जीवन एक लम्बी यात्रा है। जब कोई व्यक्ति एक स्थान से दूसरे स्थान पर यात्रा करता है तो वह मार्ग में अपनी सुविधा के लिए विचार करके अवश्यक सामान अपने साथ लेता है तब कहीं सुगमता से अपनी यात्रा पूर्ण कर अपने निश्चिंत स्थान पर पंहुचता है परंतु इस जीवन यात्रा का पूरक तो प्रभु भक्ति अथवा मालिक की प्राप्ति करना है। यह यात्रा तो तब ही पूर्णता सफल हो सकती है जबकि इस के वास्तविक तात्पर्य व लक्ष्य जानते हुए प्राप्त अनमोल समय उत्तम तन का सद्उपयोग किया जाए। मनुष्य नामक जीव सृष्टि कर्ता के कला कौशल की अद्वितिय एवं अनुपम कृति का प्रतिक है। सृष्टि रचियता ने इस जगत में यदि कोई सर्वाधिक गुणमयी तथा महत्वपूर्ण वस्तु बनाई है तो वह मानव का व्यक्तित्व है जो प्रकृति की संपूर्ण शक्तियों का केंद्र तथा समस्त गुणों एवं विद्यओं से सम्पन्न है। यह मानुष जीवन पिछले कई जन्मों के शुभ कर्मों का फल है। यह एक श्रेष्ठ प्राणी है। चोरासी लाख योनियों में मनुष्य की तुलना कोई भी योनि नहीं कर सकती। चर अचर अथवा छोटे बड़े डितने भी जीव जन्तु हैं सबसे श्रेष्ठ मानव है। यह गोरव केवल इसी कारण इसे प्राप्त है कि इसको भोक्ता होने क...
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