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करीब दो अरब लोग भूखे रहने पर अभिशप्त हो सकते हैं।

 अमेरिका के वायुमंडलीय और पर्यावरणीय वैज्ञानिकों के चार सदस्यीय एक दल ने एक अध्ययन इस बात को जानने के लिए किया है कि अगर सीमित स्तर पर क्षेत्रीय परमाणु युद्ध का आगाज हो जाए तो क्या होगा। इसके लिए वैज्ञानिकों ने 
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एक बच्चा बाजार के बाहर अपनी मां के आने का इन्तजार कर रहा था, तभी वहां से एक बाबाजी कुछ इधर- उधर
देखते हुए बच्चे की तरफ आ रहे थे उसने बच्चे को देखा तो यकायक पूछ लिया बेटा, जरा मुझे ये तो बताओ की ये पोस्ट ऑफिस कहां है?
बच्चे ने कहा बाबा यहां से सीधे आगे चले जाइये, आगे से अपने सीधे हाथ की तरफ मूड़ जाईये, वहां तीन चार सीढि़यां
नजर आएंगी बस उनको पार कर लेना वहीं सामने पोस्ट ऑफिस है!
बाबा ने बच्चे का धन्यवाद किया और कहा कि मैं एक बहुत बड़े मठ का बाबा हूं कभी हमारे मठ में आना मैं तुम्हें स्वर्ग जाने का रास्ता
दिखाऊंगा! बच्चे ने मजाकिया लहजे में कहा बाबा जाइये जाइये अभी पोस्ट ऑफिस का रास्ता तो पता नहीं स्वर्ग का रास्ता क्या खाक दिखाएंगे!


3 दृश्य हो सकता है तो महाशक्तियों के बीच जंग की तस्वीर को तो सोचा भी नहीं जा सकता है।

वैज्ञानिकों ने इस शोध के कंप्यूटर मॉडल तैयार करके उस हालात की भयावह तस्वीर देखने की कोशिश की है। यह शोध प्रतिष्ठित जर्नल 'अर्थ फ्यूचर' के हालिया अंक में प्रकाशित हुआ है। भयावह परिणामों पर एक नजर ..

विभीषिका :

- पारमाणु विस्फोटों के तुरंत बाद पांच मेगाटन ब्लैक कार्बन वायुमंडल में प्रवेश कर जाएगा। ब्लैक कार्बन चीजों के जलने के बाद उत्पन्न होता है और यह धरती पर पहुंचने से पहले सूर्य की ऊष्मा को सोख लेता है।

- एक साल के बाद धरती का तापमान करीब दो डिग्री फॉरेनहाइट गिर जाएगा। पांच साल बाद धरती औसतन आज की तुलना में तीन डिग्री ठंडी हो जाएगी। हालांकि बीस साल बाद फिर से इसका तापमान एक डिग्री बढ़ जाएगा। फिर भी यह परमाणु युद्ध के पहले की स्थिति से ठंडी ही रहेगी।

- पृथ्वी के गिरते तापमान के चलते इस पर होने वाली बारिश की मात्रा कम हो जाएगी। जंग के पांच साल बाद सामान्य की तुलना में बारिश में नौ फीसद कमी आ जाएगी। 26 साल बाद धरती पर परमाणु युद्ध होने से पहले की स्थिति से 4.5 फीसद कम बरसात होगी।

जंग :

वैज्ञानिकों की टीम ने यह परिकल्पित किया कि अगर भारतीय उपमहाद्वीप में 100 परमाणु हथियार गिरा दिए जाएं और प्रत्येक परमाणु बम आकार और मारक क्षमता में अमेरिका द्वारा हिरोशिमा पर गिराए गए बम यानी 16 किलोटन के बराबर हो तो कैसा भयावह मंजर होगा।

- जंग के 2 से 6 साल के भीतर फसली चक्र 10 से 40 दिन छोटा हो जाएगा। यह क्षेत्र पर निर्भर करेगा।

- वायुमंडल में होने वाली रासायनिक क्रियाएं धरती को सूरज की पराबैंगनी किरणों से बचाने वाली ओजोन परत को खत्म कर देंगी। जंग के पांच साल बाद ओजोन परत 20-25 फीसद पतली हो जाएगी। हालांकि दस साल बाद तक इसमें कुछ सुधार आएगा लेकिन तब भी इसकी मोटाई सामान्य की तुलना में 8 फीसद कम ही रहेगी।

- पराबैंगनी किरणों से सुरक्षा स्तर में कमी होने के चलते लोगों में सन बर्न और त्वचा के कैंसर जैसे रोग बढ़ेंगे। पौधों की वृद्धि प्रभावित होगी तो कुछ फसलों के डीएनए [डी ऑक्सी राइबो न्यूक्लियक एसिड] अस्थिर हो जाएंगे।

- करीब दो अरब लोग भूखे रहने पर अभिशप्त हो सकते हैं।



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