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नवंबर 13, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

jai mata di

ऐसे करें आराधना शास्त्रों में मां दुर्गा के 108 नाम बताए गए हैं। ऐसी मान्यता है कि नवरात्र में प्रतिदिन सभी 108 नामों का उच्चारण करने से आपकी सभी इच्छाएं पूरी होती है। इसके लिए नवरात्र में प्रतिदिन स्नान करने के बाद शुद्ध आसन पर बैठकर मां दुर्गा के इन सभी नामों का स्मरण करें और बाद में आरती कर मौजूद भक्तनों में प्रसाद वितरित करें 1. सती : अग्नि में जल कर भी जीवित होने वाली 2. साध्वी : आशावादी 3. भवप्रीता : भगवान शिव पर प्रीति रखने वाली 4. भवानी : ब्रह्मांड में निवास करने वाली 5. भवमोचनी : संसारिक बंधनों से मुक्त करने वाली 6. आर्या : देवी 7. दुर्गा : अपराजेय 8. जया : विजयी 9. आद्य : शुरुआत की वास्तविकता 10. त्रिनेत्र : तीन आंखों वाली 11. शूलधारिणी : शूल धारण करने वाली 12. पिनाकधारिणी : शिव का त्रिशूल धारण करने वाली 13. चित्रा : सुरम्य, सुंदर 14. चण्डघण्टा : प्रचण्ड स्वर से घण्टा नाद करने वाली, घंटे की आवाज निकालने वाली 15. सुधा : अमृत की देवी 16. मन : मनन-शक्ति 17. बुद्धि : सर्वज्ञाता 18. अहंकारा : अभिमान करने वाली 19. चित्तरूपा : वह जो सोच की अवस्था में है 20. चिता : मृत्युशय्या 21. ...

jai mata di

साधारत: 51 शक्ति पीठ माने जाते हैं। तंत्रचूड़ामणि में लगभग 52 शक्ति पीठों के बारे में बताया गया है। प्रस्तुत है तंत्रचूड़ामणि की तालिका। 1.हिंगलाज हिंगुला या हिंगलाज शक्तिपीठ जो कराची से 125 किमी उत्तर पूर्व में स्थित है, जहाँ माता का ब्रह्मरंध (सिर) गिरा था। इसकी शक्ति- कोटरी (भैरवी-कोट्टवीशा) है और भैरव को भीमलोचन कहते हैं। 2.शर्कररे (करवीर) पाकिस्तान में कराची के सुक्कर स्टेशन के निकट स्थित है शर्कररे शक्तिपीठ, जहाँ माता की आँख गिरी थी। इसकी शक्ति- महिषासुरमर्दिनी और भैरव को क्रोधिश कहते हैं। 3.सुगंधा- सुनंदा बांग्लादेश के शिकारपुर में बरिसल से 20 किमी दूर सोंध नदी के किनारे स्थित है माँ सुगंध, जहाँ माता की नासिका गिरी थी। इसकी शक्ति है सुनंदा और भैरव को त्र्यंबक कहते हैं। 4.कश्मीर- महामाया भारत के कश्मीर में पहलगाँव के निकट माता का कंठ गिरा था। इसकी शक्ति है महामाया और भैरव को त्रिसंध्येश्वर कहते हैं। 5.ज्वालामुखी- सिद्धिदा (अंबिका) भारत के हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में माता की जीभ गिरी थी, उसे ज्वालाजी स्थान कहते हैं। इसकी शक्ति है सिद्धिदा (अंबिका) और भैरव को उन्मत्त कहते हैं। 6.ज...

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एक बार एक शिष्य ने अपने गुरू से पूछा की गुरूदेव ! सत्संग सुनने इतने लोग आते हैं, क्या सभी लोग प्रभु के दर्शन कर पाते है ? गुरूने मुस्कराकर कहा, एक जमीन होती वहाँ कुछ भी नही उगता. दुसरी जमीन जहॉ घास तो उघती है मगर सुखकर जल जाती है. और तीसरी जमीन खेती कहते है, वहॉ जो उगाओ वही पैदा होता है. लेकीन उसके लिये वक्त पर पानी और धूप की जरूरत होती है. ठीक इसी तरह जो पर्मारथ की राह पे नही चलते वो बंजर जमीन की तरह है. जो सत्संग मे आते तो है मगर ध्यान नही देते वो अमल नही करते हैं, वो सुखी घास की तरह हैं पैदा तो होती है मगर किसी काम की नही। जो सत्संग मे आते है अपने जीवन मे अमल करते है और प्रभु के गुणगान गाते है, वो खेती की तरह जो उगाओ पैदा होता है। वही इंसान प्रभु के दर्शन कर सकता है।