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सितंबर 6, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Re: " मैं खुल के हँस तो रहा हूँ फ़क़ीर होते हुए ,

> > : बुलंदी की उडान पर हो तो , > जरा सब्र रखो। > परिंदे बताते हैं कि , > आसमान में ठिकाने नही होते ।। > : चढ़ती थीं उस मज़ार पर चादरें > बेशुमार , > लेकिन बाहर बैठा कोई फ़क़ीर सर्दी से > मर गया।। > : कितनी मासुम सी ख़्वाहिश थी इस > नादांन दिल की , > जो चाहता था कि.. शादी भी करूँ और .... > ख़ुश भी रहूँ ।। > : छत टपकती है उसके कच्चे घर की , > वो किसान फिर भी बारिश की दुआ > माँगता है ।। > : तेरे डिब्बे > की वो दो रोटिया कही भी बिकती नहीं , > माँ ........... > होटल के खाने से आज भी भूख > मिटती नहीं ।। > : इतना भी गुमान न कर आपनी जीत > पर " ऐ बेखबर " > शहर में तेरे जीत से ज्यादा चर्चे > तो मेरी हार के हे....।। > : सीख रहा हूं अब मैं > भी इंसानों को पढने का हुनर , > सुना है चेहरे पे किताबों से > ज्यादा लिखा होता है ।। > : लिखना तो ये था कि खुश हूँ तेरे बगैर > भी , > पर कलम से पहले आँसू कागज़ पर गिर > गया ।। > : ...

Re: गलत बात माननेसे से इंकार कर

> > लघुकथा --- डिप्रैशन > रामनाथ पिछले चार-पाँच सालों से" > डिप्रैशन" बीमारी से बुरी तरह ग्रस्त > थे। > बहुत इलाज कराया मगर रामनाथ > डिप्रैशन से बाहर ही नहीं आ पा रहे थे। > उनकी इस > हालत से सब घरवाले परेशान हो कर खुद > डिप्रैशन के शिकार होने की कगार पर > पहुँच > गये थे। डॉक्टर ने रामनाथ > की बीमारी की पुनः थाह लेने के लिए इस > बार उनकी पत्नी > से भी गहन पूछ ताछ करने लगे --- > " हाँ तो मैडम इनके साथ कोई ,कुछ खास > महत्वपूर्ण घटना जैसे किसी से , > बॉस से, मातहत कर्मचारियों से ,साथ > काम करने वाले साथी से , रिश्तेदारों से > या > मित्र से झगड़ा हुआ हो ?,या किसी ने > किसी प्रकार की धमकी दी हो ? > या किसी प्रकार > की ,धन की हानि हुयी हो ? वो कोई > भी बात घटना ? जिसका इन पर > बुरा प्रभाव पड़ा > हो या जिससे इन के अहम् को ठेस > लगी हो ?प्लीज़ छोटी से छोटी भी बात > को ध्यान में > रख कर सोच कर बताओ जिससे इनके > व्यहार में परिवर्तन ...

Re: जहाँ प्रेम है वहां धन और सफलता की कमी नहीं होती ।

> > तीन साधू : > एक औरत अपने घर से निकली , उसने घर के सामने सफ़ेद लम्बी दाढ़ी में तीन साधू-महात्माओं को बैठे देखा . वह उन्हें पहचान नही पायी . > > उसने कहा , " मैं आप लोगों को नहीं पहचानती , बताइए क्या काम है ?" > > " हमें भोजन करना है .", साधुओं ने बोला . > > " ठीक है ! कृपया मेरे घर में पधारिये और भोजन ग्रहण कीजिये ." > > " क्या तुम्हारा पति घर में है ?" , एक साधू ने प्रश्न किया . > > "नहीं, वह कुछ देर के लिए बाहर गए हैं ." औरत ने उत्तर दिया . > > " तब हम अन्दर नहीं आ सकते ", तीनो एक साथ बोले . > > थोड़ी देर में पति घर वापस आ गया , उसे साधुओं के बारे में पता चला तो उसने तुरंत अपनी पत्नी से उन्हें पुन: आमंत्रित करने के लिए कहा।औरत ने ऐसा ही किया , वह साधुओं के समक्ष गयी और बोली," जी, अब मेरे पति वापस आ गए हैं , कृपया आप लोग घर में प्रवेश करिए !" > > " हम किसी घर में एक साथ प्रवेश नहीं करते ." साधुओं ने स्त्री को ...