, श्रीलंका एवं भारत में पाये जाते हैं।

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बांसुरी रखें घर में : बांस निर्मित बांसुरी भगवान श्रीकृष्ण को अतिप्रिय है। जिस घर में बांसुरी रखी होती है, वहां के लोगों में परस्पर प्रेम तो बना रहता है और साथ ही सुख-समृद्धि भी बनी रहती है। बांसुरी को आपकी उन्नति और प्रगति का सूचक बताया गया है। बांसुरी घर में मौजूद वास्तु दोष को भी दूर करता है। बांस से बनी बांसुरी की अहमियत काफी ज्यादा है। घर में प्रवेश करने वाले दरवाजे पर दो बांसुरी को क्रॉस करके लगाने से मुसीबतों से काफी हद तक पीछा छूट जाता है।

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मंगल कलश : सुख और समृद्धि के प्रतीक कलश का शाब्दिक अर्थ है- घड़ा। यह मंगल-कलश समुद्र मंथन का भी प्रतीक है। ईशान भूमि पर रोली, कुंकुम से अष्टदल कमल की आकृति बनाकर उस पर यह मंगल कलश रखा जाता है। एक कांस्य या ताम्र कलश में जल भरकर उसमें कुछ आम के पत्ते डालकर उसके मुख पर नारियल रखा होता है। कलश पर रोली, स्वस्तिक का चिह्न बनाकर, उसके गले पर मौली (नाड़ा) बांधी जाती है।

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हाथी : विष्‍णु तथा लक्ष्‍मी को हाथी प्रिय रहा है। शक्‍ति, समृद्धि और सत्ता के प्रतीक हाथी को भगवान गणेश का रूप माना जाता है। समुद्र मंथन में प्राप्‍त हुआ था ऐरावत हाथी, जो सफेद था। घर में ठोस चांदी या सोने का हाथी रखना चाहिए। ठोस चांदी के हाथी के घर में रखें होने से शांति रहती है और यह राहू के किसी भी प्रकार के बुरे प्रभाव को होने से रोकता है। कुछ लोग अपनी जेब में शुद्ध चांदी का एक छोटा सा हाथी रखते हैं इससे धन प्राप्ति में किसी भी प्रकार की रुकावट नहीं आती। सभी कार्यों में सफलता मिलती रहती है।

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पीली कौड़ी को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। कुछ सफेद कौड़ियों को केसर या हल्दी के घोल में भिगोकर उसे लाल कपड़े में बांधकर घर में स्थित तिजोरी में रखें। दो कौड़ियों को खुद की जेब में भी हमेशा रखें इससे धन लाभ होगा।

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गुलाब की लकड़ी : गुलाब की लकड़ी की गणेश, हनुमान या श्रीकृष्ण-राधा की सुंदर और छोटी-सी मूर्ति। ध्यान रहें कि मूर्ति सिर्फ एक ही हो। मूर्ति पूजा के लिए नहीं, यह घर की शोभा बढ़ाने के लिए हो। कदं‍ब की लकड़ी : अन्‍य सजावटी वस्‍तुएं, जो भी आप रखना चाहते हैं वह कदंब की लकड़ी की हो। जैसे हाथी, हंस, बुद्ध की मूर्ति, ऊपर लटकाने के लिए डलिया, टोकरी, घोड़ा, पानदान, गुलदस्ता आदि। उल्लेखनीय है कि यदि ठोस चांदी का हाथी बनाएं तो लकड़ी का न रखें। शीशम : बबूल, स्टील, प्लायवुड के सोफा सेट और पलंग से बेहतर शीशम की लकड़ी का सोफा और पलंग होता है। डाइनिंग सेट, साइन बोर्ड, कोनर्स, तिजोरियां, बक्से, अलमारियों से लेकर छोटे डिब्‍बे, ट्रे, पेन स्‍टैंड आदि सभी शीशम के होना चाहिए। सभी में सुंदर नक्‍काशी होना चाहिए। चंदन की लकड़ी : पूजा के लिए सिर्फ एक बट्टी या टुकड़ा। प्रतिदिन चंदन घिसते रहने से घर में सुगंध का वातावरण निर्मित होता है। सिर पर चंदन का तिलक लगाने से शांति मिलती है। जिस स्थान पर प्रतिदिन चंदन घीसा जाता है और गरूड़ घंटी की ध्वनि सुनाई देती है, वहां का वातावरण हमेशा शुद्ध और पवित्र बना रहता है।

घर में रखें ये वस्तुएं और जीवन को सुखमय बनाएं

घर में रखें ये वस्तुएं और जीवन को सुखमय बनाएं बर्तनों पर ध्यान दें : सेहतमंद खाना पकाने के लिए आप तेल-मसालों पर तो पूरा ध्यान देते हैं लेकिन क्या आप खाना पकाने के लिए बर्तनों पर ध्यान देते हैं? आज से ही इस बात पर भी ध्यान देना शुरू कर दें क्योंकि आप जिस धातु के बर्तन में खाना पकाते हैं उसके गुण भोजन में स्वत: ही आ जाते हैं। खाना किसमें पकाएं? कास्ट लोहे के बर्तन खाना पकाने के लिए सबसे सही पात्र माने जाते हैं। शोधकर्ताओं की माने तो लोहे के बर्तन में खाना बनाने से भोजन में आयरन जैसे जरूरी पोषक तत्व बढ़ जाते हैं। खाना किस में खाएं? पीतल के बर्तन में भोजन करना, तांबे के बर्तन में पानी पीना अत्यंत ही लाभकारी होता है। हालांकि बाल्टी और बटलोई पीतल की होना चाहिए। एक तांबे का घड़ा भी रखें। इसके अलावा घर में पीतल और तांबे के प्रभाव से सकारात्मक और शांतिमय ऊर्जा का निर्माण होता है। ध्यान रहे कि तांबे के बर्तन में खाना वर्जित है। हालांकि आजकल स्टेनलेस स्टील बर्तन में खाने का प्रचलन बढ़ गया है। यह भी साफसुधरे और फायदेमंद रहते हैं। स्टेनलेस स्टील एक मिश्रित धातु है, जो लोहे में कार्बन, क्रोमियम औ...