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फ़रवरी 5, 2016 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

रूस ने भारत को एमआई-17 हेलीकॉप्टरों की अंतिम खेप सौंपी

Thu, 04 Feb 2016 रूस ने 03 फरवरी 2016 को भारत को तीन एमआई-17वी-5 सैन्य मालवाहक हेलीकॉप्टरों की अंतिम खेप सौंप दी. वह 48 ऐसे हेलीकॉप्टरों के एक अन्य सौदे को अंतिम रूप देने की तैयारी भी कर रहा है. रोस्टेक स्टेट कॉरपोरेशन कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के साथ समझौतों के तहत भारत को कजान हेलीकॉप्टर प्लांट की ओर से निर्मित एमआई-17वी-5 हेलीकॉप्टरों की 151 इकाई की आपूर्ति होनी थी.रशियन हेलीकॉप्टर्स के महानिदेशक अलेक्सांद्र मिखेयेव के अनुसार भारत रशियन हेलीकॉप्टर्स के लिए प्रमुख बाजारों में से एक है और दक्षिणपूर्व एशिया में रूसी हेलीकॉप्टरों का सबसे बड़े संचालक है. देश में 400 से ज्यादा वाहन संचालित हो रहे हैं. 2008 में किया गया था करार- रोसोबोरोनएक्सपोर्ट ने भारत को 80 एमआई-17वी-5 की आपूर्ति करने के लिए 2008 में करार किया था.आपूर्ति का यह काम 2011-2013 में पूरा हो गया.इसके बाद 2012-13 में वायुसेना, गृहमंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय की जरूरतों को पूरा करने के लिए कुल 71 एमआई-17वी-5 की आपूर्ति करने के लिए करार किए गए. एमआई-17वी-5 के बारे में- भारत को जिन एमआई-17वी-5 की आपूर्ति की गई है वे एमआई-8-17...

इसरो ने भारत के पांचवें नेवीगेशन उपग्रह ‘आईआरएनएसएस 1ई’ का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया

Wed, 20 Jan 2016 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 20 जनवरी 2016 को आंध्रप्रदेश के श्रीहरिकोटा से भारत के पांचवें नेवीगेशन उपग्रह आईआरएनएसएस1ई(इन्डियन रिजनल नेविगेशन सेटेलाईट सिस्टम) का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया. आईआरएनएसएस 1ई नामक इस उपग्रह का प्रक्षेपण पीएसएलवी सी-31,लॉन्च वेहिकल के माध्यम से किया जाएगा. यह प्रक्षेपण सतीश धवन अन्तरिक्ष केंद्र के दुसरे लॉन्च पैड से किया गया. पिछले 4 आईआरएनएसएस प्रक्षेपणों की ही तरह इस प्रक्षेपण में भी पीएसएलवी के एक्स एल संस्करण का उपयोग किया गया है. इससे पूर्व आईआरएनएसएस 1ए, आईआरएनएसएस 1बी, आईआरएनएसएस 1सी और आईआरएनएसएस 1डी का प्रक्षेपण क्रमशः पीएसएलवी-C22, पीएसएलवी-C24, पीएसएलवी-C26 और पीएसएलवी-C27 के माध्यम से किया जा चुका है.  आईआरएनएसएस1ई के बारे में • आईआरएनएसएस1ई का कुल भार 1425 किलो है. • आईआरएनएसएस1ई का विन्यास आईआरएनएसएस-1ए, 1बी, 1सी और 1डी के समान ही है. • आईआरएनएसएस1ई अपने साथ दो पेलोड ले गया है – नेविगेशन पेलोड और रेंजिंग पेलोड. • नेविगेशन पेलोड, नेविगेशन सिग्नल की सेवा प्रदान करेंगे. यह पेलोड एल5 और एस बैंड मैं कम करेगा. • ज्ञात ...

अन्तरिक्ष में पहली बार जिन्निया नामक फूल उगाया गया

Tue, 19 Jan 2016 नासा द्वारा 16 जनवरी 2016 को जारी सूचना के अनुसार वैज्ञानिकों ने अंतरर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन में एक फूल उगाने में सफलता प्राप्त की. यह अमेरिका में पाया जाने वाला जिन्निया नामक फूल है. यह पहली बार हुआ है जब वैज्ञानिकों ने पृथ्वी से बाहर कोई फूल खिलाया है. शून्य गुरुत्वाकर्षण के बावजूद इसकी पैदावार की गयी. इसकी बनावट काफी हद तक सूरजमुखी के फूल जैसी है जिसे खाने लायक भी बताया गया है. नासा के वैज्ञानिक स्कॉट केली ने ट्वीट के जरिए जानकारी दी कि जिन्निया फूल अमेरिका में उगाया जाता है तथा इसे सलाद के रूप में भी खाया जा सकता है. अंतरिक्ष वैज्ञानिक इस सफल प्रयोग को अंतरिक्ष विज्ञान जगत में एक बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं. यह पौधा स्पेस सेंटर में मौजूद वेजी सिस्टम के माध्यम से उगाया गया, जिसमें लाल, नीले और हरे रंग की एलईडी लाइट का प्रयोग किया जाता है. इसके साथ ही अब अंतरिक्ष में पौधों और कुछ और जरूरी बातों पर भी गहन अध्यययन किया जा सकेगा. इससे पहले मई 2014 में अंतरर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन में मौजूद नासा की लैब में एक सब्जीस को सफलतापूर्वक उगाया गया था. Now get latest Current Affai...

भारत में सीएसआईआर ने मधुमेह रोधी आयुर्वेदिक दवा की शुरूआत की

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) ने 03 फरवरी 2016 को देश की पहली टाइप-2 मधुमेहरोधी आयुर्वेदिक दवा लांच की. जिसे वैज्ञानिक रूप से सुरक्षित और प्रभावी बताया गया है. बीजीआर-34 को राष्ट्रीय वानस्पतिक अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) और औषधीय और सुगंधित पौधों के लिए केंद्रीय संस्थान (सीआईएमएपी) ने साथ मिलकर विकसित किया है. यह दोनों सीएसआईआर की शोध इकाई है और लखनऊ में स्थित है.इस दवाई की लांचिंग के अवसर पर सीएसआईआर-एनबीआरआई के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक ए.के.एस. रावत ने कहा कि भारत की 6 करोड़ आबादी मधुमेह से पीड़ित है.उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चिकित्सक टाईप-2 श्रेणी के मधुमेह से पीड़ित अपने मरीजों को तुरंत और प्रभावी राहत के लिए बीजीआर-34 दवा की सिफारिश करेंगे.इस दवाई के अनुसंधान में एनबीआरआई और सीआईएमएपी के वैज्ञानिकों ने 500 से ज्यादा जानेमाने जड़ी-बूटियों का गहराई से अध्ययन किया और उसमें से 6 प्रमुख जड़ी-बूटी का चुनाव किया जिसका उल्लेख आयुर्वेद में भी है. इसी के मिश्रण से इस नई दवाई को विकसित किया गया है.सीएसआईआर-एनबीआरआई के प्रधान वैज्ञानिक वी. राव ने कहा कि बीजीआर-34 एक...