आज के अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी वाले युग में टेस्ट ट्यूब बेबी की प्रक्रिया उन औरतों के लिए वरदान है जो कभी मां नहीं बन सकती। इस प्रक्रिया ने कई औरतों की सूनी गोद को भरा है। आज पूरे विश्व भर के लोग इस प्रक्रिया को अपना रहे हैं। हालांकि, यह प्रक्रिया मंहगी है और इससे गुजरने वाली महिलाओं को काफी सावधानियों का पालन करना पड़ता है।
36 वर्ष पूर्व 25 जुलाई 1978 को मेनचेस्टर ओल्डहेम शहर के डिस्ट्रिक जनरल हॉस्पिटल में विश्व के पहले टेस्ट ट्यूब बेबी लुइसी जॉय ब्राउन का जन्म हुआ था। जन्म लेने के बाद सभी अखबारों की सुर्खियां बनी लुइसी का वजन 2.608 किलो था। विश्व के पहले टेस्ट ट्यूब बेबी बनने से वह एक सेलिब्रिटी बन गई। लुइसी के पैदा होने के 7 साल बाद उसकी बहन नैटली का जन्म भी टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया से हुआ। लुइसी के पैरेंट्स लेसली और पीटर ब्राउन थे।
टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया का हुआ था विरोध
विश्व के पहले टेस्ट ट्यूब बेबी लुइसी के जन्म के बाद से ही टेस्ट ट्यूब प्रक्रिया का काफी विरोध हुआ था जो अभी तक चलता आ रहा है। कई लोग इसे प्रकृति के नियम के विरुद्ध मानते हैं, जबकि कई लोगों का कहना है कि इस प्रक्रिया से न्यूक्लियर फैमिली का खात्मा होता जा रहा है। आज भी कई लोगों की नजर में यह प्रक्रिया एक बकवास है।
बर्थ डिफेक्ट पर लग सकती है रोक
मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि टेस्ट ट्यूब बेबी की प्रक्रिया से बर्थ डिफेक्ट पर रोक लगाई जा सकती है। गौरतलब है कि कई बच्चे पैदा होने से पहले ही बीमारियों का शिकार हो जाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो आईवीएफ (टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया) की मदद से इसे रोका जा सकता है।
क्या है टेस्ट बेबी प्रक्रिया?
टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया में पुरुष के शुक्राणु को महिला के शरीर के अंदर मशीन के जरिए इंजेक्ट किया जाता है। ओल्डहेम शहर के गायनकोलॉजिस्ट डॉ. पैट्रिक स्टेपटो और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. रॉबर्ट एडवर्ड ने अपनी रिसर्च के आधार पर एक अनूठे तरीके से महिला को गर्भवती बनाने की प्रक्रिया ढूंढी। इस प्रक्रिया का उपयोग उन्होंने लेस्ली ब्राउन पर अपनाया जो पिछले नौ साल से संतान के लिए तरस रही थी।
परिचय- हमारा भारत देश आज हर तरह की आधुनिक सुख-सुविधाओं से संपन्न हो चुका है। आज हम विश्व में काफी ऊपर गिने जाते हैं। भारत ने अपने यहां राकेट से लेकर कंप्यूटर तक बनाने में महारत हासिल की है लेकिन एक चीज जो सदियों पहले भी थी और आज भी है, वंश को चलाने के लिए पुत्र की जरूरत। आज भी बहुत से लोगों का मानना यही है कि अगर हमारा पुत्र नहीं होगा तो हमारे वंश का नाम मिट जाएगा। इसी चाह में लोग अपने घर में कई बच्चे पैदा कर लेते हैं। बहुत से लोगों का मानना यह है कि 3 बच्चों के बाद मां की कोख बदल जाती है यानि की उनके घर में अगर 3 लड़कियां होती है तो वह चौथे बच्चे की प्रतीक्षा करते हैं की वह तो लड़का ही होगा। लेकिन यहां पर भी अगर लड़की हो जाती है तो वह बिल्कुल परेशान हो जाते हैं। लेकिन इनके अलावा कुछ लोग ऐसे भी है जो लड़की को माता लक्ष्मी का रूप मानते हैं और चाहते हैं कि उनके घर में एक लड़की जरूर हो। यहां पर कुछ उपाय बताए जा रहे हैं जिनको अपनाकर जिनको लड़के की चाह है वह लडका प्राप्त कर सकते हैं और जिनको लडकी की चाह है वह लडकी प्राप्त कर सकते हैं- सबसे पहली बात अगर पुत्र प्राप्त करना है तो इसके लिए पुरु...
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