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अगस्त 12, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

दो दुकानदार आपस में बातचीत करते हुए..

पहला- तुम कैसे जान पाते हो कि माल लेने वाले ग्राहक पति-पत्नी हैं या प्रेमी-प्रेमिका ? दूसरा - यदि चुपचाप खरीदारी करें तो समझो प्रेमी-प्रेमिका हैं और यदि केवल मोल-तोल करते हुए आपस में झगडें तो समझ लो कि पति-पत्नी हैं!

भाषा सिखाने वाली पापुलर मोबाइल एप्लिकेशन ड्यूओलिंगो (Duolingo)

apps ड्यूओलिंगो (Duolingo) भाषा सिखाने वाली पापुलर मोबाइल एप्लिकेशन ड्यूओलिंगो (Duolingo) को अब भारतीय स्मार्टफोन यूजर्स के लिए भी लॉन्च ‌कर दिया गया है। एंड्रॉयड और आईओएस ऐप स्टोर ड्यूओलिंगो को फ्री डाउनलोड करके अपने फोन में इस्तेमाल कर सकते हैं। इस ऐप की खास बात ये है कि अब इसमें हिंदी भाषी लोगों को इंग्लिश सीख का मौका भी मिलेगा। विदेशों में ये ऐप काफी लोकप्रिय ऐप में से है। एंड्रॉयड ऐप स्टोर से इस ऐप को एक करोड़ से ज्यादा यूजर्स डाउनलोड कर चुके हैं। इसमें स्पेनिश, फ्रेंच, जर्मन और इटेलियन भाषाओं सहित 22 अन्य भाषाओं के विकल्प मौजूद हैं। जिसमें अब आप हिंदी से अंग्रेजी भाषा भी सीख सकते हैं। एंड्रॉयड 2.4 या इससे अधिक वर्जन के यूजर्स इस ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं। आईओएस 4 या इससे अधिक वर्जन के यूजर्स इसको इस्तेमाल कर सकते हैं। यह ऐप पहली बार 2012 में आया था। इसने कई अवॉर्ड जीते हैं। इसे 2013 में 'गूगल प्ले के बेस्ट ऑफ द बेस्ट' और 'ऐपल का 2013 ऐप ऑफ द इयर' अवॉर्ड मिला।

गर्भावस्था में नुकसानदायक

सिर्फ फायदों से नहीं भरा है करेला, जानें इसके 5 नुकसान side effects of bitter gourd2 गर्भावस्था में नुकसानदायक करेले के रस में मोमोकैरिन नामक तत्व होता है जो पीर‌ियड्स का फ्लो बढ़ा देता है। गर्भावस्था के दौरान इसका अधिक सेवन गर्भपात का कारण हो सकता है। कई बार यह गर्भावस्था के दौरान पीरियड्स की स्थिति भी पैदा कर सकता है। करेले में एंटी लैक्टोलन तत्व भी हैं जो गर्भावस्था के दौरान दूध बनने की प्रक्रिया में बाधा डालते हैं।

side effects of bitter gourd4 लिवर व क‌िडनी संबंधी रोग में नुकसानदायक

लिवर व किडनी के मरीजों के लिए के लिए इसका अत्याधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है। यह लिवर में एन्जाइम्स का निर्माण बढ़ा देता है जिससे लिवर प्रभावित होता है। करेले का बीज में लेक्टिन नामक तत्व है जो आंतों तक प्रोटीन के संचार को रोक सकता है।

क्यों जरूरी है तकिया बदलना?

शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन के आधार पर माना है कि तकिया पर जमने वाली धूल, तेल, मृत कोशिकाएं शरीर के लिए एलर्जी, मुंहासे, दमा व त्वचा संबंधी समस्याओं का खतरा पैदा करते हैं। शोध के दौरान 2,200 पुरुषों और महिलाओं पर अध्ययन किया गया और पाया गया कि 82 प्रतिशत प्रत‌िभाग‌ियों को जानकारी नहीं है कि उन्हें तकिया कब बदलना चाहिए।