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जुलाई 27, 2015 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Baat pate ki.....

सांप अगर विषैला नहीं है तो भी उसे फुफकारना नहीं छोड़ना चाहिए। क्योंकि अगर उसने स्वयं को विषहीन सिद्ध कर दिया तो उसके प्राण संकट में पड़ जाएंगे। इसी तरह व्यक्ति को भी किसी को हानि नहीं पहुंचाना चाहिए पर अगर कोई कमजोर समझ कर आप पर हावी होने की कोशिश करें तो उसे यह अहसास दिला देना चाहिए कि आप स्वयं को लेकर सजग है और किंचित क्रोध या विरोध का प्रदर्शन कर ही देना चाहिए।    किसी वस्तु की सुगंध को फैलाने के लिए ठंडी बयार की जरूरत होती है, उसी तरह व्यक्ति के गुण या योग्यता भी मुंह से कहने की आवश्यकता नहीं वह स्वत : ही प्रसारित होते हैं सुगंध के समान। जिस तरह सुगंध को दबाकर नहीं रखा जा सकता उसी तरह अच्छे गुण भी दबकर नहीं रह सकते। ख्याति की मीठी बयार उसे मिल ही जाती है। 

आत्मा से कमजोर और चरित्र से दुर्बल व्यक्ति से कभी भी दोस्ती न करें क्योंकि वह आप पर उस समय हमला कर सकता है जब आपका समय कमजोर हो या जिस समय आपको अंदाजा भी नहीं हो।    9. हजारों पशुओं के बीच भी बछड़ा अपनी माता के पास ही आ जाता है, वैसे ही आपके कर्मो के फल भी इस जगत में मौजूद होते हैं जिसे तुम्हें ढूंढना नहीं होता है वह बछड़े के समान पास आ ही जाता है। अत: चाणक्य सदैव अच्छे कर्म की सलाह देते हैं। 

आत्मा से कमजोर और चरित्र से दुर्बल व्यक्ति से कभी भी दोस्ती न करें क्योंकि वह आप पर उस समय हमला कर सकता है जब आपका समय कमजोर हो या जिस समय आपको अंदाजा भी नहीं हो।    हजारों पशुओं के बीच भी बछड़ा अपनी माता के पास ही आ जाता है, वैसे ही आपके कर्मो के फल भी इस जगत में मौजूद होते हैं जिसे तुम्हें ढूंढना नहीं होता है वह बछड़े के समान पास आ ही जाता है। अत: चाणक्य सदैव अच्छे कर्म की सलाह देते हैं। 

चाणक्य की अनमोल सीख

जीवन जीने की कला है चाणक्य की अनमोल सीख जो धन बहुत मेहनत के बाद मिले, जिसके लिए अपने धर्म का त्याग करना पड़े, जिसके लिए शत्रुओं की खुशामद करनी पड़े उस धन का मोह नहीं करना चाहिए।   किसी काम को आरंभ करो तो 3 बातों का विशेष ध्यान रखो। पहला कि यह तुम क्यों करना चाहते हो? दूसरा इस काम का क्या नतीजा होगा? और क्या इसमें आपको सफलता मिलेगी? पिछला

Gyan ki baat

किसी के अधीन रहने से ज्यादा कष्टदायक किसी दूसरे के घर में रहना है।  जो मित्र सामने मीठी बातें करता है और पीठ पीछे आपके काम बिगाड़ने में लगा रहता है ऐसे मित्रों को त्यागने में ही भलाई है।