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जुलाई 15, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Hum ne jag ki ajib tasbir dekhi...

1.हिन्दी  कविता : हमने जग की अजब तस्वीर देखी deshpriya6.freeclassifiedads@blogger.com हमने जग की अजब तस्वीर देखी एक हँसता है दस रोते हैं ये प्रभु की अद्भुत जागीर देखी एक हँसता है दस रोते हैं हमे हँसते मुखड़े चार मिले दुखियारे चेहरे हज़ार मिले यहाँ सुख से सौ गुनी पीड़ देखी एक हँसता है दस रोते हैं हमने जग की अजब तस्वीर देखी एक हँसता है दस रोते हैं दो एक सुखी यहाँ लाखों में आंसू है करोड़ों आँखों में हमने गिन गिन हर तकदीर देखी एक हँसता है दस रोते हैं हमने जग की अजब तस्वीर देखी एक हँसता है दस रोते हैं कुछ बोल प्रभु ये क्या माया तेरा खेल समझ में ना आया हमने देखे महल रे कुटीर देखी एक हँसता है दस रोते हैं हमने जग की अजब तस्वीर देखी एक हँसता है दस रोते हैं - प्रदीप 2. हिन्दी  कविता : देख तेरे संसार की हालत देख तेरे संसार की हालत क्या हो गयी भगवान् कितना बदल गया इंसान कितना बदल गया इंसान सूरज न बदला चाँद न बदला न बदला रे आसमान कितना बदल गया इंसान कितना बदल गया इंसान राम के भक्त रहीम के बन्दे रचते आज फरेब के फंदे कितने ये मक्कार ये अ...

Knowledge

चिंतन का महत्त्व गतांक से आगे पाप क्राईम को ही नहीं कहते। पाप उन्हें भी कहते हैं, जो कि जीवन को अस्त-व्यस्त बनाकर रखें, चोरी, डकैती, हत्या वगैरह ये तो बुरे कर्म हैं ही, लेकिन ये भी कम बुरा कर्म नहीं है किआप आलस्य और प्रमाद में ही समय काट डालें। आप अपने स्वभाव को गुस्सेबाज बनाकर रखें, ईर्ष्या किया करें, चिंतन और मनन को अस्त-व्यस्त बनाकर रखें। ये भी कोई ढंग है। ये क्या है, ये भी गलतियाँ हैं। व्यक्तिगत जीवन में आपको गुण, कर्म, स्वभाव संबंधी गलतियाँ क्या हुईं और क्राईम, अपराध, जुल्म करने के संबंध में क्या भूलें हुईं, इन दोनों के बारे में एक बार विचार किया कीजिए। ये विचार करना बहुत जरूरी है। इससे, यह मालूम होता है कि हमारी गलतियाँ कहाँ हैं और हम कितना चूकते रहे हैं और चूक रहे हैं। इन चूकों को सुधारने वाला अगला कदम आता है-आत्म परिष्कार। आत्म निरीक्षण के बाद में आत्म परिष्कार का दूसरा नम्बर आता है। सुधार कैसे करें। सुधार में क्या बात करनी होती है। सुधार में रोकथाम करनी पड़ती है। मसलन, आप शराब पीते हैं तो आप बन्द कीजिए। नहीं साहब, हम शराब नहीं पीयेंगे। आप बीड़ी पीते हैं, सिगरेट पीते है...

Hindi story

एक सरोवर मेँ तीन दिव्य मछलियाँ रहती थीँ। वहाँ की तमाम मछलियाँ उन तीनोँ के प्रति ही श्रध्दा मेँ बँटी हुई थीँ। एक मछली का नाम व्यावहारिकबुद्धि था, दुसरी का नाम मध्यमबुद्धि और तीसरी का नाम अतिबुद्धि था। अतिबुद्धि के पास ज्ञान का असीम भंडार था। वह सभी प्रकार के शास्त्रोँ का ज्ञान रखती थी। मध्यमबुद्धि को उतनी ही दुर तक सोचनेँ की आदत थी, जिससे उसका वास्ता पड़ता था। वह सोचती कम थी, परंपरागत ढंग से अपना काम किया करती थी। व्यवहारिक बुद्धि न परंपरा पर ध्यान देती थी और न ही शास्त्र पर। उसे जब जैसी आवश्यकता होती थी निर्णय लिया करती थी और आवश्यकता न पड़नेँ पर किसी शास्त्र के पन्ने तक नहीँ उलटती थी। एक दिन कुछ मछुआरे सरोवर के तट पर आये और मछलियोँ की बहुतायत देखकर बातेँ करनेँ लगे कि यहाँ काफी मछलियाँ हैँ, सुबह आकर हम इसमेँ जाल डालेँगे। उनकी बातेँ मछलियोँ नेँ सुनीँ। व्यवहारिक बुद्धि नेँ कहा-" हमेँ फौरन यह तालाब छोड़ देना चाहिए। पतले सोतोँ का मार्ग पकड़कर उधर जंगली घास से ढके हुए जंगली सरोवर मेँ चले जाना चाहिये।" मध्यमबुद्धि नेँ कहा- " प्राचीन काल से हमारे पूर्वज ठण्ड के दिनोँ ...

Best joks...hhhhhh

1. जीना मुश्किल है. पप्पू की गर्लफ्रेंड उससे बोली, अगर मैं मर जाऊं तो तुम क्या करोगे? पप्पू-मैं भी मर जाऊंगा। गर्लफ्रेंड-पर क्यों, क्या तुम मुझसे इतना प्यार करते हो? पप्पू-प्यार-व्यार कुछ नहीं, तेरे चक्कर में उधारी इतनी हो गयी है कि जीना मुश्किल है। 2. पप्पू लंदन में डबल डेकर बस में चढ़ा तो कंडक्टर ने उसे ऊपर भेज दिया। पप्पू भागता हुआ नीचे वापस आया और बोला मरवाएगा क्या?? ऊपर तो ड्राइवर ही नहीं है। 3. एक व्यक्ति ने जन्नत का दरवाजा खटखटाया तो अन्दर से आवाज आई- क्या तुम शादीशुदा हो? जी हां। तुम अन्दर आ सकते हो, तुमने शादी करके दुनिया में काफी सजा पाई है। दूसरे ने दरवाजा खटखटाया तो अन्दर से आवाज आई- क्या तुम शादीशुदा हो। जी हां। मेरी दो बार शादी हो चुकी है। भाग जाओ, यहां बेवकूफों के लिए जगह नहीं है। 4. मुर्गा (मुर्गी से)- आई लव यू जान.. मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूं। मुर्गी (मुर्गे से)- हाय सच्ची। मुर्गा - हां मुर्गी - चल फिर आज अंडा तू दे। 5. हाथी ने चींटी को प्रपोज किया चींटी ने कहा- मैं भी तुमसे प्यार करती हूं। हाथी- तो फिर शादी से क्यों मना करती हो। ...

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1.हिन्दी  कविता : हमने जग की अजब तस्वीर देखी deshpriya6.freeclassifiedads@blogger.com हमने जग की अजब तस्वीर देखी एक हँसता है दस रोते हैं ये प्रभु की अद्भुत जागीर देखी एक हँसता है दस रोते हैं हमे हँसते मुखड़े चार मिले दुखियारे चेहरे हज़ार मिले यहाँ सुख से सौ गुनी पीड़ देखी एक हँसता है दस रोते हैं हमने जग की अजब तस्वीर देखी एक हँसता है दस रोते हैं दो एक सुखी यहाँ लाखों में आंसू है करोड़ों आँखों में हमने गिन गिन हर तकदीर देखी एक हँसता है दस रोते हैं हमने जग की अजब तस्वीर देखी एक हँसता है दस रोते हैं कुछ बोल प्रभु ये क्या माया तेरा खेल समझ में ना आया हमने देखे महल रे कुटीर देखी एक हँसता है दस रोते हैं हमने जग की अजब तस्वीर देखी एक हँसता है दस रोते हैं - प्रदीप 2. हिन्दी  कविता : देख तेरे संसार की हालत देख तेरे संसार की हालत क्या हो गयी भगवान् कितना बदल गया इंसान कितना बदल गया इंसान सूरज न बदला चाँद न बदला न बदला रे आसमान कितना बदल गया इंसान कितना बदल गया इंसान राम के भक्त रहीम के बन्दे रचते आज फरेब के फंदे कितने ये मक्कार ये अ...