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अगस्त 10, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
खूब बैटरी खाता है फेसबुक फेसबुक का चस्का ऐसा है कि सुबह आंख खुलने से ले कर रात को नींद आने तक लोग स्मार्टफोन के साथ फेसबुक से जुड़े रहते हैं. लेकिन फेसबुक के एक नए फीचर ने लोगों को परेशान किया हुआ है. Facebook फेसबुक आए दिन अपने लुक में बदलाव लाता रहता है. अक्सर लोगों को इन बदलावों से परेशानी होती है लेकिन बाद में वे इन्हें पसंद करने लगते हैं. इन दिनों फेसबुक ने अपनी साइट की सेटिंग्स को कुछ इस तरह से बदल दिया है कि वॉल पर पोस्ट किए गए वीडियो पेज स्क्रॉल करने पर अपने आप ही चलने लगते हैं. लोगों को प्ले का बटन दबाने की भी जरूरत नहीं. हालांकि वीडियो बिना आवाज के चलते हैं ताकि अचानक ही आसपास वाले हैरान ना हो जाएं. अगर वीडियो के साथ ऑडियो भी चाहिए तो क्लिक कर के आवाज सुनी जा सकती है. महंगा पड़ा फेसबुक लेकिन इस ऑटोमैटिक वीडियो फीचर ने लोगों को परेशान किया हुआ है. अधिकतर लोग अपने स्मार्टफोन पर फेसबुक का इस्तेमाल करते हैं. और इस तरह से लगातार वीडियो चलते रहने से उनके फोन की बैटरी भी खूब खर्च होती है और इंटरनेट भी. ऐसे में फेसबुक इस्तेमाल करना उन्हें महंगा पड़ रहा है. जर्मनी की कंप्...

धरती की जिंदगी प्रभावित करता अंतरिक्ष खगोलशास्त्र

धरती की जिंदगी प्रभावित करता अंतरिक्ष खगोलशास्त्र यानी तारों का विज्ञान लेकिन तारे हमसे बहुत दूर होते हैं. अंतरिक्ष 100 किलोमीटर की ऊंचाई से ही शुरू हो जाती है और हमारा जीवन भी सृष्टि के इस फैलाव का हिस्सा है. अंतरिक्ष का हिस्सा है धरती जर्मन अंतरिक्षयात्री अलेक्जांडर गैर्स्ट लगभग 50 दिन से अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन आईएसएस में हैं. इन दिनों में उन्होंने सूरज को 800 बार उगते देखा. 24 घंटे के एक दिन में 16 बार. 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर वह हर 90 मिनट में पृथ्वी का एक बार चक्कर काटते हैं. पृथ्वी के अलग अलग देशों को आसमान से देखते हुए अलेक्स ट्वीट भी करते हैं. अंतरिक्ष में उनका जीवन करीब करीब धरती जैसी आम जिंदगी का रूप लेने लगा है. 21 जुलाई 1969 को जब इंसान पहली बार चांद पर पहुंचा, तो दुनिया भर के लोग टीवी के सामने बैठे रहे. आज हर वेबसाइट पर अंतरिक्ष को लेकर खबरें होती हैं. खगोलशास्त्र की पढ़ाई अब रोजमर्रा और आम जीवन की पढ़ाई के और करीब आ रही है. पूर्वी जर्मन शहर येना के खगोलशास्त्री फ्लोरियान फ्राइश्टेटर लिखते हैं कि हाइड्रोजन और हीलियम जैसे तत्व तारों में बनते हैं और वह सो...

KABITA....

सुबह-सुबह तोताजी बोले, उठो-उठो गुड मार्निंग जी। आज बने हैं आलू छोले, उठो-उठो गुड‌ मार्निंग जी‍। भोर, स्वर्ण की थाली लेकर, द्वार तुम्हारे आई थी। किंतु तुम्हें जब सोता पाया मन ही मन मुस्काई थी। ठंडी हवा रजाई टटोले, उठो-उठो गुड‌ मार्निंग जी‍। चाय पुकारे जोर-जोर से, मैं कब से तैयार खडी। वहीं पराठों वाली थाली, एक टांग पर अड़ी पड़ी। चीख रहे हैं रस के गोले, उठो-उठो गुड‌ मार्निंग जी‍। सुबह सुबह ही सोन चिरैया, तुम्हें जगाने आई थी। जागो-जागो हुआ सबेरा, चें चें चें चिल्लाई थी। कानों में अमृत रस घोले, उठो-उठो गुड‌ मार्निंग जी‍। Sent from Samsung Mobile
अदभुत कथा- लिखने वाले व्यक्ति को तहे दिल से नमन....... कहानी कुछ यूँ है-------- ............................................................ ............................. इस साल मेरा सात वर्षीय बेटा दूसरी कक्षा मैं प्रवेश पा गया .... क्लास मैं हमेशा से अव्वल आता रहा है ! पिछले दिनों तनख्वाह मिली तो मैं उसे नयी स्कूल ड्रेस और जूते दिलवाने के लिए बाज़ार ले गया ! बेटे ने जूते लेने से ये कह कर मना कर दिया की पुराने जूतों को बस थोड़ी-सी मरम्मत की जरुरत है वो अभी इस साल काम दे सकते हैं! अपने जूतों की बजाये उसने मुझे अपने दादा की कमजोर हो चुकी नज़र के लिए नया चश्मा बनवाने को कहा ! मैंने सोचा बेटा अपने दादा से शायद बहुत प्यार करता है इसलिए अपने जूतों की बजाय उनके चश्मे को ज्यादा जरूरी समझ रहा है ! खैर मैंने कुछ कहना जरुरी नहीं समझा और उसे लेकर ड्रेस की दुकान पर पहुंचा..... दुकानदार ने बेटे के साइज़ की सफ़ेद शर्ट निकाली ... डाल कर देखने पर शर्ट एक दम फिट थी..... फिर भी बेटे ने थोड़ी लम्बी शर्ट दिखाने को कहा !!!! मैंने बेटे ...