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Re: गलत बात माननेसे से इंकार कर


>
> लघुकथा --- डिप्रैशन
> रामनाथ पिछले चार-पाँच सालों से"
> डिप्रैशन" बीमारी से बुरी तरह ग्रस्त
> थे।
> बहुत इलाज कराया मगर रामनाथ
> डिप्रैशन से बाहर ही नहीं आ पा रहे थे।
> उनकी इस
> हालत से सब घरवाले परेशान हो कर खुद
> डिप्रैशन के शिकार होने की कगार पर
> पहुँच
> गये थे। डॉक्टर ने रामनाथ
> की बीमारी की पुनः थाह लेने के लिए इस
> बार उनकी पत्नी
> से भी गहन पूछ ताछ करने लगे ---
> " हाँ तो मैडम इनके साथ कोई ,कुछ खास
> महत्वपूर्ण घटना जैसे किसी से ,
> बॉस से, मातहत कर्मचारियों से ,साथ
> काम करने वाले साथी से , रिश्तेदारों से
> या
> मित्र से झगड़ा हुआ हो ?,या किसी ने
> किसी प्रकार की धमकी दी हो ?
> या किसी प्रकार
> की ,धन की हानि हुयी हो ? वो कोई
> भी बात घटना ? जिसका इन पर
> बुरा प्रभाव पड़ा
> हो या जिससे इन के अहम् को ठेस
> लगी हो ?प्लीज़ छोटी से छोटी भी बात
> को ध्यान में
> रख कर सोच कर बताओ जिससे इनके
> व्यहार में परिवर्तन होना दिखने
> लगा हो," पत्नी
> ने बहुत सोचा , अपनी शादी के चौबीस
> वर्षों के हर दिन के बारे में
> सोचा ,पति और अपने
> व्यवहार, रिश्ते के आधार और उसके हर
> पहलू पर गहनता से सोचा समझा फिर
> बोली --
> " डॉक्टर इनकी नौकरी,सम्बन्धिय
> ों से ,मित्र ,काम ,समाजिक दायरे से
> सम्बंधित
> तो कुछ नया अलग घटित नहीं हुआ,हाँ.....
> मगर मैं बीस साल तक इनके हर अच्छे बुरे
> व्यवहार को चुपचाप सहन करती ,हर बात
> को बिना मुँह खोले मान कर हाँ में
> हाँ मिलाती
> रही थी ,ताकि ये नाराज ना हो जायें
> तो सब ठीक था ,मगर जब मैंने
> इनको इनकी बातों
> का तर्कयुक्त जवाब देकर निरुत्तर
> करना और गलत बात माननेसे से इंकार
> करना शुरू कर
> दिया तो ये पहले बहुत उग्र हो जाते,
> फिर तिलमिला कर रह जाते थे , …… मैं
> भी क्या
> करती, बच्चे बड़े हो गए थे ,....कब तक
> अपनी अंतरात्मा और स्वाभिमान
> को दबाती या
> मारती रहती ? बहु और दामाद के
> परिवार में शामिल होने का समय करीब
> आता जा रहा
> था और मेरी भी सहने की क्षमता कमजोर
> होने लगी थी डॉक्टर "
> " ओह अब समझ आ रहा है
> इनकी बीमारी का इलाज ,आपको फिर से
> समायोजन
> करना होगा ,जिसके लिए
> आपको काउंसलिंग करनी होगी ओके "।

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