1.हिन्दी कविता : हमने जग की अजब तस्वीर देखी deshpriya6.freeclassifiedads@blogger.com हमने जग की अजब तस्वीर देखी एक हँसता है दस रोते हैं ये प्रभु की अद्भुत जागीर देखी एक हँसता है दस रोते हैं हमे हँसते मुखड़े चार मिले दुखियारे चेहरे हज़ार मिले यहाँ सुख से सौ गुनी पीड़ देखी एक हँसता है दस रोते हैं हमने जग की अजब तस्वीर देखी एक हँसता है दस रोते हैं दो एक सुखी यहाँ लाखों में आंसू है करोड़ों आँखों में हमने गिन गिन हर तकदीर देखी एक हँसता है दस रोते हैं हमने जग की अजब तस्वीर देखी एक हँसता है दस रोते हैं कुछ बोल प्रभु ये क्या माया तेरा खेल समझ में ना आया हमने देखे महल रे कुटीर देखी एक हँसता है दस रोते हैं हमने जग की अजब तस्वीर देखी एक हँसता है दस रोते हैं - प्रदीप 2. हिन्दी कविता : देख तेरे संसार की हालत देख तेरे संसार की हालत क्या हो गयी भगवान् कितना बदल गया इंसान कितना बदल गया इंसान सूरज न बदला चाँद न बदला न बदला रे आसमान कितना बदल गया इंसान कितना बदल गया इंसान राम के भक्त रहीम के बन्दे रचते आज फरेब के फंदे कितने ये मक्कार ये अ...
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