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फ़रवरी 24, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

SAFALTA KI RAH: JARA HANS LO YAAR

SAFALTA KI RAH: JARA HANS LO YAAR : एक तरैया देखी जब पांच ब्राहान न्योते तब अरसराम, परसराम तुलसी, गंगा, सालगराम! अरसराम खाएँ अरसे तक परसराम खाएँ परसे तक तुलसी, तुलस...

अच्छे काम का पुरस्कार :

एक बूढ़ा रास्ते से कठिनता से चला जा रहा था। उस समय हवा बड़े जोरों से चल रही थी। अचानक उस बूढ़े की टोपी हवा से उड़ गई। उसके पास होकर दो लड़के स्कूल जा रहे थे। उनसे बूढ़े ने कहा- मेरी टोपी उड़ गई है, उसे पकड़ो। नहीं तो मैं बिना टोपी का हो जाऊंगा। वे लड़के उसकी बात पर ध्यान न देकर टोपी के उड़ने का मजा लेते हुए हंसने लगे। इतने में लीला नाम की एक लड़की, जो स्कूल में पढ़ती थी, उसी रास्ते पर आ पहुंची। उसने तुरंत ही दौड़कर वह टोपी पकड़ ली और अपने कपड़े से धूल झाड़कर तथा पोंछकर उस बूढ़े को दे दी। उसके बाद वे सब लड़के स्कूल चले गए। गुरुजी ने टोपी वाली यह घटना स्कूल की खिड़की से देखी थी। इसलिए पढ़ाई के बाद उन्होंने सब विद्यार्थियों के सामने वह टोपी वाली बात कही और लीला के काम की प्रशंसा की तथा उन दोनों लड़कों के व्यवहार पर उन्हें बहुत धिक्कारा। इसके बाद गुरुजी ने अपने पास से एक सुंदर चित्रों की पुस्तक उस छोटी लड़की को भेंट दी और उस पर इस प्रकार लिख दिया- लीला बहन को उसके अच्छे काम के लिए गुरुजी की ओर से यह पुस्तक भेंट की गई है। जो लड़के गरीब की टोपी उड़ती देखकर हंसे थे, वे इस घटना का देखकर बहुत लज्जित F...

धरती पर आकाश बिछेगा

गुस्से के मारे सारे के सारे आसमान के तारे टूट पड़े धरती के ऊपर झर-झर-झर-झर अगर तो बतलाओ क्या होगा? धरती पर आकाश बिछेगा किरणों से हर कदम सिंचेगा चंदा तक चढ़ने का मतलब नहीं बचेगा रूस बढ़ा या अमरीका बढ़ने का मतलब नहीं बचेगा| मगर एक मुश्किल आऐगी कब जाएगी रात और दिन कब आएगा? कब मुर्गा बोलेगा कब सूरज आएगा कब बाज़ार भरेगा कब हम जाएँगे सोने कब जाएँगे लोग, बढ़ेंगे कब किसान बोने कब मां हमें उठाएगी मूंह हाथ धुलेगा जल्दी जल्दी भागेंगे हम यों कि अभी स्कूल खुलेगा? नाहक हैं सारे सवाल ये हम सब चौबीसों घंटों जागेंगे कूदेंगे खेलेंगे हर तारे से बात करेंगे! मगर दूसरे लोग- बात उनकी क्या सोचें उनसे कुछ भी नहीं बना तो पापड़ बेलेंगे! -भवानीप्रसाद मिश्र FROM SAFALTA KI RAAH

JARA HANS LO YAAR

-एक नौकरानी ने अपनी मालकिन से तनख्वाह बढ़ाने के लिए कहा! मालकिन ने पूछा, तुम्हारी तनख्वाह क्यों बढ़ाई जाये? तुम इस लायक नहीं हो! नौकरानी ने कहा मालकिन इसके तीन कारण है, मैं कपड़ों को इस्तरी बहुत अच्छा करती हूँ! मालकिन ने पूछा, ये तुमसे किसने कह दिया की तुम इस्तरी बहुत अच्छा करती हो? आपके पति ने मालकिन, नौकरानी ने कहा! दूसरा कारण यह की मैं आप से बेहतर खाना पकाती हूँ! बेवकूफ, ये तुमसे किसने कह दिया की तुम मुझसे बेहतर खाना पकाती हो? आपके पति ने मालकिन! और तीसरा कारण यह है कि, मैं आपसे बेहतर प्यार करना जानती हूँ! क्या ये भी तुमसे मेरे पति ने ही कहा,घर की मालकिन ने पूछा? नहीं ये ड्राईवर ने कहा! मालकिन ने अगले दिन ही उसकी तनख्वाह दोगुनी कर FROM SAFALTA KI RAAH

JARA HANS LO YAAR

-एक दिन संसद के मध्य सत्र में एक सांसद जो अपने गुस्से और सनकीपन के लिए मशहूर था, बहुत ही गुस्से में जोर-जोर से चिल्लाने लगा, इस सदन में बैठे आधे नेता डरपोक और भ्रष्टाचारी है! सदन में बैठे अन्य नेतागण जोर से चिल्लाने लगे या तो ये महोदय अपनी स्टेटमेंट वापिस ले या फिर इन्हें बचे हुए सत्र से बर्खास्त कर बाहर भेज दिया जाये! थोड़ी देर के लिए सदन में बिल्कुल सन्नाटा छा गया! फिर वह सांसद बोला ठीक है, मैं अपने शब्द वापिस लेते हुए कहता हूँ कि इस सदन में बैठे आधे नेता न तो डरपोक है और न ही भ्रष्टाचारी है! FROM SAFALTA KI RAAH

JARA HANS LO YAAR

-एक लड़का गली में भागता हुआ आया और इधर उधर पुलिस को ढूंढने लगा! उसे एक पुलिस वाला नजर आया उसने कहा सर प्लीज जल्दी मेरे साथ बार में चलिए वहां मेरे पापा का झगड़ा हो रहा है! ठीक है! वे जल्दी से बार में पहुँच गए और वहां देखा तो तीन आदमी बुरी तरह से आपस में लड़ रहे थे! कुछ देर बाद पुलिस वाला उस बच्चे की तरफ मुड़ा और पूछा की इनमें तुम्हारे पापा कौन से है! बच्चे ने पुलिस वाले की तरफ देखा और कहा मैं नहीं जानता सर, इसी बात को लेकर तो इनमें झगड़ा हो रहा है!

JARA HANS LO YAAR

एक तरैया देखी जब पांच ब्राहान न्योते तब अरसराम, परसराम तुलसी, गंगा, सालगराम! अरसराम खाएँ अरसे तक परसराम खाएँ परसे तक तुलसी, तुलसीदल पर रहे गंगा, गंगाजल पर रहे! मगर अनूठे सालगराम रहें ताकते सबके काम इसका खाना उसका पीना यही बन गया उसका जीना पांच पांच भी सस्ते पड़े पुन्न सहज मिल गए बड़े| -भवानीप्रसाद मिश्र

JARA HANS LO YAAR

रात को या दिन को अकेले में या मेले में हम सब गुनगुनाते रहें क्योंकि गुनगुनाते रहे हैं भौंरे गुनगुना रही हैं मधुमक्खियाँ नीम के फूलों को चूसने की धुन में और नीम के फूल भी महक रहे हैं छोटे बड़े सारे पंछी चहक रहे हैं| क्या हम कम हैं इनसे अपने मन की धुन में या रूप में या गुन में सन गाएँ सब गुनगुनाएँ झूमे नाचे आसमान सिर पर उठाएँ! -भवानीप्रसाद मिश्र

अमीरों को ढेर सारे दोस्त मिल जाते हैं-रहीम दर्शन पर आधारित चिंत्तन लेख

            एक तरफ कुछ लोगों के पास एकदम सहजता से धन आ रहा है तो दूसरी तरफ अधिकतर लोग भारी परिश्रम के बाद भी वैसी सफलता हासिल नहीं कर पा रहे जिसकी वह अपेक्षा करते हैं। विश्व में राज्य से मुक्त अर्थव्यवस्था ने समाज में अनेक प्रकार के विरोधाभास पैदा किये हैं। कृषि, लघु उद्योग तथा व्यापार में लगे लोगों की संख्या कम होती जा रही है। अधिकतर लोग नौकरियों के लिये कंपनियों की तरफ दौड़े जा रहे हैं। एक तरह से मध्यम वर्ग का दायरा सिमट रहा है। समाज में अधिक अमीरों की संख्या नगण्य मात्रा  जबकि गरीबों की संख्या गुणात्मक रूप से बढ़ रही है।  इन दोनों के बीच सामंजस्य स्थापित करने वाला मध्यम वर्ग जहां संख्यात्मक दृष्टि से सिमटा है वहीं उसका आत्मविश्वास भी कम हुआ है।  वह गरीब कहलाना नहीं चाहता और अमीर बन नहीं पाता।  इतना ही नहीं अपने अस्तित्व के लिय संघर्ष कर रहे लोगों से यह अपेक्षा भी नहीं की जा सकती कि वह समाज में सामंजस्य का वातावरण बनाये।       भौतिकवाद के चक्कर मे फंसा समाज हार्दिक प्रेम, निष्प्रयोजन मित्रता तथा आदर्श व्यवहार के भाव से परे होता जा रहा है।  देखा जाये तो हमारे देश में जिस तरह धनिको...

कहत कबीर फकीर पुकारी, जग उल्टा व्यवहार ।। निरंजन धन तुम्हरो दरबार ।

निरंजन धन तुम्हरो दरबार । जहाँ न तनिक न्याय विचार ।। रंगमहल में बसें मसखरे, पास तेरे सरदार । धूर-धूप में साधो विराजें, होये भवनिधि पार ।। वेश्या ओढे़ खासा मखमल, गल मोतिन का हार । पतिव्रता को मिले न खादी सूखा ग्रास अहार ।। पाखंडी को जग में आदर, सन्त को कहें लबार । अज्ञानी को परम‌ ब्रहम ज्ञानी को मूढ़ गंवार ।। साँच कहे जग मारन धावे, झूठन को इतबार । कहत कबीर फकीर पुकारी, जग उल्टा व्यवहार ।। निरंजन धन तुम्हरो दरबार । -कबीर

-पत्नी (पति से)- देखो जी

-पत्नी (पति से)- देखो जी, हमारी शांताबाई का पति, उसको खुश रखने के लिए, हर हफ्ते फिल्म दिखाने ले जाता है, आप क्यों नही ले जाते? पति (पत्नी से)- अरे, मैंने भी शांताबाई को फिल्म के लिए बुलाया, लेकिन उसने मना कर दिया, इसमें मेरी क्या गलती है? -पति पत्नी और वो -पत्नी (पति से)- मुझे 50 रुपये की जरूरत है! पति (गुस्से से)- तुम्हें रुपये से ज्यादा अक्ल की जरूरत है! पत्नी- आपसे वही चीज मांगी है, जो आपके पास है! -पति पत्नी और वो - -पत्नी (पति से)- तुम्हें नही लगता की जरा सी समझदाराी से लाखों तलाक के मामले रोके जा सकते हैं। पति (पत्नी से)- जरा सी समझदारी से शादियां भी तो रोकी जा सकती है। -पति पत्नी और वो -मरते समय पति ने अपनी पत्नी को सब कुछ सच बताना चाहा। उसने कहा- मैं तुम्हें जीवन भर धोखा देता रहा। सच तो यह है कि दर्जनों औरतों से मेरे संबंध रहे हैं। पत्नी (पति से)- मैं भी सच बताना चाहूंगी। तुम बीमारी से नही मर रहे मैंने तुम्हें धीरे-धीरे असर करने वाला जहर दिया है। -पति पत्नी और वो -एक घर में चोर घुस गया, पति-पत्नी ने मिलकर चोर को पकड़ लिया। पत्नी जो बहुत ही मोटी थ...

पहली बार म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले निवेशकों को

पहली बार म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले निवेशकों को अधूरी जानकारी होती है और ज्यादातर वे निवेश की परिस्थितियों में आने वाली अनिश्चितताओं से प्रभावित हो जाते हैं। लेकिन म्यूचुअल फंड निवेश में बाजार के समय से भी अधिक महत्वपूर्ण बातें हैं जो ध्यान रखनी चाहिये। सबसे पहले ध्यान रखे एक महत्वाकांक्षी यूनिट धारक को सबसे पहले ये तय करना चाहिये कि वो किस तरह के पोर्टफोलियो (निवेश सूची) का निर्माण करना चाहता है। दूसरे शब्दों में उसे अपनी सम्पत्ति के सही विनियोजन का फैसला करना चाहिये।ये ऐसेट एलोकेशन (asset allocation) कहलाता है। ऐसेट एलोकेशन वो तरीका है जो ये निर्धारित करता है कि आप अपने पैसे को विभिन्न निवेशों में कैसे लगायें जिसमें सम्पत्ति के सभी वर्गों का उचित मिश्रण हो। ऐसेट एलोकेशन के लोकप्रिय नियम कहते हैं कि निवेशक की जो भी उम्र हो,उसे अपने पोर्टफोलियो में अपनी उम्र जितना धन प्रतिशत रखना चाहिये। उदाहरण के लिये- यदि निवेशक की उम्र 25 साल है तो उसे अपने निवेश का 25% ऋण (debt instrument) में और शेष इक्विटी में लगाना चाहिये। हालांकि वास्तविकता में, प्रत्येक व्यक्ति की विभिन्न परिस्...

इस 2015 बजट में आम लोगों को

इस बजट में आम लोगों को 80(सी) के अलावा टैक्स बचाने के दूसरे ऑप्शन भी मिल सकते हैं। साथ ही 25,000-50,000 तक के निवेश के नए विकल्प आ सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक बजट में टैक्स स्लैब की समीक्षा संभव है और टैक्स बेस बढ़ाने के लिए 3 के बदले 4 टैक्स स्लैब बनाए जा सकते हैं। इस बजट से आंत्रप्रेन्योर की मांग है कि बिजनेस से जुड़े कागजी काम कम किए जाएं। अलग-अलग टैक्स के बदले सिंगल टैक्स सिस्टम हो। बिजनेस बढ़ाने के लिए सस्ता कर्ज मिले। आंत्रप्रेन्योर्स के लिए अगल से फंड बनाया जाए। गृहिणियां चाहती हैं शॉर्ट टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी का रिटर्न टैक्स फ्री हो। इंश्योरेंस के कुछ प्रोडक्ट को भी निवेश का अहम जरिया माना जाए। छोटे निवेशकों की मांग है कि प्रॉपर्टी में निवेश को बढ़ावा दिया जाए। छोटे निवेशकों को बढ़ावा देने के लिए आरईआईटीएस को लागू किया जाए। फिलहाल आरईआईटीएस के तहत 2 लाख रुपये का निवेश किया जा सकता है। बुजुर्गों की मांग है कि पोस्ट ऑफिस सेविंग स्कीम और एफडी के अलावा भी निवेश के ऑप्शन हों। और 10 साल के टैक्स फ्री सीनियर सिटीजन बॉन्ड लॉन्च किए जाएं। बॉन्ड पर 12 फीसदी का ब्याज हो और एक साल के ब...