सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

STORY

वृन्दावन गया था। बाँके बिहारी के दर्शन करने के पश्चात् मन में आया कि
यमुना के पवित्र जल में भी डुबकी लगाता चलूँ। पवित्र नदियों में स्नान करने का
अवसर रोज-रोज थोड़े ही मिलता है।

यमुना के घाट सुनसान से थे। हाँ, बन्दरों की सेना अवश्य अपनी इच्छानुसार
वहाँ विचरण कर रही थी। सीढ़ियाँ और बारादरियाँ टूटी-फूटी पड़ी थी। लगा कि
वहाँ महीनों से सफाई नहीं हुई है। परन्तु मुझे तो स्नान करना ही था। जल में प्रवेश
करने से पूर्व मैंने दोर्नो हाथ जोड़कर ऊँची आवाज में कहा-"यमुना मैया, तुम्हारी
जय!''

''मुझे मैया नहीं, अपनी दासी कहो बेटा। और दासियों की जय कभी नहीं
बोली जाती।'' अचानक एक उदास-सा स्वर मेरे कानों में पड़ा, जैसे कि कोई
दुखिया बूढ़ी औरत बोल रही हो।

मैंने चौंक कर इधर-उधर देखा। घाट पर मेरे अतिरिक्त अन्य कोई था ही
नहीं। सोचा कि मेरे मन का वहम रहा होगा। कोई बूढ़ी औरत वहाँ होती तो दिखाई
ज़रूर देती।

मैंने झुककर हाथ से जल का स्पर्श किया, उसे माथे से छुआते हुए
कहा-"माँ, मुझे अपने पवित्र जल में स्नान करने की आज्ञा दें।"

इतना कहकर मैंने अपना दायाँ पाँव आगे बढ़ाया ही था कि फिर से वही
स्वर सुनाई दिया- "बेटा, दासियों से आज्ञा माँगना कब से शुरू कर दिया तुम लोगों
ने? इसमें डुबकी लगाकर क्यों अपनी सेंट लगी देह को गंदी और बदबूदार बनाना
चाहते हो?''

आवाज सुनकर एक तरह से जड़ होकर रह गया था मैं। मैं समझ गया था
कि आवाज यमुना के भीतर से ही आ रही है। इसलिए साहस करके कहा- "माँ
जी, हम भारतवासियों के लिए तो आप हमेशा से ही माँ से बढ़कर वंदनीय तथा
पवित्र रही हैं और रहेंगी। कृपया, स्वयं को दासी मत कहिए।''

"बेटा, तुम लोगों ने मेरे साथ जैसा व्यवहार किया है, ऐसा सिर्फ दास-दासियों
के साथ ही हुआ करता है। मुझ पर बाँध बनाए, विद्युत पैदा की। खेतों की सिंचाई
की, पीने को जल लिया। बदले में मेरी सूखती जलधार में सभी नगरों के गन्दे नाले
तथा कारखानों के उत्सृज्य पदार्थ मुझमें धकेल दिए। मेरे किनारों पर खड़े पेड़ों को काटकर वहां सुन्दर-सुन्दर भवन बना डाले । इस प्रकार अब मैं सूर्य-पुत्री कालिन्दी नहीं, मानव मात्र के टट्टी-पेशाब, थूक और मवाद को बहा ले जाने वाली एक गन्दी नाली बनकर रह गई हूँ। चलो छोड़ो, यदि आज तुम आँख व नाक बंद किये बिना एक डुबकी लगाकर दिखा दो तो, तभी मैं तुम्हें अपना पुत्र मानकर आर्शीवाद दूँगी। '' यमुना मैया मुझे चुनौती दे रही थी।

मैं तो स्नान करने के लिए तैयार ही था। अपने दोनों पाँव अभी मैंने पानी में रखे ही थे कि हवा के एक तेज झोंके के साथ तीखी बदबू बलपूर्वक मेरे नथुनों में घुस गई। मेरी आँखों के ठीक सामने से किसी इनसान की टट्टी का एक लौंदा जल में तैरता हुआ निकल रहा था। मन कच्चा हो आया, लगा कि उलटी होगी। मैं उलटे पाँव घाट से बाहर की ओर दौड़ पड़ा।

किसी बुढ़िया के सिसकने का स्वर मेरा पीछा कर रहा था।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

हमारे जीवन में यह जानकारी रखना बहुत जरूरी है

परिचय- हमारा भारत देश आज हर तरह की आधुनिक सुख-सुविधाओं से संपन्न हो चुका है। आज हम विश्व में काफी ऊपर गिने जाते हैं। भारत ने अपने यहां राकेट से लेकर कंप्यूटर तक बनाने में महारत हासिल की है लेकिन एक चीज जो सदियों पहले भी थी और आज भी है, वंश को चलाने के लिए पुत्र की जरूरत। आज भी बहुत से लोगों का मानना यही है कि अगर हमारा पुत्र नहीं होगा तो हमारे वंश का नाम मिट जाएगा। इसी चाह में लोग अपने घर में कई बच्चे पैदा कर लेते हैं। बहुत से लोगों का मानना यह है कि 3 बच्चों के बाद मां की कोख बदल जाती है यानि की उनके घर में अगर 3 लड़कियां होती है तो वह चौथे बच्चे की प्रतीक्षा करते हैं की वह तो लड़का ही होगा। लेकिन यहां पर भी अगर लड़की हो जाती है तो वह बिल्कुल परेशान हो जाते हैं। लेकिन इनके अलावा कुछ लोग ऐसे भी है जो लड़की को माता लक्ष्मी का रूप मानते हैं और चाहते हैं कि उनके घर में एक लड़की जरूर हो। यहां पर कुछ उपाय बताए जा रहे हैं जिनको अपनाकर जिनको लड़के की चाह है वह लडका प्राप्त कर सकते हैं और जिनको लडकी की चाह है वह लडकी प्राप्त कर सकते हैं- सबसे पहली बात अगर पुत्र प्राप्त करना है तो इसके लिए पुरु...

घरेलू नुस्खे

खुशहाल वैवाहिक जीवन के लिए चंद आयुर्वेदिक नुस्खे....! काम आज दाम्पत्य जीवन की औपचारिकता भर रह गया है, इन्ही कारणों से यौन संबंधों को लेकर असंतुष्ट युगलों की संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है, ऐसी स्थिति में आयुर्वेद एवं आयुर्वेदिक औषधियां मददगार हो सकती है.... असगंध, विधारा, शतावर, सफ़ेद मूसली, तालमखाना के बीज, कौंच बीज प्रत्येक 50-50 ग्राम की मात्रा में लेकर दरदरा कर कपडे से छान लें तथा 350 ग्राम मिश्री मिला लें, इस नुस्खे को 5-10 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम ठन्डे दूध से लें, लगातार एक माह तक लेने से यौन सामर्थ्य में वृद्धि अवश्य होगी। -दालचीनी, अकरकरा, मुनक्का और श्वेतगुंजा को एक साथ पीसकर इन्द्रिय पर लेप करें तथा सम्भोग के समय कपडे से पोछ डालें, यह योग इन्द्रियों में रक्त के संचरण को बढाता है। शुद्ध शिलाजीत 500 मिलीग्राम की मात्रा में ठन्डे दूध में घोलकर सुबह शाम पीने से भी लाभ मिलता है। -शीघ्रपतन की शिकायत हो तो धाय के फूल, मुलेठी, नागकेशर, बबूलफली इनको बराबर मात्रा में लेकर, इसमें आधी मात्रा में मिश्री मिलाकर, इस योग को 5-5 ग्राम की मात्रा में सेवन लगातार एक माह तक कर...

GOOD STORY

किसी गांव में एक गरीब ब्राहमण रहता था| वह लोगों  के घरों में पूजा पाठ कर के अपनी i.  yy चलाता था| एक दिन एक राजा ने इस ब्राहमण को पूजा के लिए बुलवाया| ब्राहमण ख़ुशी ख़ुशी राजा के यहाँ चला गया | पूजा पाठ करके जब ब्राहमण अपने घर को आने लगा तो राजा ने ब्राहमण से पूछा इश्वर कहाँ रहता है, किधर देखता है और क्या करता है? ब्राहमण कुछ सोचने लग गया और फिर राजा से कहा, महाराज मुझे कुछ समय चाहिए इस सवाल का उत्तर देने के लिए| राजा ने कहा ठीक है, एक महीने का समय दिया| एक महीने बाद आकर इस सवाल का उत्तर दे जाना | ब्राहमण इसका उत्तर सोचता रहा और घर की ओर चलता रहा परन्तु उसके कुछ समझ नहीं आरहा था| समय बीतने के साथ साथ ब्राहमण की चिंता भी बढ़ने लगी और ब्राहमण उदास रहने लगा| .ब्रह्मण का एक बेटा था जो काफी होशियार था उसने अपने पिता से उदासी का कारण पूछा | ब्राहमण ने बेटे को बताया कि राजा ने उस से एक सवाल का जवाब माँगा है कि इश्वर कहाँ रहता है;किधर देखता है,ओर क्या करता है ? मुझे कुछ सूझ नहीं रहा है| बेटे ने कहा पिताजी आप मुझे राजा के पास ले चलना उनके सवालों का जवाब मै दूंगा| ठीक एक महीने बाद ब्राह...