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मार्च 5, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

गुजरात के पास समुद्र में वैज्ञानिकों ने खोजा समुद्रमंथन में प्रयोग हुआ पर्वत

अगर आप भी समझते हैं कि पौराणिक कथा केवल कल्पना होती हैं तो कमसे कम समुद्र मंथन के साथ ऐसा नहीं. वैज्ञानुक प्रमाण यह सिद्ध करते हैं कि सचमुच समुद्र मंथन हुआ था. अगर आपको यकीन ना हो तो इसे पढ़े. समुद्रमंथन देवताओं और दानवों के बीच हुआ था जिसमे देवताओं और दानवो ने वासुकि नाग को मन्दराचल पर्वत के चारो और लपेटकर समुद्र मंथन किया था. दक्षिण गुजरात के समुद्र में समुद्रमंथन वाला वही पवर्त मिला है. वैज्ञानिक परीक्षण के आधार पर इसकी पुष्टि भी की जा चुकी है. पिंजरत गांव के समुद्र में मिला पर्वत बिहार के भागलपुर में विराजित मूल मांधार शिखर जैसा ही है. गुजरात-बिहार का पर्वत एक जैसा ही है. दोनों ही पर्वत में ग्रेनाइट– की बहुलता है. इस पर्वत के बीचों-बीच नाग आकृति भी मिली है. द्वारका नगरी के पास ही देवताओं और राक्षसों ने अमृत की प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन किया था. इस मंथन के लिए मन्दराचल पर्वत का उपयोग किया था. समुद्र मंथन के दौरान विष भी निकला था, जिसे महादेव शिव ने ग्रहण कर लिया था. सामान्यत: समुद्र की गोद में मिलने वाले पर्वत ऐसे नहीं होते. सूरत के आॉर्कियोलॉजिस्ट मितुल त्रिवेदी ने कॉर्बन ट...

रामायण और गीता का युग फिर आने को ह

रामायण और गीता का युग फिर आने को है गलियों में तब शायद शुद्ध मंत्रोच्चार की ध्वनि गूंजेगी. लोग तब संस्कृत के पंडित ढूंढ़ने के लिए भटकेंगे नहीं क्योंकि शायद गीता और रामायण के उस युग में संस्कृत के ज्ञानियों की कमी नहीं होगी. तब पंडित कहलाने वालों के वैदिक ज्ञान पर शक की ऊंगली नहीं उठेगी, न ही ज्ञानी कहलाने के लिए एक उम्र गुजर जाने और बूढ़े होने का इंतजार करना होगा. वैदिक ज्ञान का प्रकाश तब आम बात होगी. शिक्षा और तकनीक को आज सबसे जरूरी चीज मानने वाले शायद इस खबर पर थोड़ी त्योरी चढ़ाएं लेकिन रामायण और महाभारत भी अब युवाओं की जरूरत और संभावनाएं बनेंगे. धार्मिक इतिहास को धर्मग्रंथों में होने और दादी-नानी की कहानियों, साधु-महात्माओं के प्रवचनों में सुनने के अलावा अब खासकर युवा इसमें अपना भविष्य बनाएंगे...और यह सब एक बार फिर होगा शिक्षा का गौरवपूर्ण इतिहास रखने वाली पाटलिपुत्र की धरती पर. रामायण और गीता जैसे धार्मिक ग्रंथों की कहानियां सुनना या धार्मिक टीवी सीरियल्स देखना लगभग हर किसी को पसंद आता है. पर रामायण, महाभारत और गीता जैसे धार्मिक ग्रंथ पढ़ना हर किसी को न पसंद होता है, न आज की व्य...

उस धमाके में और भी लोगों की जानें जाती अगर ये कुत्ता न होता

उस धमाके में और भी लोगों की जानें जाती अगर ये कुत्ता न होता बात 21 साल पहले की है जब 12 मार्च 1993 के दिन सिर्फ दो घंटे 12 मिनट में मायानगरी मुंबई ने 12 धमाके झेले. इन धमाकों ने 257 लोगों की जानें ली और करीब 700 लोग जख्‍मी हुए थे. ये संख्या और भी बढ़ सकती थी अगर 'जंजीर' ने अपनी सूझबूझ और समझदारी नहीं दिखाई होती. अब आप सोच रहें होंगे कि यह जंजीर कौन है जिसकी यहां चर्चा हो रही है.  दरअसल जंजीर मुंबई पुलिस की डॉग स्क्वायड का सबसे काबिल डॉग (कुत्ता) था. जिसने अपनी काबलियत से 1993 मुंबई हमले में हजारों किलो विस्फोटक सामग्री को खोज निकाला जंजीर ही एकमात्र वह कारण बना, जिसकी समझदारी से पूरे मुंबई  में 11 मिलिट्री बम, 57 कंट्री मेड बम, 175 पेट्रोल बम, और 600 डेटोनेटर, 249 हैंड ग्रेनेंड्स और 6 हजार 406 जिंदा विस्फोटक सामग्री को ढूंढ निकाला था. इस तरह जंजीर ने मुंबई, मुंब्रा, और ठाणे में कम से कम तीन और हमले को टालने में मुंबई पुलिस की मदद की जंजीर' की बहादुरी ने उसे रातों रात लोगों को चहेता बना दिया और वह एक हीरो के रूप में लोगों के दिलों में बस गया. दुखद बात यह रही कि फेफड़े...