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फ़रवरी 21, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

SAFALTA KI RAH:मेरी ताकत

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SAFALTA KI RAH:भगवान पर यकीन बनाए रखना..ऐसा आपके साथ भी हो सकता है

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मेरी ताकत

: जापान  के  एक  छोटे  से  कसबे में  रहने  वाले  दस  वर्षीय  ओकायो  को  जूडो  सीखने  का  बहुत  शौक  था . पर  बचपन  में  हुई  एक  दुर्घटना  में  बायाँ  हाथ  कट  जाने  के  कारण  उसके  माता -पिता  उसे  जूडो सीखने  की  आज्ञा  नहीं  देते  थे . पर  अब  वो  बड़ा  हो  रहा  था  और  उसकी  जिद्द  भी  बढती  जा  रही  थी . अंततः  माता -पिता  को  झुकना  ही  पड़ा  और  वो  ओकायो  को  नजदीकी  शहर  के  एक  मशहूर मार्शल आर्ट्स   गुरु  के  यहाँ  दाखिला  दिलाने ले  गए . गुरु  ने  जब  ओकायो  को  देखा  तो  उन्हें  अचरज  हुआ   कि ,  बिना  बाएँ  हाथ  का  यह  लड़का  भला   जूडो   क्यों  सीखना  चाहता   है ? उन्होंने  पूछा , " तुम्हारा  तो  बायाँ   हाथ  ही  नहीं  है  तो  भला  तुम  और  लड़कों  का  मुकाबला  कैसे  करोगे ." " ये  बताना  तो  आपका  काम  है" ,ओकायो  ने  कहा . मैं  तो  बस  इतना  जानता  हूँ  कि  मुझे  सभी  को  हराना  है  और  एक  दिन  खुद  "सेंसेई" (मास्टर) बनना  है " गुरु  उसकी  सीखने  की  दृढ  इच्छा  शक्ति  से  काफी  प्रभावित  हुए  और  बोले , " ठीक  है...

शिव को ब्रह्मा का नाम क्यों चाहिए था ? जानिए अद्भुत अध्यात्मिक सच्चाई

« हिंदू धर्म में 18 पुराण हैं. सभी पुराण हिंदू भगवानों की कहानियां बताते हैं. कुछ समान बातों के अलावे सभी कुछ हद तक अलग-अलग कहानियां बयां करते हैं. इसमें त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) के जन्म के साथ ही देवताओं की भी कहानियां सम्मिलित हैं. वेदों में भगवान को निराकार रूप बताया है जबकि पुराणों में त्रिदेव सहित सभी देवों के रूप का उल्लेख होने के साथ ही उनके जन्म की कहानियां भी हैं.  भगवान शिव को 'संहारक' और 'नव का निर्माण' कारक माना गया है. अलग-अलग पुराणों में भगवान शिव और विष्णु के जन्म के विषय में कई कथाएं प्रचलित हैं. शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव को स्वयंभू (सेल्फ बॉर्न) माना गया है जबकि विष्णु पुराण के अनुसार भगवान विष्णु स्वयंभू हैं. शिव पुराण के अनुसार एक बार जब भगवान शिव अपने टखने पर अमृत मल रहे थे तब उससे भगवान विष्णु पैदा हुए जबकि विष्णु पुराण के अनुसार ब्रह्मा भगवान विष्णु की नाभि कमल से पैदा हुए जबकि शिव भगवान विष्णु के माथे के तेज से उत्पन्न हुए बताए गए हैं. विष्णु पुराण के अनुसार माथे के तेज से उत्पन्न होने के कारण ही शिव हमेशा योगमुद्रा में रहते है...

भगवान पर यकीन बनाए रखना..ऐसा आपके साथ भी हो सकता है

आपने वह सुना होगा 'जाको राखे साईयां, मार सके न कोई'. कभी-कभी कुछ चमत्कारिक सी घटनाएं हो जाती हैं जिनपर यकीन करना थोड़ा मुश्किल होता है. पर सच तो हमेशा सच ही होता है. कभी-कभी ये चमत्कार ही भगवान के अस्तित्व पर यकीन बनाए रखता है. इस परिवार के साथ जो हुआ वह इतना भयावह था कि जीने की उम्मीद ही नहीं थी लेकिन कहीं न कहीं यह 'जाको राखे साईयां...' काम करता है और इसमें भी कुछ ऐसा ही हुआ. कई घंटों तक बर्फ के नीचे दबे रहने के बाद किसी के भी जीवित रहने की आशा करना व्यर्थ ही है. क्योंकि बर्फ शरीर को पूरी तरह सुन्न कर देती है इसीलिए एक बार बर्फ की चादर तले दबने के बाद जीवित निकलने की संभावना बहुत ही कम रह जाती है. लेकिन मनुष्य की नियति को पहले ही भांप लेना वाकई एक बहुत ही मुश्किल काम है. अमेरिका का एक परिवार ऐसे ही एक कुदरती करिश्मे का एक जीता-जागता उदाहरण है. डेविड हिगिंस अपनी पत्नी और पांच वर्षीय बेटी के साथ एक हाई-वे से गुजर रहे थे तभी वहां बर्फ पड़ने लग गई. उनकी कार पूरी तरह बर्फ में धंस गई. पहले उन्हें लगा कि बर्फ ज्यादा गहरी नहीं है लेकिन जैसे ही वह आगे बढ़े उनकी गाड़ी चार फीट ...

चाणक्य ने बताया था किसी को भी हिप्नोटाइज करने का यह आसान तरीका, पढ़िए और लोगों को वश में कीजिए

कहीं भी, कभी भी बिना किसी मंत्र के किसी को भी हिप्नोटाइज किया जा सकता है. यह हिप्नोटिज्म पर्सन टू पर्सन, उसके नेचर (स्वभाव) के अनुसार बदल भी सकता है लेकिन अक्सर हिप्नोटिज्म का यह कलयुगी तरीका काम कर जाता है. हालांकि आप जानकर हैरान होंगे कि यह आधुनिक युग की देन नहीं है बल्कि कई शताब्दियों पहले ही इसकी खोज की जा चुकी थी. हां, यह और बात है कि आज यह हिप्नोटिज्म कुछ अधिक ही कारगर है और शायद बहुत कम लोग होंगे जिन पर यह काम नहीं करता.  चाणक्य नीति तो सुनी होगी आपने. राजनीति में चाणक्य नीति हमेशा माननीय रही है. जानकर हैरानी होगी कि ज्योतिष से कोई नाता न होते हुए भी बिना मंत्र किसी को भी हिप्नोटाइज करने का यह आसान तरीका चाणक्य ने ही बताया है जो आज कई जगह धड़ल्ले से प्रयोग भी हो रहा है. न मंत्र, न खास जगह, फिर भी हो जाता है इंसान हिप्नोटाइज चाणक्य नीति में इंसानों के स्वभाव पर बहुत गूढ़ बातें कही गई हैं. इसी के विस्तारण में चाणक्य ने इंसानी स्वभाव के अनुसार उसे आसानी से हिप्नोटाइज कर सकने की बात कही है. इसके अनुसार लोभी, पाखंडी, लालची, धनी, मूर्ख, दानी, बुद्धिमान जैसे अलग-अलग स्वभावों व...